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बुधवार, 14 अगस्त 2013

तू बंदूक चलाने को कंधा दे देगा मेडल पर मेरे को मिलेगा !

आसान होता है
बंदूक चलाना
घोडे़ को दबाना
किसी के मरे बिना
चारों खाने चित्त
कर ले जाना
ना खून का दिखना
ना पुलिस का आना
ना कोई मुकदमा
ना किसी को
कहीं जेल की
सजा हो जाना
कौन सी ऎसी बंदूक होगी
दिखती भी नहीं होगी
गोली भी नहीं होगी
आवाज भी नहीं होगी
और तो और किसी
सामने वाले की
मौत भी नहीं होगी
सांप भी नहीं होगा
लाठी भी नहीं होगी
फौज भी नहीं होगी
सरहद भी नहीं होगी
बस होगी वाह वाह
जो हर तरफ होगी
बेवकूफ हैं जो सेना
में चले जाते हैं
सरहद में जाकर
गोली खा खा
के मर जाते हैं
पता नहीं बंदूक
चलाने का सबसे
आसान तरीका
क्यों नहीं अपनाते हैं
जिसमें बंदूक खरीदने
कहीं भी नहीं जाते हैं
बंदूक बस एक अपनी
सोच में ले आते हैं
जरूरत होती है
एक ऎसे कंधे की
जो आसानी से ही
उपलब्ध हो जाते हैं
सारे शूरवीर ऎसे ही
कंधों में रखकर
घोडो़ को दबाते हैं
गोली चलाते हैं
सामने वाले कोई
नहीं कहीं मर पाते हैं
कंधे देने वाले ही
इसमें शहीद हो जाते हैं
बंदूक चलाने वाले
मेडल पा जाते हैं
बेवकूफ कंधे देने वाले
समाज में हर कोने
में पाये जाते हैं
लेकिन उस पर
बंदूक रख कर
गोली चलाने वाले
बिरले ही हो पाते हैं
समाज को दिशा
देने वालों में
आज ये ही लोग
सबसे आगे जाते हैं
जो अपने कंधे ही
नहीं बचा पाते हैं
ऎसे बेवकूफों से
आप और क्या
उम्मीद लगाते हैं ।

सोमवार, 22 अप्रैल 2013

टीम

कल एक मकसद
फिर सामने से
नजर आ रहा है
दल बना इसके
लिये समझा
बुझा रहा है
बहुत से दल
बनते हुऎ भी
नजर आ रहे हैं
इस बार लेकिन
इधर के कुछ
पक्के खिलाडी़
उधर जा रहे हैं
कर्णधार हैं
सब गजब के
कंधा एक ढूँढने
में समय लगा रहे हैं
मकसद भी दूर
बैठे हुऎ दूर से
दूरबीन लगा रहे हैं
मकसद बना
अपना एक
किसी को नहीं
बता रहे हैं
चुनकर दूसरे
मकसद को
निपटाने की
रणनीति
बना रहे हैं
शतरंज के
मोहरे एक
दूसरे को जैसे
हटा रहे हैं
टी ऎ डी ऎ
के फार्म इस
बार कोई भी
भरने नहीं
कहीं जा रहे हैं
मकसद खुद ही
दल के नेता के
द्वारा वाहन
का इंतजाम
करवा रहे हैं
एक दल
एक गाडी़
नाश्ता पानी
फ्री दिलवा
रहे हैं
कर्णधार कल
कुछ अर्जुन
युद्ध के लिये
चुनने जा रहे हैं
आने वाले समय
के सारे कौरव
मुझे अभी से
आराम फरमाते
नजर आ रहे हैं
पुराने पाँडव
अपने अपने
रोल एक दूसरे
को देने जा रहे हैं
नाटक करने को
फिर से एक बार
हम मिलकर
दल बना रहे हैं
पिछली बार
के सदस्य इस
बार मेरे साथ
नहीं आ रहे हैं
लगता है वो खुद
एक बड़ी मछली
की आँख फोड़ने
जा रहे हैं
इसलिये अपना
निशाना खुद
लगा रहे हैं ।

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