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सोमवार, 31 अक्तूबर 2016

डेमोक्रेसी को समझ इंदिरा सोच भी मत पटेल के होते हुए

मत करना
श्राद्ध उसका
जिसकी सोच
में भी दिखे
तुमको वो
उनका

इनका ये
दिख रहा है
तो तर्पण
कर लेना
दे देना जल

देशभक्ति
मन में होने
से कुछ
नहीं होता है
दिखानी
पड़ती है
उसकी
फोटो
लगाकर
सामने से
पूजा अर्चना
का थाल
सजाये हुऐ
अपने को
साथ में
दिखाकर

हटाना
जरूरी
होता है
हर एक के
दिमाग से
इतिहास
खुद को
स्थापित
करने के
लिये
येन केन
प्रकारेण

चोरों और
जेबकतरों
का इतिहास
कोई नहीं
लिखता है
इतिहास
पढ़ने पढ़ाने
वाले चोर
और
उठाईगीर हों
ये जरूरी नहीं
पर उनके
साथ चलते
हुऐ इतिहास
लिखने
में कोई
बुराई नहीं
होती है

इतिहासकार
जानते हैं

‘उलूक’
तुम
जो भी
पढ़ लिख
कर यहाँ
तक पहुँच
गये हो
उस पर
केरोसिन
डाल कर
आग
लगा दो
जरूरी है
अब किसी
भी सरकार
के आने के
बाद पुरानी
सरकार की
बात करना
सोचना
कहना
देशद्रोह
माना जायेगा ।

शुक्रवार, 26 जून 2015

जय हो जय हो जय हो

सब की जय हो
एक हजारवीं
पोस्ट है
जय जय हो
दोस्तों की
जय हो
दुश्मनों की
जय हो
मोदी की
जय हो
केजरीवाल की
जय हो
इंदिरा गाँधी
के साथ
गाँधी की
जय हो
दोस्तों की
जय हो
दुश्मनों की
जय हो
चोरों की
जय हो
पुलिस वालों की
जय हो
रिश्तों की
जय हो
कुत्तों की
जय हो
सब की
जय हो
सोचने वालों की
जय हो
गरीबों की
जय हो
अमीरों की
जय हो
जो हो रहा है
उसकी
जय हो
जो नहीं हो रहा है
उसकी भी
जय हो
राम की
जय हो
हनुमान की
जय हो
हिंदू की
जय हो
मुसलमान की
जय हो
ईमानदार की
जय हो
बेईमान की
जय हो
सबकी
जय हो
देखने में
जो भी दिखे
जो नहीं दिखे
कोई कुछ कहे
उसकी भी
जय हो
जय जय की
जय हो
झूठ की
जय हो
सबसे बड़ी
 जय हो
सच मुँह की खाये
उसकी भी
जय हो
होना सब उसके
हिसाब से है
जो मेरा
हिसाब नहीं है
‘उलूक’ की
जय हो
जय हो जय हो
आप आये
आपने पढ़ दिया
आपकी भी
जय  हो ।

चित्र साभर: www.clker.com

गुरुवार, 19 जुलाई 2012

किसी का भी जुर्म हो वो तेरा बहूरानी

स्कूल कालेज
सरकारी हो
या
गैर सरकारी
किसी की
संपत्ति थोड़े
ना हो जाता है
उस पर
अधिकार
होता है
तो
केवल उसका
जिसकी दीवार से
आसानी से कूड़ा
शिक्षाकेन्द्र के
अंदर तक
किसी तरह
फेंका जाता है
फायदे ही
फायदे
गिन लीजिये
अंगुलियों में
उस के लिये
जो ऎसी
जगह पर
मकान एक
बना ही
ले जाता है
घर तक
जाने के लिये
मेटल्ड रोड
स्कूल ही
दरवाजे तक
खुद ही
पहुँचा जाता है
कार रख
सकता है
अपनी और
किराये पर
दूसरे तीसरे
की भी
गैरेज बनाने
के खर्चे से
सीधे सीधे
बच जाता है
बेवकूफ
मैदान इसी के
तो काम
में आता है
फर्नीचर की
जरूरत में
चारपाईयों
की ही हो
सकती है
क्योंकि वो ही
एक फर्नीचर
होता है जो
कालेज में
कम ही
खरीदा
जाता है
कुर्सी मेज
कितनी हैं
कौन गिनने में
लगा रहता है
अगर कोई
अपने घर
को भी
दो चार एक
उठा ले
जाता है
गाय पालन
आसान
और गाय
का दूध
सस्ता मिल
जाता है
घास मैदान
में उगती है
और
गोबर कालेज
का जमादार
जब उठाता है
पानी बिजली
की जरूरत
रात को तो
होती नहीं वहां
इसलिये ये
दोनो रात के
लिये ही बस
ले जाता है
देखो कितना
मितव्ययी होकर
बर्बाद होने से
दोनो महंगी
चीजों को
बचाता है
अब इन
छोटी छोटी
चीजों को
कहने के लिये
किसके पास
फुर्सत है
स्कूल कालेज
किसी का
अपना ही
घर जैसा
थोड़े ना
हो जाता है
ज्यादा ही
परेशानी किसी
को हो
रही होती है
समस्याओं से
इस तरह
की कहीं तो
दिल्ली में
बैठी तो है
इंदिरा की बहू
उसके के
सर में जाकर
इसका भी
ठीकरा
फोड़ने में
क्या जाता है।

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