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शनिवार, 8 जुलाई 2017

बदचलन होती हैं कुछ कलमें चलन के खिलाफ होती हैं

खासों में
आम
सहमति
से होती हैं
कुछ
खास बातें

कहीं किसी
किताब में
नहीं होती हैं

चलन में
होती हैं
कुछ पुरानी
चवन्नियाँ
और
अठन्नियाँ

अपनी
खरीददारियाँ
अपनी दुकानें
अपनी ही
बाजार होती है

होती हैं
लिखी बातें
पुरानी सभी
हर बार

फिर से
लिख कर
सबमें
बाँटनी
होती हैं

पढ़ने के
लिये नहीं
होती हैं
कुछ
किताबें

छपने
छपाने
के खर्चे
ठिकाने
लगाने की
रसीद
काटनी
होती हैं

लिखी
होती हैं
किसी के
पन्ने में
हमेशा कुछ
फजूल बातें

कैसे सारी
हमेशा ही
घर की
हवा के
खिलाफ
होती हैं

कलमें भी
बदचलन
होती हैं
‘उलूक’

नियत भी
किसी की
खराब होती है ।

चित्र साभार: 123RF.com

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