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सोमवार, 12 अक्तूबर 2015

शिव की बूटी के उत्थान का समय भी आ रहा है


तब सही
समझे थे
या अब सही
समझ रहे हैं
बस इतना सा
समझ में नहीं
आ पा रहा है
जो है सो है
मजा तो
आ रहा है
बहुत दिनो के
बाद कुछ कुछ
लगा जैसे
पहाड़ी राज्य
की किस्मत का
दरवाजा ऊपर वाला
अब जाकर जल्दी
खोलने जा रहा है
भाँग की खेती
करने का अधिकार
जल्दी ही सरकार
के द्वारा पहाड़ी
किसानो को
दिया जा रहा है
बहुत अच्छी बात
इसमें जो बताई
समझाई गई है
उससे कोई खतरा
किसी को नहीं होगा
जैसा आभास
पहली बार में ही
आ जा रहा है
जंगलों में इफरात
से उगती है भाँग
जिस जमीन पर
काले सोने के
नाम से आज
भी ओने कोने
में बेचा खरीदा
जा रहा है
खेतों में उगाया
जायेगा अब
काला सोना
ठेका सरकार
और सरकार के
नुमाँइंदों को ही
दिया जा रहा है
सुरा ने किये
बहुत सारे
चमत्कार
इतिहास में लिखा
है बहुत कुछ
अब वही प्रयोग
पुन: एक बार कर
भाँग और भाँग से
बनने वाले शिव
भगवान की बूटी
को पहाड़ के
कोने कोने में
पहुँचाने का
अप्रतिम प्रयास
किया जा रहा है
जय हो देव भूमी
और देवताओं की
मुँह मत बिसूर
खुश हो ले ‘उलूक’
झूठ में ही सही
असुरों के सुरों पर
शोध करने का
सामान बहुत सा
जगह जगह के
लिये जमा
किया जा रहा है ।

चित्र साभार:
www.shrisaibaba.com
legalizethecannabis.tumblr.com

रविवार, 14 जून 2015

कोशिश कर घर में पहचान महानों में महान

एक खेत
सौ दो सौ
किसान
किसी का हल
किसी का बैल
बबूल के बीज
आम की दुकान
जवानों में बस
वही जवान
जिसके पास
एक से निशान
बंदूकें जंग
खाई हुई
उधार की
गोलियाँ
घोड़े दबाने
के लिये
अपने छोड़
सामने वाले
कंधे को
पहचान
मुँह में रामायण
गीता बाईबिल
और कुरान
हाथ में गिलास
बोतल में सामान
अपने मुद्दे मुद्दे
दूसरे के मुद्दे
बे‌ईमान
घर में लगे
तो लगे आग
पानी ले
चल रेगिस्तान
‘उलूक’ बंद रख
नाक मुँह
और कान
अपनी अपनी
ढपली
अपने अपने
गान
जय जवान
जय किसान ।



चित्र साभार: cybernag.in

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