http://blogsiteslist.com

शनिवार, 30 जून 2012

मूल्यांकन

हेलो हेलो हेलो

बोलो जी बोलो

परीक्षा मूल्यांकन
का काम ऊपर
से विशेष आपके
लिये ही आया है
तीन तीन सौ
कापियों के पूरे
बीस बंडलों का
लौट हमने अभी
ट्रक से उतरवाया है
तुरंत उठवा के
यहां से ले जाइये
सात दिन के अंदर
जांच के हमको
वापस भिजवाइये

किस प्रश्नपत्र की हैं
कोई अंदाज हो
तो हमें जरा बताइये

सूरदास तुलसीदास
टाईप की लगती हैं
हिन्दी की हैं यही
मान ले जाइये

जनाब हिन्दी की
कैसे जाँच पाऊंगा
गैर कानूनी काम है
कहीं फंस फंसा तो
नहीं मैं जाउंगा
फिर किसको अपना
मुँह दिखा पाउंगा

डरने की जरूरत
बिलकुल नहीं है जनाब
सब लोग हम है
मजबूती से एक
दूसरे के पक्का साथ
जल्दी परीक्षाफल
अगर निकाल ले जायेंगे
अपने लिये ना सही
अपने साहब के लिये
कोई तमगा कहीं से
तो एक बटोर लायेंगे
इसलिये दिमाग हमने
बहुत लगाया है
जिसका विषय जो है
उसकी कापियों को
किसी और को जाँचने
के लिये भिजवाया है
किसने क्या लिखा है
अगर समझ में
ही नहीं आयेगा
परीक्षक झक मारकर
कापी अंदर से देखने
का काम नहीं बढ़ायेगा
बाहर से ही अंक कुछ
तो टिका ले ही जायेगा
हमारा काम भी
फटाफट हो जायेगा

कौन पूछ रहा है फिर
पेमेंट भी आपका
हाथों हाथ जब
हो ही जायेगा।

शुक्रवार, 29 जून 2012

सरकारी राय

शहर का एक इलाका
सड़क में पड़ी पचास
मीटर लम्बी दरार
लपेट में आये कुछ
लोगों के घर चार
जिलाधिकारी आया
साथ में सत्ता पक्ष
के विधायक को लाया
मौका मुआयना हुआ
नीचे खुदा हुआ बहुत
बड़ा एक पहाड़
सबको सामने दिखा
कुछ दिन पहले सुना
बड़ी बड़ी मशीने
रात को आई
रात भर आवाजे कर
सुबह को पता नहीं
किसने कहाँ पहुँचाई
किसने खोदा सबके मुँह
तक नाम आ रहा था
गले तक आकर पीछे
को चला जा रहा था
इसी लिये कोई
कुछ भी बताने
में इच्छुक नजर
बिल्कुल भी नहीं
आ रहा था
जिलाधिकारी अपने
मातहतों के उपर
गुस्सा बरसा रहा था
अखबार में अखबार
वाला भी खबर
छपवा रहा था
नाम पर किसी का
नहीं कहीं भी
कोई आ रहा था
हर कोई कोई है
करके सबको
बता रहा था
सरकारी अमला
घरवालों के घरों
को तुरंत खाली
करवा रहा था
साथ में मुफ्त में
समझाये भी
जा रहा था
जब देख रहे थे
पहाड़ नीचे को
जा रहा था
तो किस बेवकूफ
के कहने पर तू यहाँ
घर बना रहा था
खोदने वाले को कुछ
नहीं कोई कर पायेगा
भलाई तेरी इसी में
दिख रही है अगर
तू बिना कुछ कहे
कहीं को भाग जायेगा
इसके बाद भूल कर भी
जिंदगी में कही पर
घर बनाने की गलती
दुबारा नहीं दोहरायेगा।

गुरुवार, 28 जून 2012

दीवाने/बेगाने

चाँद
सोचना

चाँदनी
खोदना

तारों की
सवारी

फूलों पर
लोटना


तितलियों
को देख

खुश
हो जाना

मोरनियाँ
पास आयें

मोर
हो जाना

पंख फैलाना
नाच दिखाना

आँखे कहीं
दिख जायें

बिना देखे
कूद जाना

तैरना
आता हो

तब भी
डूब जाना


किसी और
को पिलाना

बहक खुद
ही जाना

जमाना
तो है ऎसे 

ही दीवानो
का दीवाना


लकड़ी की
सोचना

मकड़ियों
को देखना

सीधा कोई
मिल जाये

टेढ़ा हो जाना

मिट्टी तेल
की ढिबरी

से चाँद
तारे बनाना

जब तक
पडे़ नहीं

बैचेनी
दिखाना

पड़ी में
दो लात

ऊपर
से खाना

गधे की
सोचना

शुतुरमुर्ग
हो जाना


किसी के
भी फटे में

जाकर के
टांग अढ़ाना

किसकी
समझ में

आता है
ऎसों
का गाना

टूटे फूटे इन
बेगानों को

किसने है
मुँह लगाना।

बुधवार, 27 जून 2012

विदाई

आज मैडम जी को
विदा कर के आया
उनके अवकाश ग्रहंण
के उपलक्ष्य में था
विभाग ने एक
समारोह करवाया
विदाई समारोह में
ऎसा महसूस होने
लग जाता है
मजबूत से मजबूत
आदमी भी थोड़ा
भावुक अपने को
जरूर दिखाता है
कौऎ मुर्गी कबूतर
भी होते हैं कहीं
आस पास में मौजूद
माहौल उन सबको भी
बगुला भगत बनाता है
एक के बाद एक
मँच पर बोलने
को बुलाया जाता है
कभी कुछ नहीं
कहने वाला भी
लम्बा एक भाषण
फोड़ ले जाता है
कोई शेर लाता है
शायर हो जाता है
कोई गाना सुनाता है
किशोर कुमार की
टाँग तोड़ने में जरा
भी नहीं घबराता है
कविता ले के आने वाला
अपने को सुमित्रा नन्दन पँत
हूँ कहने में नहीं शरमाता है
सेवा काल में सबसे ज्यादा
गाली खाने वाला जो होता है
सबसे बड़ी माला
वो ही तो पहनाता है
सारे गिले शिकवे भूल कर
नम आँखों से मुस्कुराता है
आँसू बनाने के लिये
कोई भी ग्लीसरीन
तक नहीं लगाता है
शब्दों का चयन देखने
लग जाये अगर कोई
अपने को अर्थ ढूढने में
असमर्थ पाता है
भावार्थ ढूँढने के लिये
घर वापस लौट कर
शब्दकोष ढूँढने
लग जाता है
इससे सिद्ध ये जरूर
लेकिन हो जाता है
कि अवकाश ग्रहण
करना माहौल को
ऊर्जावान जरूर ही
बना ले जाता है
फिर ये समझ में
नहीँ आ पाता है
कि विभागों में
शाँति व्यवस्था
कायम करने के लिये
अवकाश लेने देने को
हथियार क्यों नहीं
सरकार द्वारा एक
बना लिया जाता है ।

मंगलवार, 26 जून 2012

सच्ची बात

दिमाग
है जितना
अपने पास में
पूरा लगाता हूँ

चालाकी
अपनी ओर
से पूरी कर
ले जाता हूँ

किस्मत
का मारा
मगर कहीं तो
फँसा फिर भी
लिया जाता हूँ

साहब
करते हैं
कोशिश मुझे
घोड़ा अपना
बनाने की

गधा
तक बन
कर बीच में ही
रुक जाता हूँ

देखलो
उनको भी
चूना लगा
इस तरह मैं
ले जाता हूँ

लदवाना
जहाँ
चाहते हैं
बोरा 
एक
मेरे ऊपर


झोला
ही उनका
बस उठा के
ले जाता हूँ

चमचागिरी
करना भी
चाहूँ कभी

ठीक
मौके पर
आकर के
शरमा
ही जाता हूँ

चालाकी
का नमूना
फिर भी
देखिये जनाब

शहर
के हर
कोने में
उनके चमचे
के नाम
से फिर भी
जाना जाता हूँ

अपनी
गली में
पहुँचा नहीं जैसे
शेर
एक बब्बर
सा हो जाता हूँ

प्लास्टिक
के नाखून
पहन कर के
सारे मोहल्ले
की बिल्लियों
को डराता हूँ

सही
जगह पर
माना कि कुछ
कह नहीं पाता हूँ

यहाँ
पहुँच कर
सच्ची बात मगर
दोस्तों को अपने
जरूर बताता हूँ

बताइये
क्या थोड़ा
सा भी
कहीं किसी से
शरमाता हूँ।

सोमवार, 25 जून 2012

कार ला दो एक उधार ला दो

सुनो जी सुनो जी
एक कार अब तो
ले ही आते हैं
पैसा अपना किसी
बैंक में पहले
फिक्स करवाते है
उसके बाद किसी
से कुछ उधार
लेने की योजना
एक बनाते हैं
बैंक से उधार लेने
पर तो ब्याज सिर
चढ़ता चला जायेगा
किसी पड़ोसी या दोस्त
को फसाने से काम
बहुत आसान हो जायेगा
कुछ लम्बा समय भी
मिल जायेगा
और खाली मूलधन
लौटाने से भी काम
हमारा चल ही जायेगा
आज से ही रेकी करना
आप शुरू कर डालिये
पहले पैसे वाले जो
पैदल चला करते हैं
उन पर नजर डालिये
ऎसे लोग बड़ी किफायत
के साथ चला करते हैं
पैसा बर्बाद बिल्कुल नहीं
कभी करते हैं
बस जरूरत की चीजें
ही खरीदा करते हैं
छोटे समय में इन
लोगों के पास अच्छी
पूंजी जमा हो जाती है
जो किसी के भी कहीं
काम में नहीं आ पाती है
इन लोगों को अपने
पैसे को कहीं लगाना
आप सिखलाइये
जमाना कहाँ से कहाँ
पहुँच गया है इनको
आईना दिखलाइये
जीने चढ़ उतर कर
ये इधर उधर पैदल
जाते रहें कहीं भी
हमें मतलब नहीं
बस हमारे ऊपर
थोड़ा सा तरस
ये खा सकें इसके लिये
इनके सामने गिड़गिड़ाने
में आप बिल्कुल
भी ना शर्माइये
सफाई कर्मचारी तक
आजकल झाडू़ लेकर
कार पर आने लगे हैं
हमें भी एक कार
दिलवाकर इज्जत
हमारी नीलाम सरेआम
होने से बचाइये।

रविवार, 24 जून 2012

कुछ नया किया जाये

खुद के मन के अंदर
घुमड़ रहा हो जो
जरूरी नहीं उसका
बादल बनने दिया जाये
दूसरा बादल कहीं और
बना के क्यों ना
बरसने दिया जाये
अपने चेहरे को अपने
आईने में ही देखा जाये
जरूरी नहीं जो दिखे
खुद को उसे किसी
और को दिखाया जाये
अपने अपने आईने को
पर्दों से ढक दिया जाये
कोई क्या देख रहा है
उनके अपने आईने में
किसी से ना पूछा जाये
वीराने बुनने वालों को
किसी दिन बिल्कुल
भी ना टोका जाये
एक दिन तो ऎसा
हो जिस दिन अपने
गमलों को बस देखा जाये
उनकी आवारगी को आज
नजरअंदाज कर दिया जाये
एक दिन के लिये सही 
अपना ही आवारा 
हो लिया जाये
चुपचाप आज दिन में
ही सो लिया जाये
कुछ पल का ही सही
मौन ले लिया जाये
अपनी बक बक की रेल
को लाल सिग्नल दिया जाये
किसी और का सुरीला गीत
आज के लिये सबको
सुनने को दिया जाये।

शनिवार, 23 जून 2012

जरूरत है

जरूरत है एक
अदद अधिकारी की
एक उसके नीचे के
भी एक कर्मचारी की
शैक्षिक योग्यता
क्या होनी चाहिये
ये अभी किसी को
नहीं बताया जायेगा
साक्षात्कार के समय
अभ्यर्थी का ये
सस्पेंस भी दूर
कर दिया जायेगा
काम के बारे में
हर राज अभी के
अभी यहीं पर
खोल दिया जायेगा
पहला काम यह है
कभी भी काम पर
कहीं नहीं आना है
जो काम पर आता है
उसके बारे में
पता करके हमें
टेलीफोन से
रोज बताना है
कामचोर और
हरामखोर लोगों का
उत्साह बढा़ना है
कामचोरी के साथ
हरामखोरी भत्ता
भी हर महीने
इनको दिलवाना है
काम करने वाले
लोगों को काली
सूची में डलवाना है
कर सको तो ऎसे लोगों
का बैण्ड बाजा भी
बजवाने में
बिल्कुल भी नहीं
हिचकिचाना है
वेतन के अलावा
कहाँ कहाँ से पैसा
उगाया जा सकता है
इस प्रकार के विषयों
पर पुन:श्चर्या कार्यक्रम
साल मे तीन चार बार
जरूर करवाना है
फीता काटने के लिये
बड़े साहब के अलावा
किसी को नहीं लाना है
वो आ रहे हैं किस दिन
इस बात को केवल
उन लोगों को बताना है
जिनको कभी भी काम
पर कहीं नहीं आना है ।

शुक्रवार, 22 जून 2012

कर नया कुछ

चलिये आज कुछ
मूड बदल दिया जाये
कुछ रूमानी बातों में
दिल को अपने
जबरदस्ती  
धकेल
लिया जाये

कहाँ से करें शुरू
कि

मजा ही मजा हो जाये

पिताजी आज बिजली
वाला आया था
पुराने बहुत से बिल
जमा नहीं हुवे हैं
समझाने आया था

छोड़िये भी
रहने दीजिये
इधर से भी
ध्यान हटाते हैं
बारिश नहीं हो रही है
बहुत समय से
लोग बताते हैं
कुछ बादलों की
सोच कर
सपनों में ही सही
नमी ले आते हैं

सुनते हो जी
गैस का सिलिण्डर
वापिस आ गया है
मेट को गाड़ी वाले ने
वापिस लौटा दिया है
कल से स्टोव में
खाना बनाइयेगा
आज अभी जा के
कैरोसिन पाँच लीटर
जरा बाजार से
ब्लैक में ले आइयेगा

उफ एक कोशिश
अंतिम कोशिश
क्या पता मूड
बन ही जाये
अंधे के हाथ में
कानी बटेर कहीं
से आ जाये

इंद्रधनुष देखे सोचे हुवे
एक अर्सा बीत गया
रंगों को सब काला सफेद
मौका मिलते ही
हर कोई कर गया
चलो घर पर ही
उसे बना लिया जाये
बल्ब की तेज रोशनी करके
पानी की फुहारों को
हवा में उडा़या जाये

आम जनता को
सूचित किया जाता है
बिजली कटौती से
चूंकि पम्प नहीं
चल पाता है
अगले दो दिन पानी
नहीं आ पायेगा
जिसे प्यास लग ही गयी
बिसलेरी बाजार से
अपने लिये खरीद
के ले आयेगा

रहने भी दीजिये
किसी और दिन अब
खुश रहने का जुगाड़
कर लिया जायेगा
आज भी कटे फटे
मुद्दों पर ही ध्यान
लगाया जायेगा
पढ़ने वाले भी
इसी के आदी
हो चुके हैं
खाली कहीं नई
रंगीन बात छपी
देख कर यहां
किसी को तेज
बुखार आ जायेगा ।

गुरुवार, 21 जून 2012

तुमको तो कुछ आता है

सुना है तुमको
भी कुछ आता है
मेरे को मेरे पड़ोस
में रहने वाला यहीं का
एक मास्टर बताता है
लिखते विखते हो
फिर हिन्दी में टाईप
भी कर ले जाते हो
मेरी समझ में ये
लेकिन नहीं आता
इतनी मेहनत फालतू
काहे कर जाते हो
सीधे सीधे घर के
अखबार में ही
कुछ क्यों नहीं
छपा ले जाते हो
अखबार तो बहुत से
लोगों के द्वारा देखा
और पढा़ जाता है
जिसे कुछ भी नहीं
आता है वो भी अखबार
एक जरूर खरीद
के ले जाता है
अड़ोस पड़ोस मोहल्ले वाले
नाई धोबी सब्जी वाले
को भी पता इस तरह
चल जाता है 
कोई लिख रहा है कुछ
समझ मे नहीं भी आये
तब भी वो कुछ तो
समझ जाता है
कि लिखने वाले को
कुछ आता है
कंप्यूटर में लिखने से
तुमको क्या मिल जाता है
कितने आदमी को
ये बता पाता है
कि तुमको भी
कुछ आता है
कुछ रोज के मजबूरी में
इधर से गुजरने वालोंं को
तो पता चल जरूर जाता है
उसमें से एक कुछ
पढ़ पाता है और
कुछ कह भी जाता है
एक बिना पढे़ लाईक
कर के चला जाता है
किसी को समझ में
नहीं भी आये तो भी
उसको शेयर करने में
ही मजा आ जाता है।

बुधवार, 20 जून 2012

जवान के साथ जा जवान हो जा

कुछ कुछ खुश खुश
थोड़ा सा रसिक मिजाज
सबसे जुदा जुदा अंदाज
वाले एक हमारे साहब
लगा रहे थे दूर कहीं
नजर आ रहे एक
सज्जन को जोर
जोर से आवाज
अरे भाई कहां से
आज आ रहे हो
बड़े दिनो बाद
यहां पर हमें
शक्ल दिखा रहे हो
भैय्या जी ने
पान की गिलौरी
को गाल में थोडा़
किनारे को खिसकाया
मुँह ऊपर करके
कुछ स्पष्ट कुछ
अस्पष्ट भाषा में
उनको बताया
शैक्षिक भ्रमण
करके आ रहे हैं
बालक बालिकाओं
को देश के कई
इलाके दिखलाके
वापस ला रहे हैं
साहब ने उत्सुकता
दिखाते हुवे एक फार्मूला
हवा में उछाला
खूबसूरत महिलाओं
के साथ ने आदमी
की उम्र को कई बार
कई जगह बहुत
कम है कर डाला
आप भी इसीलिये
आज कुछ जवान से
नजर आ रहे हो
चेहरे से भी अपनी
उम्र कुछ कम
आज बता रहे हो
साहब जी वैसे तो
आप सही फरमा रहे हो
पर श्रीमति जी हमे
अकेला कभी कहीं
नहीं जाने देती
इसीलिये हमारे
साथ साथ भ्रमण
में गाइड का काम
खुद ही हैं ले लेती
जवान बच्चों का
साथ मेरी उम्र
पच्चीस साल
अगर कम कहीं कराता
बीबी की परछाई
के छूते ही समय
पचास साल आगे
चला है जाता
जवान ऎसे बताइये
मै कहाँ हो पाउंगा
दो चार भ्रमण अगर
साल में हो गये
भगवान को प्यारा
जरूर ही हो जाउंगा।

मंगलवार, 19 जून 2012

पति पर सट्टा

घर की लड़की
बहन या पुत्री
के लिये पति
एक सर्वश्रेष्ठ
ही ढूँढा जाता है
ठोक बजा कर
उसे हर कोण से
देखा परखा जाता है
जीवन संगिनी बना
कर फिर उसे प्यार
से सहेज कर भेजा
ससुराल को जाता है
यहाँ पर लेकिन
पति की खोज
एक पूरा खेल
वो भी उल्टा
नजर आता है
पहले तो हर
पाँच साल में
एक पति को
अवकाश दे
दिया जाता है
अगले पति की
खोज में नया
फिर बाजार
सजाया जाता है
पहली बार
इस बार तो
गजब सुना है
पाँच सौ करोड़
का सट्टा भी
खेला जाता है
काम का है या
बेकार का है
बिल्कुल भी
नहीं देखा जाता है
कभी कभी इस
जुए में जोकर
भी एक मौका
पा जाता है
इस बार महसूस
पता नहीं क्यों हो
रहा है कहीं कोई
उपर की मंजिल
खाली तो मौका
नहीं पा जाता है
मालूम सबको है
पर देखना भी है
ऎ राष्ट्र कि इस
बार तू किस
बेवकूफ को
वरमाला इनके
इशारों पर
पहनाता है ।

सोमवार, 18 जून 2012

नयी कबड्डी

पता ही नहीं
लग पा रहा है
मेरे घर में क्या
होने जा रहा है
हर महीने विपक्ष
से एक पक्ष में
आ कर मिल
जा रहा है
वोटर तेरे वोट
का ये सिलसिला
तेरे को दिया
जा रहा है
क्या तेरी समझ में
ये सब साफ साफ
आ रहा है
तेरा नेता तेरे को
कोई धोखा सीधे
सीधे दिये जा रहा है
सुना है तीन महीने
के अंदर विपक्ष भी
पक्ष के अंदर सेंध
लगाने के लिये
जा रहा है
बड़ा छेद करके
खुद सरकार अपनी
बनाने जा रहा है
वोटर तेरे को
सांप क्यों सूंघ
जा रहा है
तू कुछ क्यों नहीं
बोल पा रहा है
मेरी समझ में
तेरा इस
तरह शर्माना
बिल्कुल भी नहीं
आ पा रहा है
आइडियोलोजी के
कालर खडे़ करने
वालों को पसीना
क्यों आ रहा है
मुझे तो किसी पर
क्या कमेंट करूंं
कुछ कहना ही
नहीं आ रहा है
पर क्या
यह व्यवहार
वेश्यावृति से
सौ प्रतिशत मेल
नहीं खा रहा है।

रविवार, 17 जून 2012

तेरा दिन है आज

हैप्पी फादर्स डे बापू
आज मुझे तू बहुत
याद आ रहा है
सुना है तेरा दिन है
और तू उसे धूमधाम
से कहीं मना रहा है
अखबार टी वी मीडिया
हर जगह तेरी फोटो
को दिखाया जा रहा है
बचपन से बढ़कर जवान
भी अगर कोई हो जाता है
बापू तू सामने खड़ा बेटे को
हर जगह नजर आता है
शादी होते ही बेटे की
बापू लोगों का वेट थोड़ा
सा कम हो ही जाता है
तू बापू के साथ एक लड़की
का ससुर जो हो जाता है
समझदार बापू अगर हो
अपने बैंक बैलेंस से बैलेंस
इसको कर ही ले जाता है
दिमागदार बापू इस तरह
मरने मरने तक बापू का
तमगा चमकाये चला
जाता है बहुत कुछ पाता है
फादर्स डे को ग्रीटिंग कार्ड
डाकिया भी उसको देने आता है
जेब अपनी हल्की कर गया
जिंदगी में गल्ती से भी कहीं
वो वाला बापू पूअर डैडी
हो जाता है फादर्स डे के
दिन अखबार के विज्ञापन
में बाप का फोटो देखता है
थोड़ी देरे को सँजीदा
हो जाता है बेटे की चिंता
में फिर से कहीं खो जाता है ।

शनिवार, 16 जून 2012

प्रेम की परिभाषा

आखें
बंद कर
जैसे कहीं
खो बैठे वो

प्रेम के
सागर में
गोते जैसे
खाने
अचानक
लगे हों

पूछने लगे
हमसे
भैया जी
प्रेम की कोई
परिभाषा
जरा हमेंं
बताइये
प्रेम है
क्या बला
जरा हमेंं
आप आज
समझाइये

'प्रेमचंद' की
'ईदगाह'
के
'हामिद' का
उसकी
दादीजान से
'मीराबाई'
का 'कृष्ण'से
पिता का पुत्र से

या फिर
किसी भी
तरह का प्रेम
जो आपकी
समझ में
आता हो
प्रेम के
सागर की
लहरों में
हिलोरों में
झूला आपको
कभी झुलाता हो

बडा़ झंझट
है जी
हमारे
साथ ही
अक्सर
ऎसा क्यों
हो जाता है
जो सबको
मुर्गा दिखाई
दे रहा हो
हमारे सामने
आते ही
कौआ काला
बन जाता है

'हामिद' सुना
था कुछ
फालतू काम
करके आया था
अपनी दादीजान
की उंगलियां
आग से बचाने
के लिये मेले से
चिमटा एक
बेकार का
खरीद कर
लाया था

'मीराबाई'
भी जानती थी
शरीर नश्वर है
और
'कृष्ण' उसके
आसपास भी
कभी नहीं
आया था

मरने मरने
तक उसने
अपने को यूँ ही
कहीं भरमाया था

किसने
देखा प्रेम
किसी
जमाने की
कहानियाँ
हुआ करती थी

प्रेम
अब लगता है
वाकई में
इस जमाने
में ही खुल
कर आया है

सब कुछ
आकर देखिये
छोटे छोटे
एस एम एस
में ही समाया है

जिंदगी के
हर पड़ाव
में बदलता
हुआ नये
नये फंडे
सिखाता
हमें आया है

नये रंग के साथ
प्रेम ने नया एक
झंडा हमेशा ही
कहीं फहराया है

चाकलेट
खेल खिलौने
जूते कपड़े
स्कूल की फीस
छोटे छोटे
उपहार
कर देते थे
तुरंत ही
आई लव यू
का इजहार

प्रेम की
वही खिड़की
विन्डो दो हजार
से अपडेट हो कर
विन्डो आठ जैसी
जवान हो कर
आ गयी है तैयार

तनिश्क
के गहने
बैंक बैलेंस
प्रोपर्टी
कार
हवाई यात्रा
के टिकट के
आसपास
होने पर
सोफ्टवेयर
कम्पैटिबल है
करके बता जाती है

खस्ता हाल
हो कोई अगर
उसके प्रेम
के इजहार पर
अपडेट कर लीजिये
का एक
संदेश दे कर
हैंग अपने आप
ही हो जाती है।

शुक्रवार, 15 जून 2012

कुछ नहीं

अच्छा तो फिर 
आज क्या कुछ 
नया यहाँ लिखने
को ला रहे हो
या रोज की तरह
आज भी हमको
बेवकूफ बनाने
फिर जा रहे हो
ये माना की
बक बक आपकी
बिना झक झक
हम रोज झेल
ले जाते हैं
एक दिन भी नागा
फिर भी आप
कभी नहीं करते
कुछ ना कुछ
बबाल ले कर
यहाँ आ जाते हैं
लगता है आज कोई
मुद्दा आपके हाथ
नहीं आ पाया है
या फिर आपका
ही कोई खास
फसाद कहीं कुछ
करके आया है
कोई बात नहीं
कभी कभी ऎसा
भी हो ही जाता है
मुर्गा आसपास
में होता तो है
पर हाथ नहीं
आ पाता है
आदमी अपनी
जीभ से लाख
कोशिश करके भी
अपनी नाक को
नहीं छू पाता है
लगे रहिये आप
भी कभी कमाल
कर ले जायेंगे
कुछ ऎसा लिखेंगे
कि उसके बाद
एक दो लोग
जो कभी कभी
अभी इधर को
आ जाते हैं
वो भी पढ़ने
नहीं आयेंगे
कुछ कहना लिखना
तो दूर रहा
सामने पढ़ ही गये
किसी रास्ते में
देखेंगे आपको जरूर
पर बगल की गली से
दूसरे रास्ते में खिसक
कर चले जायेंगे
बाल बाल बच गये
सोच सोच कर
अपने को बहलायेंगे।

गुरुवार, 14 जून 2012

चाँद मान भी जा

गैस के सिलिण्डर
पानी बिजली
की कटौती से
ध्यान हटवा
ऎ चांद अपनी
चाँदनी और सितारों
के साथ कभी तो
मेरे ख्वाबों में भी आ
भंवरों की तरह
मुझ से  भी कभी
फूलों के ऊपर
चक्कर लगवा
खुश्बू से तरबतर कर
धूऎं धूल धक्कड़
सीवर की बदबू से
कुछ देर की सही
राहत मुझे दिला
इतनी नाइंसाफी ना कर
कोई दिये जा रहा है
किसी को अपने
घर के गुलदस्ते
और फूलों को
ला ला कर
मुझ को भी कोई
ऎसा काम कभी
पार्ट टाईम
में ही दिलवा
रोज आलू सब्जी
दाल चावल की
लिस्ट हाथों में
मेरे ना थमवा
मानता हूँ हुए
जा रहा है बहुत कुछ
अजब गजब सा
चारों तरफ हर ओर
इन सब पर कभी तो
कुछ कुछ आशिकों
से भी लिखवा
कुछ देर के लिये सही
मेरी सोच को बदलवा
मुझे भी इन सब लोगों
का जैसा बनवा
ऎ चाँद सितारों के
साथ कभी तो आ
कुछ रसीली खट्टी
मीठी बातें कभी
मुझसे भी लिखवा
बस अजूबों पर ही
मेरा ध्यान ना डलवा
आज के आदमी
का अक्स मेरे
अंदर भी ले आ
ऎ चांद अपनी
चाँदनी और सितारों
के साथ कभी तो
मेरे ख्वाबों
में भी आजा।

बुधवार, 13 जून 2012

कुछ तो सीख

रसोईया मेरा बहुत अच्छे
गाने सुनाता है
तबला थाली से ही
बजा ले जाता है
बस कभी कभी
रोटियां जली जली
सी खिलाता है
अखबार देने एक
ऎसा आदमी आता है
ना कान सुनता है
ना ही बोल पाता है
हिन्दुस्तान डालने को
अगर बोल दिया
उस दिन पक्का
टाईम्स आफ इंडिया
ले कर आ जाता है
लेकिन दांत बहुत ही
अच्छी तरह दिखाता है
बरतन धोने को जो
महिला आती हैं
छ : सिम और एक
मोबाईल दिखाती है
आते ही चार्जर को
लाईन में घुसाती है
उसके आते ही
घंटियाँ बजनी शुरु
घर में हो जाती हैं
बरतनो में खाना
लगा ही रह जाता है
पानी मेरी टंकी का
सारा नाली में बह
के निकल जाता है
मेहमान मेरे घर
में जब आते हैं
अभी तक मास्टर
ही हो क्या
पूछते हैं फिर
मुस्कुराते हैं
कुछ अब कर
भी लीजिये जनाब
की राय मुझे
जाते जाते जरूर
दे के जाते हैं
अब कुछ उदाहरण
ही यहाँ पर बताता हूँ
चर्चा को ज्यादा लम्बा
नहीं बनाता हूँ
बाकी लोगों के
कामों की लिस्ट
अगले दिन के
लिये बचाता हूँ
पर इन सब से
पता नहीं मैं
अभी तक भी
कुछ भी क्यों नहीं
सीख पाता हूँ।

मंगलवार, 12 जून 2012

विद्वान की दुकान

विद्वानो की छाया तक
भी नहीं पहुंच पाया
तो विद्वता कहाँ
से दिखा पाउंगा
कवि की पूँछ भी
नहीं हो सकता
तो कविता भी
नहीं कर पाउंगा
विचार तो थोड़े से
दिमाग वाले के भी
कुछ उधार ले दे के
भी पनप जाते हैं
कच्ची जलेबियाँ पकाने
की कोशिश जरूर करूंगा
हलुआ गुड़ का कम से कम
बना ही ले जाउंगा
भैया जी आपकी
परेशानी बेवजह है
किसी लेखन प्रतियोगिता
में भाग नहीं ही
कभी लगाउंगा
अब जब दुकान
खोल के बैठ ही गया
हूँ इस बाजार में
तो किसी ना किसी
तरह जरूर चलाउंगा
कहाँ कहाँ पिट पिटा
के आउंगा मलहम
कौन सा उसके बाद
हकीम लुकमान से
बनवा के लगवाउंगा
अब बोलचाल की
भाषा में ही तो यहाँ
आ के बता पाउंगा
किसी से कहलवा कर
पैसे जेब के लगवाकर
आई एस बी एन नम्बर
वाली कोई किताब भगवान
कसम नहीं छपवाउंगा
चिंता ना करें किसी नयी
विधा का अपने नाम से
जन्म/नामकरण हुवा है
कहकर कोई नया
सेल्फ फाईनेंस कोर्स
भी नहीं कहीं चलवाउंगा
आप अपनी दुकान की
चिंता करिये जनाब
अपने धंधे से आपके
व्यवसाय के रास्ते में
रोड़े नहीं बिछाउंगा
कोई नुकसान आपकी
विद्वता को मैं अनपढ़
बताइये कैसे पहुंचाउंगा।

सोमवार, 11 जून 2012

डिस्को मुर्गे

समय के साथ
चलना जरूरी है
परिवर्तन के साथ
बदलना मजबूरी है
मुर्गे स्वदेशी इसी
चीज के पीछे
पीछे जा रहे हैं
अपनी को टोपी के
नीचे छिपा कर
ऊपर से विदेशी
कलगी लगा रहे हैं
जब तक मुँह नहीं
खोलते अच्छा प्रभाव
भी जमा रहे हैं
पर बाँग देते समय
बेचारे रंगे हाथों
पकड़े भी जा रहे हैं
अब अपने घर के
अपने ही मुर्गे हैं
हम भी कुछ कह
नहीं पा रहे हैं
उनकी बेढंगी चालों
पर ताल बजा रहे हैं
ना चाहते हुवे भी
एक मौन स्वीकृति
दिये जा रहे हैं ।

रविवार, 10 जून 2012

लेखक मुद्दा पाठक

कोई चैन से लिखता है
कोई बैचेनी सी दिखाता है
डाक्टर के पास दोनो ही
में से कोई नहीं जाता है
लिख लेने को अपना

इलाज बताता है
विषय हर किसी का
बीमारी है या नहीं
की जानकारी दे जाता है
कोई मकड़ी की टाँगों
में उलझ जाता है
कोई किसी की आँखों
में घुसने का जुगाड़
बनाता है
किसी को सत्ता पक्ष से
खुजली हो जाती है
विपक्षियों की उपस्थिति
किसी पर बिजली गिराती है
पाठक भी अपनी पूरी
अकड़ दिखाता है
कोई क्या लिखता है
उस पर कभी कभी
दिमाग लगाता है
जो खुद लिखते हैं
वो लिखते चले जाते हैं
कुछ नहीं लिखने वाले
इधर उधर नजर मारते
हुवे कभी नजर आते हैं
हर मुद्दे पर कुछ ना कुछ
लिखा हुवा मिल ही जाता है
गूगल आसानी से उसका
पता छाप ले जाता है
किसी को एक पाठक
भी नहीं मिल पाता है
कोई सौ सौ को लेकर
अपनी ट्रेन बनाता है
कुछ भी हो लिखना
पढ़ना बिना रुके
अपने रास्ते चलता
चला जाता है
मुद्दा भी मुस्कुराता है
अपने काम पर
मुस्तेदी से लगा हुवा
इसके बाद भी
नजर आता है।

शनिवार, 9 जून 2012

उल्लू की रसोई

रोज कोशिश करता हूँ
कुछ ना कुछ पका ही
ले जाता हूँ
खुद खाने के लिये नहीं
यहाँ परोसने के
लिये ले आता हूँ
कुछ खाने वाले खीर
को आईसक्रीम बताते हैं
चीनी डाली है कहने पर
नमक तेज डाल दिया
तक कह जाते हैं
अब रसोईया वही तो
पका पायेगा
जिस चीज का कच्चा
माल अपने आस पास
उसे मिल जायेगा
खाने वाले को पसंद
आये तो ठीक
नहीं भी आये तब भी
परोस तो दिया ही जायेगा
कोई थोड़ा खायेगा
कोई पूरा खा जायेगा
कोई कोई थाली को सरका
के किनारे से निकल जायेगा
किसी के मन बहुत ज्यादा
भा गया खाना मेरा
तो रोटियाँ अपनी थाली
के लिये उठा ले जायेगा
मेरा क्या जायेगा? 

शुक्रवार, 8 जून 2012

पहचान

अपनी भी कुछ पहचान
चलो आज बनाते हैं
चल मुँह धो के आते हैं
मंजिल तक पहुंचने के
लम्बे रास्ते से ले जाते हैं
कुछ राह्गीरों को आज
राह से भटकाते हैं
चल मुँह धो के आते हैं
चलचित्र 'ऎ' देखने
का माहौल बनाते हैं
उनकी आहट सुनते ही
चुप हो जाते हैं
बात बदल कर गांंधी
की ले आते हैं
चल मुँह धो के आते हैं
बूंद बूंद से घड़ा भर जाये
ऎसा कोई रास्ता अपनाते हैं
चावल की बोरियों में छेद
एक एक करके आते हैं
चल मुँह धो के आते हैं
अन्ना जी से कुछ कुछ
सीख के आते हैं
सफेद टोपी एक सिलवाते हैं
चल मुँह धो के आते हैं
किसी के कंधे की सीड़ी
एक बनाते हैं
ऊपर जाकर लात मारकर
उसे नीचे गिराते हैं
सांत्वना देने उसके घर
केले ले कर जाते हैं
चल मुँह धो के आते हैं
देश का बेड़ा गर्क करने
की कोई कसर कहीं
नहीं छोड़ के जाते हैं
भगत सिंह की फोटो
छपवा के बिकवाते हैं
एक रुपिया सरकारी
खाते में जमा करके
बाकी निन्नानबे घर
अपने पहुंचवाते हैं
अपनी भी कुछ पहचान
चलो आज बनाते हैं
चल मुँह धो के आते हैं।

गुरुवार, 7 जून 2012

आपदा फिर से आना

भीषण हुवी थी
उस बार बरसात
आपदा थी
दूर कहीं एक गाँव था
एक स्कूल था
दर्जन भर बच्चे थे
मौत थी वीरानी थी
कुल जमा दो
साल पहले की
ये बात थी
सभी को हैरानी थी
निकल गयी उसके
बाद कई बरसात
मंत्री जी से ठेकेदार
पैसे की थी इफरात
स्कूल फिर से गया
उसी जगह पर बनाया
मंत्री जी
हो गये भूतपूर्व
सरकार को
इस बीच गंवाया
अखबार हो गये
सब जब दूर
खबर बनाने को
स्कूल के
उदघाटन का
मन बनाया
कार्यक्रम होने
ही वाला था
पूर्व संध्या को
स्कूल भरभराया
सीमेंट रेता
मिट्टी हो कर
जमीन में सोने
चला आया
हाय रे हाय
वर्तमान सरकार
ठीकरा तेरे सर
फूटने को आया
मंत्री जी ने अपनी
झेंप को मिटाया
सी बी आई से
होगी इन्क्वारी
का भरोसा गांव
वालों को दिलवाया
लाव लश्कर के साथ
अपना काफिला
वापस लौटाया
ऎसा वाकया
पहली बार
देखने में
है आया।

बुधवार, 6 जून 2012

आँख आँख

घर में आँख से
आँख मिलाता है
खाली बिना बात के
पंगा हो जाता है
चेहरा फिर भाव
हीन हो जाता है
बाहर आँख वाला
सामने आता है
कन्नी काट कर
किनारे किनारे
निकल जाता है
आँख वाली से
आँख मिलाता है
डूबता उतराता है
खो जाता है
चेहरा नये नये
भाव दिखाता है
रोज कुछ लोग
घर पर आँख
को झेलते हैं
बाहर आ कर
खुशी खुशी आँख आँख
फिर भी खेलते हैं
आँख वाली की आँख
गुलाबी हो जाती है
आँख वाले को आँखें
मिल जाती हैं
सिलसिला सब ये
नहीं चला पाते हैं
कुछ लोग इस कला
में माहिर हो जाते हैं
करना वैसे तो बहुत
कुछ चाहते हैं
पर घर की आँखों
से डर जाते हैं
इसलिये बस
आँख से आँख
मिलाते हैं
पलकें झुकाते हैं
पलकें उठाते हैं
रोज आते हैं
रोज चले जाते हैं
आँख आँख में
अंतर साफ साफ
दिखाते हैं ।

मंगलवार, 5 जून 2012

पर्यावरण दिवस

कटे पेड़ों के ठूँठ/
भूल जा मत ढूँढ
अपने आप
जलती घास/
जंगल में आग
धुंआ धुआ
आसमान/
नदी टी बी
जैसी जान
शहर शहर
कूडे़ के ढेर/
गाँधी के
बंदर हो
गये सब
मिट्टी के शेर
आज मौका
है आजा/
भाषण कुछ
भी पका जा
स्मृति चिन्ह
से शुरु/
मानदेय है
तगड़ा गुरू
विज्ञान ही नहीं
जरूरी आवरण/
इतिहास
समाजशास्त्र
राजनीति
विज्ञान कला
पहले करेंगे वरण
टेंट हाउस
कुर्सी मेज दरी/
साउंड सर्विस
कांच के गिलास
टी कोस्टर का कवर
बिसलेरी
पेड़ जंगल पहाड़
गूगल कट पेस्ट
पावर पोइंट प्रेजेन्टेशन /
सूट बूट टाई
नामी गिरामी हस्ती
बुके चेस्ट बैज नो टेंशन
खाना वाना लजीज /
स्वीट डिश दिल अजीज
आना जाना फ्री /
ऎ सी रेल टिकट
फोटोकापी भी
काकटेल पार्टी हसीन /
शाम रंगीन बेहतरीन
फोटो सेशन पत्रकार/
अखबार ही अखबार
बिल विल
दस्तखत कागज /
हिसाब किताब
घाटे का बजट
पर्यावरण दिवस /
बधाई जी बधाई
मना ही लिया
जी अब बस।

सोमवार, 4 जून 2012

गधा बना दो भगवान

आज गधों पर
कुछ लिखने का
मन कर रहा है
पर बहन जी का
बहुत डर लग रहा है
उल्लू बिल्ली मुर्गी
पर लिखते हो कहकर
नाराजगी एक दिन
वो जता रही थी
इसीलिये हमारी
हिम्मत यहाँ आकर
बोल ही जा रही थी
गधे वैसे तो बहुत
काम के आदमी
हमेशा से बताये
जाते रहे हैं
इसीलिये धोबी
के खानदान के
साथ अभी तक
चलते आ रहे हैँ
आदमी जब एक
गधा हो जाता है
तो लगता है जैसे
कोई गाली खाता है
क्या करें गधे टाईप
के आदमियों के बीच
में जब कोई फंस
ही कहीं जाता है
तो गधा हूँ
इसीलिये तो यहाँ हूँ
कहता है और
मुस्कुराता है
गधों के किये
गये कामों पर
टल्लियाँ लगाता
चला जाता है
ना कुछ कर पाता है
ना ही कुछ कह पाता है
बस गधों की किस्मत
से खार खाता है
अगले जनम मोहे
गधा ही कीजो
कि बिनती हाथ जोड़
प्रभू के द्वार पर लगाता है।

रविवार, 3 जून 2012

राष्ट्रीय कुप्रबंधन संस्थान

देश जहाँ निरक्षर
को साक्षर बनाता है
वहीं पर साक्षर
सबसे ज्यादा देश
को चूना लगाता है
प्रबंधन को बहुत
आसानी से कुप्रबंधन
बनाया जाता है
हर कहीं ये
दूर दूर से भी
साफ नजर
आ जाता है
व्यापार में जब
कुछ भी आजमाया
जाता है
तो किसी के
दिमाग में ये क्यों
नहीं आता है
कुप्रबंधन संस्थानों
को रोजगार का
जरिया क्यों
नहीं अभी भी
कोई बनाता है
चहेते कुप्रबंधकों
को भी कहीं
नौकरी में घुसा
ले जाता है
प्रबंधन गुरुओं की
खेप में उसे नहीं
मिलाता है
इस तरह की
सोच से देश
को क्यों नहीं
बचा ले जाता है।


शनिवार, 2 जून 2012

गोबर

गोबर के जब
उपले बनाता है
बहुत सी टेढ़ी
वस्तुओं को
गलाने की ताकत
उसे जलाने से
पा जाता है
गोबर की खाद
बनाता है
खेत खलिहान
को आबाद
कर ले जाता है
गोबर की चिनाई
करवाये चाहे
गोबर की लिपाई
कीड़े मकोड़ों की
विदाई करवाता है
गोबर के पार्थिव
पूजन से शिव का
आशीर्वाद पा जाता है
शरीर को रोगमुक्त
करवाने का एक
वरदान पा जाता है
गोबर के एक गणेश
की तीव्र इच्छा होना
हर पत्नी की विशलिस्ट
में जरूर पाया जाता है
गोबर का प्रयोग
पर्यावरण को नुकसान
भी नहीं पहुँचाता है
इतने मह्त्वपूर्ण गोबर
को जब मनुष्य अपने
दिमाग में घुसाता है
तो किसी भी वस्तु को
गोबर में बदलने की
महारत हासिल
कर ले जाता है।

शुक्रवार, 1 जून 2012

मुर्गी की दाल

समझदार मुर्गी
अपनी सूरत
और सेहत को
कभी नहीं
बढा़ती है
दुश्मनी होती है
जिस मुर्गी से
उसे खूब
खिलाती और
पिलाती है
वैसे तो हर बाडे़
में मुर्गियाँ ही
मुर्गियाँ हर तरफ
फड़फडा़ती हैं
लेकिन हर मुर्गी
की तरफ हर
किसी की नजर
कहाँ जाती है
ये वाकई
समझदारी
की बात सभी
के द्वारा
बताई जाती है
एक कानी मुर्गी
ही मुर्गियों के
द्वारा रानी
चुनवायी जाती है
बाड़े की सेहतमंद
खूबसूरत मुर्गी
सबकी नजर में
लाई जाती है
चाहने वालों
के हाथों कहीं
ना कहीं कटवा
दी जाती है
मर खप
जब जाती है
फिर पकवाई
भी जाती है
खाने वालों के
नखरे सहती है
और दाल
बताई जाती है
कानी मुर्गी
इसी बीच कहीं
जंगल में जाकर
नाच आती है
जंगल में मोर
नाचा की
एक खबर
अखबार
में आती है
कितने आसान
तरीके से
घर की मुर्गी
दाल बराबर
सबको समझा
जाती है।

LinkWithin

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...