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शुक्रवार, 2 जून 2017

चोर चोर चिल्लाना शगुन होता है फुसफुसाना ठीक नहीं माना जाता है

महीना
बदलने से
किसने
कह दिया

लिखना
बदल
जाता है

एक
महीने में
पढ़ लिख
कर कहाँ
कुछ नया
सीखा
जाता है

खुशफहमी
हर बार ही
बदलती है
गलतफहमी में

जब भी
एक पुराना
जाता है
और
कोई नया
आता है

कोई तो
बात होती
ही होगी
फर्जियों में

फर्जियों
का पुराना
खाता बिना
आवेदन किये
अपने आप
नया हो
जाता है

कान से
होकर
कान तक
फिसलती
चलती है
फर्जीपने के
हिसाब की
किताबें

फर्जियों
की फर्जी
खबर पर
सीधे सीधे
कुछ
कह देना
बदतमीजी
माना जाता है

बाक्स
आफिस
पर
उछालनी
होती है
फिलम
अगर

बहुत
पुराना
नुस्खा है
और
आज भी
अचूक
माना
जाता है

हीरो के
हाथ में
साफ साफ
मेरा बाप
चोर है
काले रंग में
सजा के
लिखा
जाता है

‘उलूक’
चिड़ियों की
खबरों में भी
कभी ध्यान
लगाता थोड़ा
सा भी  अगर

अब तक
समझ चुका
होता शायद

तोते को
कितना भी
सिखा लो
चोर चोर
चिल्लाना

चोरों के
मोहल्ले में
तो इसी
बात को
कुर्सी में
बैठने का
शगुन माना
जाता है ।

चित्र साभार: Clipart Panda

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