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बुधवार, 7 अक्तूबर 2015

ऊपर जाने के रास्ते समझो जरा नीचे से निकल कर जाने हो रहे हैं

डूबते हुऐ जहाज
में बहुत तेजी
से हो रहे हैं
एक नहीं एक
साथ हो रहे हैं
सारे हो रहे हैं
सारे के सारे
काम ही हो रहे हैं
काम का दिखना
जरूरी नहीं है
जरूरी है देखना
किनारे से
भोंपुओं के सहारे
सहारे से कई
इशारे हो रहे हैं
हो रहें हैं कि
नहीं हो रहे हैं
इतनी गजब की
बातें हो रही है
ये सब कुछ
जल्दी ही गिन कर
गिनीज बुक को
बताने हो रहे हैं
जहाज की सैल्फी
डूबती हुई जनता
खुद ही ले रही है
किस्मत बहुत ही
खराब है कुछ
लोगों की जहाँ
जहाज चलाने वाले
के लोगों के शोर
नगाड़ों के शोर
में खो रहे हैं
किसी के होश
उड़ रहे हैं जहाज
के डूबने की
सोच सोच कर
पैंट के पाँयचे
ना जाने किस डर
से गीले हो रहे हैं
बेवकूफ का बेवकूफ
रह गया ‘उलूक’
उसे तो हमेशा
दिखा है सोचने
समझने के
लाले हो रहे हैं
वादा किया भी है
ऊँचाईयों में ले
जाने का जहाज
वादा निभाने के
लिये ही तो काम
सारे हो रहे हैं
किसने कह दिया
ऊपर को ही जाना
जरूरी है ऊँचाईयाँ
छूने के लिये
मन लगा कर
इच्छा से डूब कर
भी ऊपर को ही
जाने के रास्ते
जब बहुत
आसान और
बहुत सारे हो रहे हैं ।

चित्र साभार: blogs.21rs.
es  

शनिवार, 18 जुलाई 2015

खिंचते नहीं भी हों इशारे खींचने के लिये खींचने जरूरी होते हैं

थोड़े कुछ
गिने चुने
रोज के वही
उसी तरह के
जैसे होते हैं
खाने पीने
के शौकीन
जैसे कहीं किसी
खाने पीने की
जगह ही होते हैं
यहाँ ना ढाबा
ना रोटियों पराठों
का ना दाल मखानी
ना मिली जुली सब्जी
कुछ कच्ची कुछ
पकी पकाई बातें
सोच की अपनी
अपनी किसी की
किताबें कापियाँ
कलम पेंसिल
दवात स्याही
काली हरी लाल
में से कुछ कुछ
थोड़े बहुत
मिलते जुलते
जरूर होते हैं
उम्र के हर पड़ाव
के रंग उनके
इंद्रधनुष में
सात ही नहीं
हमेशा किसी के
कम किसी के
ज्यादा भी होते हैं
दर्द सहते भी हैं
मीठे कभी कभी
नमकीन कभी तीखे
दवा लिखने वाले
सभी तो नहीं होते हैं
बहुत कुछ टपकता है
दिमाग से दिल से
छलकते भी हैं
सबके हिसाब से
सभी के शराब के
जाम हों जरूरी
नहीं होते हैं
कहना अलग
लिखना अलग
पढ़ना अलग
सब कुछ छोड़ कर
कुछ के लिये
किसी के कुछ
इशारे बहुत होते हैं
कुछ आदतन
खींचते हैं फिर
सींचते हैं बातों को
‘उलूक’ की तरह
बेबात के पता
होते हुऐ भी
बातों के पेड़ और
पौंधे नहीं होत हैं ।

चित्र साभार: all-free-download.com

सोमवार, 25 अगस्त 2014

गलतफहमी में ही सही लेकिन कभी कोई ऐसे ही कुछ समझ चुका है जैसा नजर आने लगता है थोड़ी देर के लिये ही सही

कुछ तो अच्छा
ही लगता होगा
एक गूँगे बहरे को
जब उसे कुछ देर
के लिये ही सही
महसूस होता होगा
जैसे उसके इशारों को
थोड़ा थोड़ा उसके
आस पास के
सामान्य हाथ पैर
आँख नाक कान
दिमाग वाले
समझ रहे हों के
जैसे भाव देना
शुरु करते होंगे
समझ में आता
ही होगा किसी
ना किसी को कि
एक छोटी सी
बात को बताने
के लिये उसके
पास शब्द कभी
भी नहीं होते होंगे
कहना सुनना बताना
सब कुछ करना
होता होगा उसे
हाथ की अँगुलियों
से ही या कुछ कुछ
मुँह बनाते हुऐ ही
बहुत खुशी झलकती
होगी उसके चेहरे पर
बहुत सारे लोग नहीं भी
बस केवल एक ही
समझ लेता होगा
उसकी बात को
उसके भावों को
या दर्द और खुशी
के बीच की उसकी
कुछ यात्राओं को
सोच भी कभी कभी
एक ऐसा बहुत छोटा
सा बच्चा हो जाती है
जो एक टेढ़ी मेढ़ी
लकड़ी को एक
खिलौना समझ
कर ताली बजाना
शुरु कर देता हो
कुछ भी कैसे
भी कहा जाये
सीधे सीधे ना सही
कुछ इशारों
में ही सही
जरूरी नहीं है
अपनी बात को
कहने के लिये
एक कवि या लेखक
हो जाना हमेशा ही
लेकिन बिना पूँछ
के बंदर के नाच पर
भी कभी किसी दिन
देखने वाले जरूर
ध्यान देते हैं अगर
वो रोज नाचता है
‘उलूक’ किसी दिन
तुझे इस तरह का
लगने लगता है
कुछ कुछ अगर
खुश हो लिया कर
तू भी थोड़ी देर
के लिये ही सही ।

मंगलवार, 11 सितंबर 2012

देशद्रोह

थोड़ा कुछ लिखना
थोड़ा कुछ बनाना
हो जाता है अब
अपने लिये ही
आफत को बुलाना
देखने में तो बहुत
कुछ होता हुआ
हर
किसी को नजर आता है
उस होते हुऎ पर
बहुत ऊल जलूल
विचार भी आता है
कोशिश करके बहुत
अपने को रोका जाता है
सब कुछ ना कह कर
थोड़ा सा इशारे के लिये
ही तो कहा जाता है
यही थोड़ा सा कहना
और बनाना अब
देशद्रोह हो जाता है
करने वाला ऊपर से
झंडा एक फहराता है
डंडे के जोर पर
जो मन में आये
कर ले जाता है
करने वाले से
कुछ बोल पाने की
हिम्मत कोई नहीं
कर पाता है
क्योंकी ऎसा करना
सम्मान से करना
कहा जाता है
लिखने बनाने वाले पर
हर कोई बोलना
शुरू हो जाता है
सारा कानून जिंदा
उसी के लिये हो जाता है
अंदर कर दिये जाने को
सही ठहराने के लिये
अपनी विद्वता प्रदर्शित
करने का यह मौका
कोई नहीं गंवाता है
अंधेर नगरी चौपट राजा
की कहावत का मतलब
अब जा कर अच्छी तरह
समझ में आ जाता है ।

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