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मंगलवार, 7 जुलाई 2015

गणित लगाकर लिखने से एक लिखा एक ही माना बतायेगा

लिखने का गणित
सीख कर लिख
उसके बाद कुछ
भी जोड़ घटाना
गुणा भाग लिख
देख दो और दो
चार ही हो पायेगा
गणितज्ञ लेखक
जो भी लिखेगा
लिखा हुआ
अपने आप ही
सीधे पाठक तक
सवालों के जवाब
की तरह लिखे
लिखाये को
पहुँचायेगा
चार का तीन
या पाँच बनाना
भी कोई चाहेगा
तब भी नहीं
बना पायेगा
अर्थ लिखने और
पढ़ने के बीच का
समझने समझाने
में नहीं गड़बड़ायेगा
साफ साफ लिखा हुआ
साफ साफ पढ़ा जायेगा
खाना भी चाहेगा
कोई समझा कर
बीच में कुछ
अपने हिसाब का
बिना गणित सीखे
नहीं कर पायेगा
लिखे लिखाये में
वैसे भी कोई
खाने पीने का
जुगाड़ नही
समझ में आ गई
बात पर कोई भी
कमीशन नहीं
बना पायेगा
मुश्किल होगा
करना कोई घोटाला
एक बात का
एक ही मतलब
निकल कर आयेगा
दुखी क्यों होते हो
मित्र लिखो मन से
कितने ही गीत
माना वही निकलेगा
जो लिखने वाले से
दिल से लिखा जायेगा
‘उलूक’ नहीं पढ़ सका
गणित ये अलग बात है
कोई हिसाब किताब
खुश रहो बेफिकर रहो
अपना नहीं लगायेगा ।

चित्र साभार: www.clipartpanda.com

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