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शुक्रवार, 15 फ़रवरी 2013

लिखा क्या है से क्या होता है किसने लिखा है जब तक पता नहीं होता है

एक आदमी
लिखता है
कुछ पागल
का जैसा
जो वो खुद
भी समझ
नहीं पाता है
आदमी आदमी
की बात होती है
इसका लिखा
बहुत से आदमियों
को बिना पढे़
भी समझ में
आ जाता है
हर आदमी
उसके लिखे
पर कुछ ना
कुछ जरूर
कह जाता है
एक पागल
लिख जाता है
आदमी जैसा कुछ
पता नहीं कैसे
कभी कहीं पर
ना कोई आता है
ना कोई जाता है
कुछ लिखना तो
रही दूर की बात
गलती से भी
कोई देखना भी
नहीं चाहता है
पागल को कोई
फर्क नहीं पड़ता
कोई आये कोई जाये
ना पढे़ ना कुछ
लिख कर जाये
लेकिन आदमी
अपने लिखे पर
गिनता है
पागलों की
संख्या भी
और दिखाता है
आदमी ही
बस आये
एक दिन
गलती से
पागल का नाम
बडे़ आदमियों
की सूची में
छपा हुआ
आ जाता है
उस दिन
पागल अपने
बाल नोचता
हुआ दिख
जाता है
उसे दिखता है
उसके लिखे
हुऎ पर
हर आदमी
कुछ ना कुछ
जरूर लिख
के जाता है | 

शुक्रवार, 1 जून 2012

मुर्गी की दाल

समझदार मुर्गी
अपनी सूरत
और सेहत को
कभी नहीं
बढा़ती है
दुश्मनी होती है
जिस मुर्गी से
उसे खूब
खिलाती और
पिलाती है
वैसे तो हर बाडे़
में मुर्गियाँ ही
मुर्गियाँ हर तरफ
फड़फडा़ती हैं
लेकिन हर मुर्गी
की तरफ हर
किसी की नजर
कहाँ जाती है
ये वाकई
समझदारी
की बात सभी
के द्वारा
बताई जाती है
एक कानी मुर्गी
ही मुर्गियों के
द्वारा रानी
चुनवायी जाती है
बाड़े की सेहतमंद
खूबसूरत मुर्गी
सबकी नजर में
लाई जाती है
चाहने वालों
के हाथों कहीं
ना कहीं कटवा
दी जाती है
मर खप
जब जाती है
फिर पकवाई
भी जाती है
खाने वालों के
नखरे सहती है
और दाल
बताई जाती है
कानी मुर्गी
इसी बीच कहीं
जंगल में जाकर
नाच आती है
जंगल में मोर
नाचा की
एक खबर
अखबार
में आती है
कितने आसान
तरीके से
घर की मुर्गी
दाल बराबर
सबको समझा
जाती है।

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