http://blogsiteslist.com
उधड़ा लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
उधड़ा लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

रविवार, 2 सितंबर 2012

स्टिकर

कपड़े पुराने
हो जाते हैं
कपडे़ फट
भी जाते हैं
कपडे़ फेंक
दिये जाते हैं
कपडे़ बदल
दिये जाते हैं
कुछ लोग
फटे हुऎ कपडे़
फेंक नहीं
भी पाते हैं
पैबंद लगवाते हैं
रफू करवाते हैं
फिर से पहनना
शुरु हो जाते हैं
दो तरह के लोग
दो तरह के कपडे़
कोई नहीं करता
फटे कपडो़
की कोई बात
जाड़ा हो या
फिर हो बरसात
जिंदगी भी
फट जाती है
जिंदगी भी
उधड़ जाती है
एक नहीं
कई बार
ऎसी स्थिति
हर किसी की
हो जाती है
यहाँ मजबूरी
हो जाती है
जिंदगी फेंकी
नहीं जाती है
सिलनी पड़ती है
रफू करनी पड़ती है
फिर से मुस्कुराते हुऎ
पहननी पड़ है
अमीर हो या गरीब
ऎसा मौका आता है
कभी ना कभी
कहीं ना कहीं
अपनी जिंदगी को
फटा या उधड़ा हुआ
जरूर पाता है
पर दोनो में से
कोई किसी को
कुछ नहीं बताता है
आ ही जाये कोई
सामने से कभी
मुँह मोड़ ले जाता है
सिले हुऎ हिस्से पर
एक स्टिकर चिपका
हुआ नजर आता है
पूछ बैठे कोई कभी
तो खिसिया के
थोड़ा सा मुस्कुराता है
फिर झेंपते हुऎ बताता है
आपको क्या यहाँ
फटा हुआ कुछ
नजर आता है
नया फैशन है ये
आजकल इसे
कहीं ना कहीं
चिपकाया ही
जाता है
जिंदगी
किसकी
है कितनी 

खूबसूरत
चिपका हुआ
यही स्टिकर
तो बताता है ।

LinkWithin

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...