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मंगलवार, 17 दिसंबर 2013

कभी कभी अनुवाद करने से मामला गंभीर हो जाता है

बायोडाटा
या
क्यूरिक्यूलम विटे

नजदीकी
और
जाने पहचाने
शब्द

अर्थ
आज तक
कभी
सोचा नहीं

हाँ बनाये
एक नहीं
कई बार हैं

कई जगह
जा कर
बहुत से
कागज
बहुत से
लोगों को
दिखाते
भी आये हैं

कोई नयी
बात नहीं है

पर आज
अचानक
हिंदी में
सोच बैठा

पता चला
अर्थ नहीं
हमेशा
अनर्थ ही
करते चले
आये हैं

व्यक्तिवृत
या
जीवनवृतांत
होता हो
जिनका मतलब

उसके अंदर
बहुत कुछ
ऊल जलूल
बस
बताते चले
आये हैं

डेटा तक
सब कुछ
ठीक ठाक
नजर आता है

बहुत से
लोगों के पास
बहुत
ज्यादा ज्यादा
भी पाया जाता है

कुछ
खुद ही
बना लिया
जाता है

कुछ
सौ पचास बार
जनता से
कहलवा कर
जुड़वा
दिया जाता है

पर वृतांत
कहते ही
डेटा खुद
ही पल्टी
मार ले
जाता है

अपने बारे
में सभी कुछ
सच सच
बता देने
का इशारा
करना शुरु
हो जाता है

और
जैसे ही बात
शुरु होती है
कुछ
सोचने की
वृतांत की

उसके बारे
में फिर
कहाँ कुछ भी
किसी से भी
कहा जाता है

अपने अंदर
की सच्चाई
से लड़ता
भिड़ता
ही कोई
अपने बारे में
कुछ सोच
पाता है

रखता है
जिस जगह
पर अपने
आप को
उस जगह
को पहले से
ही किसी
और से
घिरा हुआ
पाता है

आसान
ही नहीं
बहुत
मुश्किल
होता है

जहां अपने
सारे सचों को
बिना किसी
झूठ का
सहारा लिये
किसी के
सामने से
रख देना

वहीं बायोडेटा
किसी का
किसी को
कहाँ से कहाँ
रख के
आ जाता है

इस सब
के बीच
बेचारा
जीवनवृतांत
कब खुद से ही
उलझ जाता है
पता ही नहीं
चल पाता है ।

मंगलवार, 13 अगस्त 2013

कभी एक रोमानी खबर क्यों नहीं तू लाता है

सब कुछ तो
वैसा 
नहीं
होता है जैसा 

रोज का रोज
आकर तू यहां
कह देता है

माना कि
अन्दर से
ज्यादातर
वही सब कुछ
निकलता है
जैसा कि
अपने आस
पास में
चलता है

पर
सब कुछ
तुझे ही
कैसे
और क्यों
समझ में
आता है

तेरे वहाँ तो
एक से
बढ़कर एक
चिंतकों का
आना जाना
हमेशा से ही
देखा जाता है

पर
तेरी जैसी
अजीब अजीब
सी
परिकल्पनाऎं
लेकर कोई
ना तो कहीं
आता है ना ही
कहीं पर
जाकर बताता है

दूसरी
ओर देख
बहुत
सी चीजें
जो होती
ही नहीं है

कहीं पर भी
दिखती नहीं हैं

उन विषयों
पर भी आज
जब विद्वानो
द्वारा बहुत
कुछ लिखा
हुआ सामने
आता है

शब्दों के
चयन का
बहुत ही
ध्यान रखा
जाता है

भाषा
अलंकृत
होती है

ऊल जलूल
कुछ भी
नहीं कहा
जाता है

तब तू भी
ऎसा कुछ
कालजयी
लिखने की
कला सीखने
के लिये
किसी को
अपना गुरू
क्यों नहीं
बनाता है

वैसे भी
रोज का रोज
सारी की सारी
बातों को
कहना
कौन सा
इतना जरूरी
हो जाता है

जहाँ तेरे
चारों ओर
के हजारों
लोगों को
अपने सामने
गिरते हुऎ
एक मकान
को देखकर
कुछ भी नहीं
हुआ जाता है

तू बेकार में
एक छोटी सी
बात को
रेल में
बदलकर
हमारे सामने
रोज क्यों
ले आता है

अपना समय
तो करता ही
है बरबाद
हमारा दिमाग
भी साथ
में खाता है ।

मंगलवार, 11 सितंबर 2012

देशद्रोह

थोड़ा कुछ लिखना
थोड़ा कुछ बनाना
हो जाता है अब
अपने लिये ही
आफत को बुलाना
देखने में तो बहुत
कुछ होता हुआ
हर
किसी को नजर आता है
उस होते हुऎ पर
बहुत ऊल जलूल
विचार भी आता है
कोशिश करके बहुत
अपने को रोका जाता है
सब कुछ ना कह कर
थोड़ा सा इशारे के लिये
ही तो कहा जाता है
यही थोड़ा सा कहना
और बनाना अब
देशद्रोह हो जाता है
करने वाला ऊपर से
झंडा एक फहराता है
डंडे के जोर पर
जो मन में आये
कर ले जाता है
करने वाले से
कुछ बोल पाने की
हिम्मत कोई नहीं
कर पाता है
क्योंकी ऎसा करना
सम्मान से करना
कहा जाता है
लिखने बनाने वाले पर
हर कोई बोलना
शुरू हो जाता है
सारा कानून जिंदा
उसी के लिये हो जाता है
अंदर कर दिये जाने को
सही ठहराने के लिये
अपनी विद्वता प्रदर्शित
करने का यह मौका
कोई नहीं गंवाता है
अंधेर नगरी चौपट राजा
की कहावत का मतलब
अब जा कर अच्छी तरह
समझ में आ जाता है ।

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