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सोमवार, 9 दिसंबर 2013

दीमक है इतनी जल्दी हरियाली देख कर कैसे हार जायेगा

सड़े हुऐ पेड‌
की फुनगी
पर कुछ हरे
पत्ते दिखाई
दे रहे हैं का
समाचार लेकर
अखबारी दीमक
दीमकों की
रानी के पास
डरते डरते
जा पहुँचा
उसके मुँह पर
उड़ रही हवा
को देखकर रानी ने
अपने मंत्री दीमक को
इशारा करके पूछा
क्या बात है
क्या हो गया
इस को देख कर
तो लग रहा है
जैसे कहीं कोई बहुत
बड़ा तूफान है आ बैठा
मंत्री मुस्कुराया
थोड़ा उठा रानी जी के
नजदीक पहुँच कर
कान में फुसफुसाया
महारानी जी कुछ भी
कहीं नहीं हुआ है
इसको थोड़ी देर के लिये
कुछ मतिभ्रम सा
कुछ हो गया है
दो चार हरे पत्ते
पेड़ पर देख कर
क्या आ गया है
सारा जंगल हरा
हो जाने वाला है
सोच कर ही फालतू
में चकरा गया है
आप क्यों बेकार में
परेशान होने जा रही हैं
कुछ मजबूत दीमकों को
आज से नई तरह से
काम शुरु करने का
न्योता भेजा गया है
हमारे दीमक इतना
चाट चुके हैं पेड़ की
लकड़ी को वैसे भी
चाटने के लिये कहीं
कुछ बचा क्या है
पुराने दीमकों को छुट्टी
पर इसलिये कल से ही
भेज दिया गया है
नये दीमक नई उर्जा से
चाटेंगे पेड़ के
कण कण को
यही संदेश
हर कोने कोने पर
पहुँचा दिया गया है
पीले दीमक पीछे को
चले जा रहे हैं
लाल दीमक झंडा
अपना अब लहरा रहे हैं
इस बेवकूफ को क्या पता
कहाँ कहाँ इस युग में
क्या से क्या हो गया है
पेड़ को भी पता नहीं
आज ही आज में
ना जाने क्या हो गया है
बुझते हुऐ दिये की जैसे
एक लौ हो गया है
चार हरे पत्तों से
क्या कुछ हो जायेगा
बेवकूफ जानता ही नहीं
नया दीमक लकड़ी के
साथ साथ हरे पत्ते
सलाद समझ कर
स्वाद से खा जायेगा ।

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