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शुक्रवार, 14 फ़रवरी 2014

सच सामने लाने में बबाल क्यों हो जाता है

सच कड़वा होता है
निगला नहीं जाता है
गांंधी के मर जाने
से क्या हो जाता है
गांंधीवाद जो क्या
उसके साथ में
चला जाता है
उसके सिखाये गये
सत्य का प्रयोग
जब किया जाता है
तो बबाल हो गया
करके क्यों बताया
और दिखाया जाता है
बहुत बहुत शाबाशी
का काम किया जाता है
जब जैसा मन में
होता है वैसा कर
लेने की हिम्मत
कोई कर ले जाता है
उस के लिये एक
उदाहरण हो जाता है
जो सोचता वहीं है
पर करने को कहीं
पीछे गली में
चला जाता है
सारे देश में जब
हर जगह कुछ
माहौल एक जैसा
हो जाता है ऐसे में
कहीं किसी जगह से
निकल कर कुछ बाहर
आ ही जाता है
सच बहुत दिनों तक
छिपाया नहीं जाता है
मिर्चा पाउडर का
प्रयोग तो आँसू
लाने के लिये
किया जाता है
देश का दर्द बाहर
ला कर दिखाने
के लिये कुछ तो
करना ही पड़ जाता है
संविधान में ही
इस सब की व्यवस्था
कर लेने में किसकी
जेब से पता नहीं
क्या चला जाता है
जैसा माहौल सारे
देश में अंदर ही
अंदर छुपा छुपा के
हर दिल में
पाला जाता है
उसे किसी के बाहर
ला कर सच्चाई से
दिखा देने पर क्यों
इतना बबाल हो जाता है
भारत रत्न ऐसे ही
लोगों को देकर
कलयुगी गांंधी का
अवतार क्यों नहीं
कह दिया जाता है
अगर नहीं हो पा
रहा होता है
इस तरह का
किसी से कहीं
कुछ सीखने सिखाने
के लिये मास्टर के
पास क्यों नहीं
भेज दिया जाता है
हाथ पैर चलाये बिना
जिसको बहुत कुछ
करवा देने का
अनुभव होता है
जब ऐसा माना
ही जाता है ।

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