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सोमवार, 9 अप्रैल 2012

वक्त रहते सुधर जाओ

कितना
कनफ्यूज़न
हो जाता है

कौन सही है
कौन गलत है
नापने का
पैमाना हर
कोई अपने
अपने घर से
अपने बस्ते में
लेकर आता है

मास्टर जी
आप अब
पुराने हो
चुके हो
आकर वो
बताता है

प्यार से
समझाता है
तुम्हारे
जमाने
में ये सब
नहीं होता
रहा होगा
कहीं पर
अब हर
जगह यही
और ऐसा
ही होता है
इतना छोटा
सा हिसाब
आपसे इस
उम्र में भी
पता नहीं
क्यों नहीं
लग पाता है

तुमको ना
जाने क्यों
नहीं कुछ
दिखाई
देता है
सारा होना
आज सड़क
में होता है
बाजार में
होता है
जंगल में
जाने की
जरूरत
नहीं होती है

खुले
आसमान
में खुले
आम
होता है

पर्दे में
अब रखने
की कुछ भी
जरूरत
नहीं होती है

जो भी
होता है
पूरा मजमा
लगा कर
सरेआम
होता है

अब तू
नहीं कर
पाता है
इसलिये
जार जार
रोता है

तेरे जैसे
विचारों
वाला
इसी लिये
ओल्ड
होता है

जो किया
जा रहा है
वो ही बस
बोल्ड
होता है

तू भी
करले
नहीं तो
बहुत
पछतायेगा

नये लोगों
की फिरकी
नहीं खेल
पायेगा

बल्ला
तेरे हाथ
में मजबूत
होगा
लेकिन
तू
क्लीन बौल्ड
हो जायेगा ।

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