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गुरुवार, 29 मार्च 2012

अंत:विषय दृष्टिकोण

विद्यालय से
लौट कर
घर आ रहा हँ
आज का एक
वाक्या
सुना रहा हूँ

सुबह जब
विद्यालय के
गेट पर पहुँचा
हमेशा मिलने
वाला काला कुत्ता
रोज की तरह
मुझपर
नहीं भौंका

आज वो
अपना मुँह
गोल गोल
घुमा रहा था

मैंने उसकी
तरफ देख
कर पूछा

ये क्या नया
कर रहे हैं जनाब

बोला मास्साब
क्यों करते हो
मुझसे मजाक

मैं सूँड
हिला कर
मक्खियाँ
भगा रहा हूँ
हाथी बनकर
उसका काम
भी निभा रहा हूँ

असमंजस में
मुझे देख कर
वो मुस्कुराया
थोड़ा सा
किनारे की
ओर खिसक
कर आया

फिर मेरे
कान में
धीरे से
फुसफुसाया

तुम कैमिस्ट्री
क्यों नहीं
पढ़ा रह हो
रोज फालतू
की एक
कविता यहाँ
चिपका रहे हो

जमाना
बहुत आगे
आजकल
जा रहा है
फिर तुम
मेरे को
पीछे की
ओर क्यों
खिसका रहे हो

अंत:विषय
दृष्टिकोण
क्या तुमको
नहीं आता है

इसमें वो
बिल्कुल भी
नहीं किया
जाता है
तुमको अच्छी
तरह से
जो आता है
और दूसरा
उसको
अच्छी तरह
से समझ
जाता है

तुम डाक्टर
हो तो स्कूल
चले जाओ
मास्टर हो
तो तबला
हारमोनियम
कुछ बजाओ

समय
के साथ
नया काम
करते चले
जाना चाहिये
जो किसी की
समझ में
भी नहीं
आना चाहिये

पुराने
कामों का
बक्सा
बना कर
कुवें में
फेंक कर
आना चाहिये

कल से
किसी मुर्गे
को यहाँ
काम पर
लगवाइये

बाँग बिल्ली
दे देगी
उससे यहाँ
भौंकवाइये।

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