http://blogsiteslist.com
उजाला लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
उजाला लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

रविवार, 19 अक्तूबर 2014

अंधेरा ही उजाले का फायदा अब उठाता है

अंधेरा बहुत
खुश है
पहचानता है
रोशनी के
त्यौहार
की कदमों
की आहट को
समय के साथ
बदल लेनी
चाहिये सोच
ऐसा कहा
जाता है
और सोचने
वाला
सोचता ही
रह जाता है
अपनी सोच को
समय की सोच से
आगे पीछे करने
के फेर में
सब कुछ वहीं
रह जाता है
जहाँ होता है
इस सब के बीच
अंधेरा बदल
लेता है खुद
को भी और
बदलता चला
जाता है
सोच को भी अपनी
अब अंधेरा
डरता नहीं है
उजाले से
भागता भी
नहीं है
अंधेरे ने
सीख लिया है
जीना और
कर लेना
समझौता
हालात से
अंधेरा अब
खुद दीपावली
मनाता है
दिये जलाता है
रोशनी होती है
चारों तरफ
अंधेरा छुपा
लेता है खुद को
और मदद करती है
रोशनी भी उसको
बचाने के लिये
उजाला नहीं
सीख पाया
टिकना अभी भी
आता है और
चला जाता है
अंधेरा मजबूती से
अपनी जगह को
दिन पर दिन
मजबूत कर
ले जाता है
बदल चुका है
अपनी सोच को
समय के साथ
और आज अंधेरा
सबसे पहले
दिया जलाता है ।

चित्र साभार: http://srilankabrief.blogspot.in

सोमवार, 25 नवंबर 2013

मत बताना नहीं मानेंगे अगर कहेगा ये सब तू ही कह रहा था

पिछले दो दिन
से यहाँ दिखाई
नही दे रहा था
पता नहीं कहाँ
जा कर किस को
गोली दे रहा था
खण्डहर में उजाला
नहीं हो रहा था
दिये में बाती
दिख रही थी
तेल पता नहीं
कौन आ कर
पी रहा था
आसमान नापने
का ठेका कहीं
हो रहा था
खबर सच है
या झूठ मूठ  
पता करने
के लिये

उछल उछल
कर 
कुँऐ की
मुंडेर 
छू रहा था
बाहर के उजाले
का क्या कहने
हर काला भी
चमकता हुआ
सफेद हो रहा था
किसी के आँखों में
सो रहे थे सपने
कोई सपने सस्ते 
में बेच कर भी
अमीर हो रहा था
सोच क्यों नहीं
लेता पहले से 
कुछ ‘उलूक
अपने कोटर से
बाहर निकलने
से पहले कभी
अपने और अपनो
के अंधेरों में
तैरने के आदी
मंजूर नहीं करेंगे
सुबह होती दिख
रही थी कहीं
बहुत नजदीक से
और वाकई में तू
देख रहा था और
तुझे सब कुछ
साफ और
बहुत साफ
दिन के
उजाले सा
दिखाई भी
दे रहा था ।

LinkWithin

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...