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बुधवार, 19 अप्रैल 2017

विश्वविध्यालय बोले तो ? तेरे को क्या पड़ी है रे ‘उलूक’

जे एन यू
बनाने
की बात
करते
करते
स्टेशन
आ गया

वो उतरा
और
सवार
हो गया
उल्टी दिशा
में जाती
हुई ट्रैन में

शायद वो
दिशा
आक्स्फोर्ड
की
होती होगी

क्योंकि
अखबार वाला
बता रहा था
कुछ ऐसा ही
बनने वाला है

और
उसे बताया
गया है

जे एन यू
बनाने की
बात कहना
बहुत बड़ी
भूल थी
उनकी

ये अहसास
चुनाव के
पारिणामों के
आते ही
हो गया 
है

तीन साल
के बाद
अखबार के
पन्ने पर
एक नयी
तस्वीर
होती है

एक नये
आदमी की

और
एक नये
सपने की
बात

जिसमें
ताजमहल
जैसा कुछ
होता है

पिछले
तीन साल
पहले
अखबार ने
बताया था

बहुत उँचाइयों
पर ले जाने
वाला कोई
आया है

वही उँचाइयाँ
अब कैम्ब्रिज
बन गई हैं

किसी और
जगह के
किसी गली
के एक
बने बनाये
मकान की

लेकिन आदमी
आक्स्फोर्ड को
आधा बना कर
कैम्ब्रिज पूरा
करने पर
जुट गया है

सरकारें
बदलती हैं

झंडा बदल
कर कुछ भी
बदल सकता
है कोई भी

‘उलूक’
कभी तो
थोड़ा सा
कुछ ऐसी
बात
किया कर

जो किसी के
समझ में आये

सब कुछ
होता है
पाँच साल
में वहाँ

और
तीन साल
में यहाँ

तुझे आदत
है काँव काँव
करने की
करता चल

अभी एक
नया आया है
तीन साल
के लिये

उसे भी
कुछ
बनाना है
वो भी तो
कुछ बनायेगा

या
कौवे की
आवाज वाले
किसी उल्लू
की तरफ
देखता
चला जायेगा?

चित्र साभार: Southern Running Guide

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