http://blogsiteslist.com
उड़ान लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
उड़ान लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

मंगलवार, 15 अगस्त 2017

ऊँची उड़ान पर हैं सारे कबूतर सीख कर करना बन्द पंख उड़ते समय

किसी
से उधार
ली गई
बैसाखियों
पर करतब
दिखाना
सीख लेना

एक दो
का नहीं
पूरी एक
सम्मोहित
भीड़ का

काबिले
तारीफ ही
होता है

सोच के
हाथ पैरों को
आराम देकर

खेल खेल
ही में सही

बहुत दूर के
आसमान
को छू लेने
का प्रयास

अकेले नहीं
मिलजुल कर
एक साथ

एक मुद्दे
चाँद तारे
उखाड़ कर
जमीन पर
बिछा देने
को लेकर

सोच का
बैसाखी लिये
सड़क पर
चलना दौड़ना

नहीं जनाब
उड़ लेने
का जुनून

साफ नजर
आता है आज

बहुत बड़ी
बात है
त्याग देना
अपना
सब कुछ

अपनी खुद
की सोच
को तक

तरक्की के
उन्माँद की
खुशी व्यक्त
करना
बहुत जरूरी
होता है ‘उलूक’

त्यौहारों के
उत्सवों को
मनाते हुऐ

अपने पंखों
को बन्द कर
उड़ते पंछियों
को एक ऊँची
उड़ान पर
अग्रसर होते
देख कर।

चित्र साभार: NASA Space Place

शुक्रवार, 20 जून 2014

आभार वीरू भाई आपके हौसला बढ़ाने के लिये और आज का मौजू आपकी बात पर ।

सब कुछ उड़ता है वहाँ उड़ाने वाले जहाँ होते हैं


लेखन को पँख
लग गये हैं जैसे
उसने कहा
क्या उड़ता हुआ
दिखा उसे बस
यही पता नहीं चला
लिखा हुआ भी
उड़ता है
उसकी भी उड़ाने
होती हैं सही है
लेकिन कौन सी
कलम किस तरह
कट कर बनी है
कैसे चाकू से
छिल कर उसकी
धार बही है
खून सफेद रँग
का कहीं गिरा
या फैला तो नहीं है
किसे सोचना है
किसे देखना है
मन से हाथों से
होते होते कागज तक
उड़कर पहुँची है
छोटी सोच की
ऊड़ान है और
बहुत ऊँची है
किस जमीन में
कहाँ रगड़ने के
निशान छोड़ बैठी है
उड़ता हुआ जब
किसी को किसी ने
नहीं देखा है
तो उड़ने की बात
कहाँ से लाकर
यूँ ही कह दी गई है
पँख कटते है जितना
उतना और ऊँचा
सोच उड़ान भरती है
पूरा नहीं तो नापने को
आकाश आधा ही
निकल पड़ती है
पँख पड़े रहते हैं
जमीन में कहीं
फड़फड़ाते हुऐ
किसे फुरसत होती है
सुनने की उनको
उनके अगल बगल
से भी आते जाते हुऐ
उड़ती हुई चीजें
और उड़ाने किसे
अच्छी नहीं लगती हैं
‘उलूक’ तारीफ
पैदल की होती हुई
क्या कहीं दिखती है
जल्लाद खूँन
गिराने वाले नहीं
सुखाने में माहिर
जो होते हैं
असली हकदार आभार
के बस वही होते हैं
लिखने वाला हो
लेखनी हो या
लिखा हुआ हो
उड़ना उड़ाना हो
ऊँचाइ पर ले जा कर
गिरना गिराना हो
तूफान में कभी
दिखते नहीं कहीं भी
कभी भी तूफान लाने का
जिसको अनुभव
कुछ पुराना हो
असली कलाकार वो ही
और बस वो ही होते हैं
लिखने लिखाने वाले
तो बस यूँ ही कुछ भी
कहीं भी लिख रहे होते हैं
तेरी नजर में ही है
कुछ अलग बात
तेरे लिये तो उड़ने के
मायने ही अलग होते हैं ।

बुधवार, 17 जुलाई 2013

बैल एक दिखा इसलिये कहा

कल्पना की उड़ान
कब कहाँ को कर
जाये प्रस्थान
रोकना भी उसे
आसान नहीं
हो पाता है
अब कुछ अजीब
सा आ ही जाये
दिमाग के पर्दे में
बनी फिल्म को देखना
लाजमी हो जाता है
क्या किया जाये
उस समय जब
एक बैल सामने
से आता हुआ
नजर आता है
बैल का बैल होना
उसके हल को
अपने कंधों पर ढोना
खेत का किसी के
पास भी ना होना
सबके समझ में
ये सब आ जाता है
हर बैल लेकिन
अपने बैल के लिये
एक खेत की सीमा
जरूर बनाता है
उसे भी होना ही
पड़ता है किसी
का एक बैल कभी
अपने बैल को देखते
ही लेकिन यही
वो भूल जाता है
ऊपर से नीचे तक
बैल के बैल का बैल
पर बैल हूँ एक मैं
कोई भी स्वीकार
नहीं ये कर पाता है
हरेक की इच्छा
होती है बहुत तीव्र
हर कोई एक ऎसा
बैल अपने लिये
हमेशा चाहता है
जिसके कटे हुऎ
हो सींग दोनो
हौ हौ करते ही
इशारा जिसके
समझ में आता है
बैल इस तरह
एक साम्राज्य
बैलों का बना
भी ले जाता है
लेकिन बैल तो
बैल होते हैं
गलती से कभी
उतर गया हल
कंधे से थोडी़
देर के लिये
हर बैल उजाड़
लेकिन चला ही
जाना चाहता है ।

LinkWithin

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...