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रविवार, 28 जून 2015

नहीं भी हुआ हो तब भी हो गया है हो गया है कह देने से कुछ नहीं होता है

बहुत सारे लोग
कह रहे होते हैं
एक बार नहीं
बार बार
कह रहे होते हैं
तो बीच में
अपनी तरफ से
कुछ भी कहना
नहीं होता है
जो भी कहा
जा रहा होता है
नहीं भी समझ में
आ रहा होता है
तो भी समझ में
अच्छी तरह से
आ रहा है ही
कहना होता है
मान लेना होता है
हर उस बात को
जिसको पढ़ा
लिखा तबका
बिना पढ़े लिखे
को साथ में लेकर
मिलकर जोर शोर
से हर जगह
गली कूँचे
ऊपर से नीचे
जहाँ देखो वहाँ
कह रहा होता है
नहीं भी दिख
रहा होता है
कहीं पर भी
कुछ भी उस
तरह का जिस
तरह होने का
शोर हर तरफ
हो रहा होता है
आने वाला है
कहा गया होता है
कभी भी पहले
कभी को
आ गया है
मान कर
जोर शोर से
आगे को बढ़ाने
के लिये अपने
आगे वाले को
बिना समझे
समझ कर
मान कर उसके
आगे वाले से
कहने कहाने
के लिये बस कह
देना होता है।

चित्र साभार: www.dreamstime.com

शुक्रवार, 3 जनवरी 2014

कुछ देशी इलाज करवा बहुत फालतू बातें आजकल कर रहा है

समय बदला है
तरीके भी बदले हैं
उसी तरह उसके
साथ साथ
बस नहीं बदली है
तो तेरी समझ
समझा कर
पहले जो कुछ भी
हुआ करता था
उस समय के
हिसाब से ही
हुआ करता था
अब उस समय का
हिसाब इस समय
भी सही हो
इस बात को
समय कभी भी
किसी से भी
किसी जमाने में
भी कहीं नहीं
कहा करता था
लौह पुरुष हुआ था
कहते हैं कोई कभी
किसे पता है
कितना लोहा उसमें
हुआ करता था
एक कोई और
धोती पहना हुआ
एक चश्मा लगाये
लाठी लेकर सच की
वकालत भी करता था
होता था बहुत कुछ
स्वत: स्फूर्त अपने आप
ऊपर से नीचे की
ओर ही नहीं
विपरीत दिशाओं में भी
खुद का खुद कुछ कुछ
बहा करता था
समय बदल गया है
लौह पुरूष नहीं
भी बन रहा है
चिंता मत किया कर
लौहा पूरे देश से
कोई आज भी
जमा कर रहा है
बनेगा कुछ ना कुछ
सच की वकालत
बिना लाठी चश्में
और धोती के भी
कोई कोई कर रहा है
बस बताना पड़ रह है
एक दो नहीं पूरी
एक भीड़ के द्वारा
की कोई कुछ कर रहा है
और ईमानदारी से
ही कर रहा है
एक तू है अभी भी
पुराने तरीकों पर
ना जानें क्यों
अड़ रहा है
सोच कितने लोगों
से उसे कहलवाना
पड़ रहा है
संचार तंत्र का भी
सहारा जगह जगह
लेना पड़ रहा है
दस लोगों का
ईमानदारी का दिया
हुआ प्रमाण पत्र भी
क्या तेरे पल्ले
नहीं पड़ रहा है
जब कह दिया गया है
छपा दिया गया है
टी वी में तक
दिखा दिया गया है
तब भी तू बेकार में
मण मण कर रहा है | 

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