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मंगलवार, 6 अक्तूबर 2015

ना इसका हूँ ना उसका हूँ क्या करूं इधर भी हूँ उधर भी रहना ही रहना है

मत नाप लिखे
हुऐ वाक्यों की
लम्बाई को
पैमाना हाथ
में लेकर अपने
कुछ भी तो कहीं
भी नहीं होना है
दो इंच बड़ा भी
हो जाये या
तीन इंच आगे
या पीछे से कहीं
कम भी अगर
कहीं किसी बात
को होना है
इधर का इधर
और उधर का उधर
बस बहस के लिये
कैमरे के सामने
बैठ कर दिखाने
सुनाने का रोना है
नहीं समझेगा
फिर भी पता है
तुझे तेरे अपने
फटे में खुद ही
हाथ डाल कर
सोचना अपने
ही खेलने के लिये
कोई खिलौना है
लिख कुछ बोल कुछ
दिखा कुछ बता कुछ
छपा कुछ दे कुछ
दिला कुछ पता
किसी को कुछ
भी नहीं होना है
काले कोयले का
धुआँ सफेद
राख सफेद
बचा कहीं उसके
बाद कहीं कुछ
नहीं होना है
लगा रह देखने में
कुछ कलाबाजी
कुछ कलाकारी
दिखना सब सफेद
है साफ सुथरा
कुछ दिनो के बाद
कौन सा किस को
कहाँ उसी जगह पर
लम्बे समय तक
खसौटे गये को
दिखने दिखाने
के लिये रहना है
‘उलूक’
की आदत है
उसको भी कुछ भी
कभी भी कहीं भी
कहने के लिये
ही बस कुछ कहना है ।

चित्र साभार: www.canstockphoto.com

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