http://blogsiteslist.com
उधार लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
उधार लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

मंगलवार, 15 जुलाई 2014

जब उधार देने में रोया करते हो तो किसलिये मित्र बनाया करते हो

मित्र बनते हो
सबसे कहते
फिरते हो
दिखाते हो
बहुत कुछ
सीना खोल
कर फिरते हो
सामने से कुछ
पीछे से कुछ
और और करते हो
जान तक देने
की बात सुनी
गई है कई बार
तुम्हारे मुँह से
चाँद तारे तोड़
कर लाने की
बात करते हो
कितने बेशरम
हो तुम यार
थोड़ा सा पैसा ही
तो मांगा उधार
देने से मुकरते हो
साल में एक बार
नहीं चार पाँच बार
एक सी बात करते हो
एक माँगने पर
आधा दिया करते हो
कहाँ बेच कर आते
हो मानवता को
एक साल
होता नहीं है
वापस माँगना
शुरु करते हो
सच में बहुत ही
बेशरम हो यार
उधार देने में
बहुत ज्यादा
पंगा करते हो
कमजोर दिल के
मालिक हो और
मर्द होने का
दावा करते हो
दो चार बार मांग
लिया क्या उधार
पाँचवी बार से
गायब हो जाना
शुरु करते हो
मित्र होने का
दम भरते हो
सच में बहुत ही
बेशरम हो यार
यारों के यार
होने का दम
इतना सब होने
के बाद भी
भरते हो ।

शुक्रवार, 9 अगस्त 2013

लिखने में अभी उतना कुछ नहीं जा रहा है

सभी के आसपास 
इतना कुछ होता है
जिसे वो अगर
लिखना चाहे तो
किताबें लिख सकता है
किसी ने नहीं कहा है
सब पर लिखना
जरूरी होता है
अब जो लिखता है
वो अपनी सोच
के अनुसार ही
तो लिखता है
ये भी जरूरी नहीं
जो जैसा दिखता है
वो वैसा ही लिखता है
दिखना तो ऊपर वाले
के हाथ में होता है
लिखना मगर अपनी
सोच के साथ होता है
अब कोई सोचे कुछ और
और लिखे कुछ और
इसमें कोई भी कुछ
नहीं कर सकता है
एक जमाना था
जो लिखा हुआ
सामने आता था
उससे आदमी की
शक्लो सूरत का भी
अन्दाज आ जाता था
अब भी बहुत कुछ
बहुतों के द्वारा
लिखा जा रहा है
पर उस सब को
पढ़कर के लिखने
वाले के बारे में
कुछ भी नहीं
कहा जा रहा है
अब क्या किया जाये
जब जमाना ही नहीं
पहचाना जा रहा है
एक गरीब होता है
अमीर बनना नहीं
बल्की अमीर जैसा
दिखना चाहता है
सड़क में चलने से
परहेज करता है
दो से लेकर चार
पहियों में चढ़ कर
आना जाना चाहता है
उधर बैंक उसको
उसके उधार के
ना लौटाने के कारण
उसके गवाहों को
तक जेल के अंदर
भिजवाना चाहता है
इसलिये अगर कुछ
लिखने के लिये
दिमाग में आ रहा है
तो उसको लिखकर
कहीं भी क्यों नहीं
चिपका रहा है
मान लिया अपने
इलाके में कोई भी
तुझे मुँह भी
नहीं लगा रहा है
दूसरी जगह तेरा लिखा
किसी के समझ में
कुछ नहीं आ रहा है
तो भी खाली परेशान
क्यों हुऎ जा रहा है
खैर मना अभी भी
कहने पर कोई लगाम
नहीं लगा रहा है
ऎसा भी समय
देख लेना जल्दी ही
आने जा रहा है
जब तू सुनेगा
अखबार के
मुख्यपृष्ठ में
ये समाचार
आ रहा है  
गांंधी अपनी
लिखी किताब
“सत्य के साथ 

किये गये प्रयोग “
के कारण मृ्त्योपरांत
एक सदी के लिये
कारावास की सजा
पाने जा रहा है ।

सोमवार, 25 जून 2012

कार ला दो एक उधार ला दो

सुनो जी सुनो जी
एक कार अब तो
ले ही आते हैं
पैसा अपना किसी
बैंक में पहले
फिक्स करवाते है
उसके बाद किसी
से कुछ उधार
लेने की योजना
एक बनाते हैं
बैंक से उधार लेने
पर तो ब्याज सिर
चढ़ता चला जायेगा
किसी पड़ोसी या दोस्त
को फसाने से काम
बहुत आसान हो जायेगा
कुछ लम्बा समय भी
मिल जायेगा
और खाली मूलधन
लौटाने से भी काम
हमारा चल ही जायेगा
आज से ही रेकी करना
आप शुरू कर डालिये
पहले पैसे वाले जो
पैदल चला करते हैं
उन पर नजर डालिये
ऎसे लोग बड़ी किफायत
के साथ चला करते हैं
पैसा बर्बाद बिल्कुल नहीं
कभी करते हैं
बस जरूरत की चीजें
ही खरीदा करते हैं
छोटे समय में इन
लोगों के पास अच्छी
पूंजी जमा हो जाती है
जो किसी के भी कहीं
काम में नहीं आ पाती है
इन लोगों को अपने
पैसे को कहीं लगाना
आप सिखलाइये
जमाना कहाँ से कहाँ
पहुँच गया है इनको
आईना दिखलाइये
जीने चढ़ उतर कर
ये इधर उधर पैदल
जाते रहें कहीं भी
हमें मतलब नहीं
बस हमारे ऊपर
थोड़ा सा तरस
ये खा सकें इसके लिये
इनके सामने गिड़गिड़ाने
में आप बिल्कुल
भी ना शर्माइये
सफाई कर्मचारी तक
आजकल झाडू़ लेकर
कार पर आने लगे हैं
हमें भी एक कार
दिलवाकर इज्जत
हमारी नीलाम सरेआम
होने से बचाइये।

सोमवार, 13 फ़रवरी 2012

खरीददार

रद्दी बेच डाल
लोहा लक्कड़
बेच डाल
शीशी बोतल
बेच डाल
पुराना कपड़ा
निकाल
नये बर्तन में
बदल डाल
बैंक से उधार
निकाल
जो जरूरत नहीं
उसे ही
खरीद डाल
होना जरूरी है
जेब में माल
बाजार को घर
बुला डाल
माल नहीं है
परेशानी कोई
मत पाल
सब बिकाउ है
जमीर ही
बेच डाल
बस एक
मेरी परेशानी
का तोड़ निकाल
बैचेनी है बेचनी
कोई तो खरीददार
ढूँड निकाल।

LinkWithin

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...