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मंगलवार, 7 अक्तूबर 2014

किसी दिन सोचा कुछ और लिखा कुछ और ही दिया जाता है

सब कुछ तो नहीं
पर कुछ तो पता
चल जाता है
ऐसा जरूरी तो नहीं
फिर भी कभी
महसूस होता है
सामने से लिखा हुआ
लिखा हुआ ही नहीं
बहुत कुछ और
भी होता है
अजीब सी बात
नहीं लगती है
लिखने वाला
भी अजीब
हो सकता है
पढ़ने वाला भी
अजीब हो सकता है
जैसे एक ही बात
जब बार बार
पढ़ी जाती है
याद हो जाती है
एक दो दिन के लिये
ही नहीं पूरी जिंदगी
के लिये कहीं
सोच के किसी
कोने में जैसे
अपनी एक पक्की
झोपड़ी ही बना
ले जाती है
अब आप कहेंगे
झोपड़ी क्यों
मकान क्यों नहीं
महल क्यों नहीं
कोई बात नहीं
आप अपनी सोच
से ही सोच लीजिये
एक महल ही
बना लीजिये
ये झोपड़ी और महल
एक ही चीज
को देख कर
अलग अलग
कर देना
अलग अलग
पढ़ने वाला
ही कर पाता है
सामने लिखे हुऐ
को पढ़ते पढ़ते
किसी को आईना
नजर आ जाता है
उसका लिखा
इसके पढ़े से
मेल खा जाता है
ये भी अजीब बात है
सच में
इसी तरह के आईने
अलग अलग लिखे
अलग अलग पन्नों में
अलग अलग चेहरे
दिखाने लग जाते है
कहीं पर लिखे हुऐ से
किसी की चाल ढाल
दिखने लग जाती है
कहीं किसी के उठने
बैठने का सलीका
नजर आ जाता है
किसी का लिखा हुआ
विशाल हिमालय
सामने ले आता है
कोई नीला आसमान
दिखाते दिखाते
उसी में पता नहीं कैसे
विलीन हो जाता है
पता कहाँ चल पाता है
कोई पढ़ने के बाद की
बात सही सही कहाँ
बता पाता है
आज तक किसी ने
भी नहीं कहा
उसे पढ़ते पढ़ते
सामने से अंधेरे में
एक उल्लू
फड़फड़ाता हुआ
नजर आता है
किसने लिखा है
सामने से लिखा 
हुआ कुछ कभी 
पता ही नहीं 
लग पाता है 
ऐसे लिखे हुऐ 
को पढ़ कर 
शेर या भेड़िया 
सोच लेने में
किसी का
क्या जाता है ।
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शुक्रवार, 22 नवंबर 2013

घबरा सा जाता है गंदगी लिख नहीं पाता है

कितनी अजीब  
सी बात है
अब है तो है
अजीब ही सही
सब की बाते
एक सी भी तो
नहीं हो सकती
हमेशा ही
कोई खुद
अजीब होता है
उसकी बातों में
लेकिन बहुत
सलीका होता है
कोई बहुत
सलीका दिखाता है
बोलना शुरु होता है
तो अजीब पना
साफ साफ चलता
हुआ सा दिख जाता है
किसी के साथ
कई हादसे ऐसे
होते ही रहते हैं
वो नहीं भी
सोचता अजीब
पर बहुत से लोग
उसे कुछ अजीब
सोचने पर
मजबूर कर देते हैं
थोड़ा अजीब ही
सही पर कुछ अजीब
सा सभी के
पास होता ही है
गंदगी भी होती है
सब कुछ साफ
जो क्या होता है
पर साफ सुथरे
कागज पर जब
कोई कुछ टीपने
के लिये बैठता है तो
गंदगी चेपने की
हिम्मत ही
खो देता है
हर तरफ
सब लोगों के
सफाई लिखे हुए
सजे संवरे कागज
जब नजर आते है
लिखने वाले
के दस्ताने
शरमा शरमी
निकल आते है
अपने आस पास
और अपने अंदर
की गंदगी से
बचे खुचे सफाई
के कुछ टुकड़े
ढूंढ लाते है
सब सब की
तरह लिखा
जैसा हो जाता है
रोज सफाई
लिखने वाले को
तो बहुत सफाई से
लिखना आता है
पर ‘उलूक’ के लिखे
के किनारे में कहीं
एक गंदगी का धब्बा
उस पर खुल कर
ठहाके लगाना
शुरू हो जाता है ।

मंगलवार, 29 अक्तूबर 2013

बात ही अजीब हो तो कोई कैसे समझ पायेगा

कई बार बहुत सारे
विषय हो जाते हैं
लिखने लिखने तक
सारे के सारे ही
भूले जाते हैं
सोच ही रहा था
आज उनमें से
किस पर अच्छा सा
कुछ लिखा जायेगा
किसे मालूम था
कुत्ता आज ही
कहीं से मार खा
कर चला आयेगा
जानता था विज्ञान को
समझना बहुत मुश्किल
नहीं कभी हो पायेगा
पता नहीं था
आस पास का
मनोविज्ञान ही
हमेशा कुछ
यूं घुमायेगा
और एक अजीब सा
इत्तेफाक ये हो जायेगा
डाकिया जितनी बार
अच्छी खबर का
एक पोस्टकार्ड ला कर
घर पर दे जायेगा
शुभकामनाओं की उम्मीद
किसी से ऐसे में
कोई कैसे कर पायेगा
जब हर अच्छी
खबर के बाद
किसी के घर का
कुत्ता हमेशा ही
मार कहीं से खा
कर चला आयेगा ।

शुक्रवार, 18 अक्तूबर 2013

अपेक्षाऐं कैसी भी किसी से रखने में क्या जाता है !

दो टांगों पर चलता
चला जाऊं अपनी ही
जिंदगी भर ऐसा
सोचना तो समझ में
थोड़ा थोड़ा आता है
सर के बल चल कर
किसी के पास पहुंचने
की किसी की अपेक्षा
को कैसे पूरा
किया जाता है
पता कहां
चल पाती हैं
किसी की अपेक्षाऐं
जब अपेक्षाऐं रखना
अपेक्षाऐं बताना कभी
नहीं हो पाता है
अपने से जो होना
संभव कभी नहीं
हो पाता है वही
सब कुछ किसी से
करवाने की अपेक्षा
रखते हुऐ आदमी
दुनियां से विदा
भी हो जाता है
पर अपेक्षा भी
कितनी कितनी
अजीब से अजीब
कर सकता है
सामने वाला
ऐसा किसी
किताब में
लिखा हुआ
भी नहीं
बताया जाता है
इधर आदमी
तैयार कर रहा
होता है अपने
आप को किसी
का गधा बनाने की
उधर अगला
सोच रहा होता है
आदमी के शरीर में
बाल उगा कर उसे
भालू बनाने की
क्या करे कोई बेचारा
किसी को किसी की
अपेक्षाओं का सपना
जब नहीं आता है
अपेक्षाऐं किसी से रखने
का मोह कभी कोई
त्याग ही नहीं पाता है
अपेक्षाऐं होती
हैं अपेक्षाऐं
रह जाती हैं
हमेशा अपेक्षाऐं
रखने वाला
बस खीजता है
झल्लाता है
खुद पर अपने
ज्यादा से ज्यादा
क्या कर सकता है
कर पाता है
दो घूंट के बाद
दीवारों पर अपने
ही घर की कुछ
गालियां लिख
ले जाता है
सुबह होते
होते उसे भी
मगर भूल जाता है
अपेक्षाओं के पेड़ को
अपने फिर से सींचना
अपेक्षाओं से
शुरु हो जाता है ।

बुधवार, 11 सितंबर 2013

उसका जरूर पढ़ना पर लिखना खुद अपना

ये नया आईडिया
तेरे दिमाग में किसने
आज घुसा दिया
वैसे भी तू कुछ बुरा
तो नहीं दिखता है
कुछ अजीब सा क्यों
आज तुझको बना दिया
किसी ने कहा तुझसे
मोर पंख अगर कहीं
पर एक चिपकायेगा
तो कौऎ से मोर तू
जरूर हो जायेगा
कोई कुछ भी
लिख रहा हो
उससे क्या हो जायेगा
तू बहुत अच्छी
बकबास कर लेता है
उसकी तरह लिखने
को अगर जायेगा
कैसे सोच लिया तूने
कवि सम्मेलन के
निमंत्रण पाना
शुरु हो जायेगा
बच अगर अभी
भी बच सकता है
लिख वही जो तू
खुद लिख सकता है
छंद अलंकार व्याकरण
को बीच में लायेगा
जो है वो भी नहीं रहेगा
जो बनेगा उसको
कोई सरकस वाला
जरूर उठा के ले जायेगा
ये लेखन की दुनिया
बहुत बडी़ भूलभुलईया है
इसमें ज्यादा दिमाग
अगर लगायेगा
कहाँ घुस के कहाँ
निकल आया
कोई पता भी
नहीं कर पायेगा
अभी जाना जाता है
पहचाना जाता है
कुछ आदमी जैसा है
आदमियों के बीच में
ये भी माना जाता है
जैसा है वैसा ही रहेगा
कुछ पायेगा नहीं भी
तो भी ज्यादा
कुछ नहीं गवांऎगा
बंदर गुलाटियाँ
मारता हुआ ही
अच्छा लगता है
खुद सोच कैसा
दिखेगा अगर
कहीं वो दो टांगो पर
चलता हुआ देखा जायेगा
तू क्या समझता है
जो जैसा लिखता है
वो वैसा ही दिखता है
बहुत से हैं मेरी तरह
के बेईमान यहाँ पर
जिनका ब्लाग
ईमानदार ब्लाग के
नाम से चलता है
देखा देखी और
भीड़ तंत्र के
जादू से निकल
कोशिश कर और
अपनी टांगों
में ही चल
ऎसा ना हो कहीं
सब कुछ तेरे हाथ से
जाये कहीं निकल
अपनी टाँग भी करे
चलने से इनकार
और बैसाखी जाये
हाथों से दूर फिसल
बहुत कुछ है
जो तेरे पास है
और तेरा अपना है
सामने वाले के पास
दिख रहा ताजमहल
खुद उसी के लिये
एक सपना है
अपनी सुंदर झोपडी़
को सबको दिखा
खूब जम के इतरा
सब के लिखे
को पढ़ जरूर
किसी ने नहीं रोका है
अपनी बक बक को
बक बक ही रहने दे
कविता को बस एक
पाजामा पहनाने से
ही तो तुझे टोका है ।

रविवार, 22 जुलाई 2012

लोटा प्रतियोगिता

नीचे लिखे
लम्बे को
सब से छोटा
बनायेगा जो
प्रतियोगिता
में भाग लेगा
सब से बड़ा
लोटा भी
इनाम में ले
जायेगा वो ।


अजीब सा
महसूस होता है
अजीब अजीब
तरह के लोग
अजीब तरह से
पेश आते हैं
अजीब अजीब
सी बातें
पता नहीं
कैसे कैसे
अजीब अजीब
तरीकों से
सामने आ आ
कर गुनगुनाते हैं
अब एक
अजीब सी
शख्सियत
सामने आये
अजीब तरह
की हरकतें करे
और आशा करे
सामने वाला
मुस्कुराये
अजीब होने पर भी
किसी को कुछ भी
अजीब सा
ना लग पाये
ऎसे बहुत से
अजीब लोग
अजीब तरह
से रोज ही
तो टकराते हैं
अजीब लोगों को
कुछ हो या ना हों
हम भी तो सारा
अजीब पी जाते है
वैसे अजीब हो जाना
या अजीब सा कुछ
कर जाना ही
तो ज्यादा से
ज्यादा शोहरत
दिला जाता है
देख लीजिये
दुनिया की
सबसे अजीब
चीजों को ही
सातवें आश्चर्य की
सूची में शामिल
किया जाता है
इसलिये समय रहते
कोशिश करने में
क्या जाता है
अगर कोई अजीब
ना होते हुऎ भी
अजीब हो
जाना चाहता है
इसलिये खोजिये
अपने में भी
कुछ भी
अजीब अगर
आपको नजर
आता है
क्या पता उस
अजीब का होना
आपको भी
दुनिया का
सबसे अजीब
चीज बना
जाता है।

बुधवार, 16 मई 2012

सफेद बाल

मेरे सफेद बाल
हो गये हैं अब
खुद मेरे लिये
आज एक बवाल
हर कोई इनसे
दिखता है परेशान
जैसे उड़ रहे हों
मेरे सर के चारों ओर
कुछ अजीब से विमान
एक मित्र जो रोज
बाल काले करता है
उसकी बीबी का डायलाग
हमेशा ऎसा ही रहता है
अरे आपके कुछ बाल
अभी काले नजर आते हैं
आप अपने बाल डाई
क्यों नहीं कराते हैं
हर दूसरा भी राय
देने की कोशिश
करता है एक नेक
भाईसाहब आपके
बाल इतनी जल्दी
कैसे हो गये सफेद
एक सटीक दवाई
हम आपको बताते हैं
एक ही रात में
उसको खा के सारे
बाल काले हो जाते हैं
कल जब मैं सड़क पर
बेखबर जा रहा था
देखा एक आदमी
सड़क किनारे रेहड़ी
अपनी सजा रहा था
कुछ जड़ी बूटियां
बेचने वाला जैसा
नजर आ रहा था
मुझे देखते ही दौड़
कर मेरी ओर आया
हाथ पकड़ मेरा
मुझे अपनी रेहड़ी
की तरफ उसने बुलाया
अंकल अंकल ये वाली
बूटी आप मुझ से ले जाओ
एक हफ्ते में अपने
सारे बाल काले करवाओ
सौ रुपये में इतना
आप और कहाँ पाओ
असर ना करे तो
दो सौ मुझसे ले जाओ
उसको इतना उतावला देख
कर मैं धीरे से मुस्कुराया
उसकी तरफ जाकर
उसके कान में फुसफुसाया
पचास साल लगे हैं
इन बालों को
सफेद करवाने में
तुझे क्या मजा
आ रहा है
इनको एक हफ्ते में
काले करवाने में
मेरी की गई मेहनत
पर पानी फिरवाने में
कोई दिल काला
करने की दवा है
तो अभी दे जा
सौ की जगह
पाँच सौ तू ले जा
काले दिल वालों का
जमाना आ रहा है
उन सब को जेल से
बाहर निकाला जा रहा है
उनके खुद किये गये
घोटालों पर ब्याज भी
सरकार की तरफ से
दिया जा रहा है।

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