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बुधवार, 14 मई 2014

स्वर्ग जाना जरूरी नहीं होता है जब उसके बारे में बताने वाला आस पास ही पाया जाता है

काला चश्मा पहन कर
अपने आस पास की
गंदगी को रंगीन
कपड़े से ढक कर
उसके ऊपर से
खुश्बू छिड़क कर
उसके पास पूरी
जिंदगी बिता देना
बहुत से लोगों को
बहुत अच्छी तरह
से आता है
सबकी नहीं भी
होती होगी पर
बहुतों की होती है
एक ऐसी ही आदत
उसमें शामिल होते हैं
हम भी पूरी तरह
एक नहीं कई बार
कथा भागवत
करने में माहिर
ऐसे लोगों को
गीता से लेकर
कुरान का भी ज्ञान
रुपिये पैसे के ऊपर
लगने वाले ब्याज
की तरह आता है
कीचड़ के ऊपर से
धोती को समेरते हुऐ
बातों बातों में एक
बहुत लम्बे रास्ते से
ध्यान हटाने की
कला में पारँगत
ऐसे ही लोग
स्वर्ग के बारे में
बताते चले जाते हैं
बहुत से लोगों की
इच्छा भी होती है
जिंदा ही स्वर्ग
भ्रमण करने की
उनके लिये ही
सारा इंतजाम
किया जाता है
देखते सुनते
सब लोग हैं
जानते बूझते
सब लोग है
यही सब लोग
बहुत दूर के
बजते हुऐ
ढोलों और
नगाड़ों की तरफ
कान लगाये हुऐ
खड़े होकर
काट लेते हैं समय
इनमें से कोई
भी कभी स्वर्ग
ना जिंदा जाता है
ना ही मरने के
बाद ही इनको
वहाँ आने
दिया जाता है
नगाड़ों की आवाज
सुनाई भी
नहीं देती है
कुछ बज रहा है
कहीं दूर बहुत
बता दिया जाता है
क्या करे कोई
उनका जिनको अपने
आसपास के पेड़ पौंधों
को तक पागल
बनाना आता है
वो बताते
चले जाते हैं
स्वर्ग के इंद्र
के बारे में
कब वो स्वर्ग के
लायक नहीं
रह जाता है
ऐसे समय में
स्वर्ग को फिर से
स्वर्ग बनाने के लिये
नये इंद्र को लाने
ले जाने का ठेका
दूर कहीं बैठ कर
ही हो जाता है
कथाऐं चलती रहती है
कथा वाचक
बताता चला जाता है
फिर से एक बार
स्वर्ग बनने बनाने की
कथा शुरु हो चुकी है
सीमेंट और रेत के
शेयरों का बहुत
तेजी से ऊपर चढ़ना
शुरु हो जाने का अब
और क्या मतलब
निकाला जाता है ।

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