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बुधवार, 25 मई 2016

नोच ले जितना भी है जो कुछ भी है तुझे नोचना तुझे पता है अपना ही है तुझे सब कुछ हमेशा नोचना

कहाँ तक
और
कब तक
नंगों के
बीच में
बच कर रहेगा
आज नहीं
कल नहीं
तो कभी
किसी दिन
मौका
मिलते ही
कोई ना
कोई धोती
उतारने
के लिये
खींच लेगा
कुछ अजीब
सा कोई
रहे बीच
में उनके
इतने दिनों
तक आखिर
कब तक
इतनी
शराफत से
बदतमीजी
कौन ऐसी
यूँ सहेगा
शतरंज
खेलने में
यहाँ हर
कोई है
माहिर
सोचने
वाले प्यादे
को कब
तक कौन
यूँ ही
झेलता
ही रहेगा
कुत्ता खुद
आये पट्टा
डाल कर
गले में
अपने
एक जंजीर
से जुड़ा
कर देने
मालिक के
हाथ में
ऐसा कुत्ता
ऐसा मालिक
आज गली
गली में
इफरात
से मिलेगा
फर्जीपने
की दवाई
बारकोड
ले कर
आ रहे
हैं फर्जी
जमाने के
उस्ताद लोग
फर्जी आदमी
की सोच में
बारकोड
लगा कर
दिखाने को
कौन क्या और
किससे कहेगा
‘उलूक’ आज
फिर नोच ले
जितना भी
नोचना है
अपनी
सोच को
उसे भी
पता है
तू जो भी
नोचेगा
अपना ही
अपने आप
खुद ही नोचेगा ।


चित्र साभार: worldartsme.com

बुधवार, 18 मई 2016

राजशाही से लोकतंत्र तक लोकतांत्रिक कुत्ते और उसकी कटी पूँछ की दास्तान

राजा राजपाट
प्रजा शाह
शहंशाह
कहानियाँ
एक नहीं हैं
कई कई हैं
किताबों में हैं
पोथियों में हैं
पुस्तकालयों में हैं
विद्यालयों में हैं
कोने कोने पर
फैली हुई हैं
कुछ जगी हुई हैं
कुछ आधी
नींद में हैं
उँनीदी हुई हैं
कुछ अभी
तक सोई हुई हैं
राजतंत्र कहते हैं
पुरानी कहानी है
राजा रानी होते थे
एक नहीं बहुत
सारी निशानी हैं
कहीं उनकी यादें हैं
कहीं उनके ना
होने की वीरानी है
सब को ये सब
पता होता है
‘उलूक’
तेरी बैचैनी
भी समझ के
बाहर होती है
जो नहीं होता है
उसके लिये ही तू
किसलिये हमेशा
इतना जार
जार रोता है
अब तक भी
समझता क्यों नहीं है
प्रजातंत्र हो चुका है
सारे प्रजा के तांत्रिक
प्रजा के लिये ही
तंत्र करते हैं
स्वाहा: स्वाहा:
कहते हुऐ
प्रजा की परतंत्रता
के लिये अपना
सब कुछ अर्पण
तुरंत करते हैं
केवल और केवल
एक सौ आठ बार
रोज सुबह और शाम
इसी पर आधारित
सारे के सारे
मंत्र करते हैं
तंत्र करते भी हैं
तो सिर्फ प्रजा
के लिये ही
तंत्र करते हैं
राजतंत्र होता
था पहले
बस एक
राजा होता था
अब हर कोने
कोने पर होता है
राजा होता है
नहीं होता है
राजा होते हैं होता है
राजा के नीचे भी
जो होता है
वो भी राजा होता है
राजाओं की
शृंखला होती है
शृंखला की कड़ी
में हर कड़ी के
सिर पर मुकुट होता है
दिखता नहीं है
नहीं दिखने वाली
हिलती हुई कुत्ते
की पूँछ होती है
ना कुत्ता होता है
ना मालिक होता है
मालिक तो होता
ही है कुत्ता भी
राजा होता है
ऐ मालिक तेरे
बंदे हम का
अहसास यहीं
और यहीं होता है
बिना पूँछ का कुत्ता
आँखों में आँसू
लिये होता है
कुत्ता होता है
पर कुत्तों की
श्रंखला से बाहर
अपने कुत्ते होने
पर रोता हुआ
अपनी कटी पूँछ
का मातम
कर रहा होता है ।

चित्र साभार: www.parispoodles.com

शनिवार, 21 नवंबर 2015

कौन कहता है कुत्ता सोचना और कुत्ता हो जाने में कुछ अजीब होता है हर कुत्ते का अपना नसीब होता है

भौंकना सीखना
चाहता हूँ
इसलिये
कुत्तों के
बीच रहता हूँ
कुत्ता नहीं हूँ
कुत्तों से कभी
नहीं कहता हूँ
कुत्ते भी कहाँ मुझे
एक कुत्ता मानते हैं
भौंकता हूँ तो भी
आदमी की तरह
बस आँखें तानते हैं
कुत्ता कुत्ते पर
कभी भी नहीं
भौंकना चाहता है
कुत्तों को पता होता है
कुत्ता कौन कौन है
हर कुत्ता जानता है
अब इतना कुत्ता
हो जाना भी
अच्छा कहाँ होता है
कुत्तों के नियम
कानून हर कुत्ता
अच्छी तरह जानता है
कुत्तों में से कुछ कुत्ते
कुत्तेपने के लिये
ही जाने जाते हैं
हर गली कूँचे के
कुत्तों में पहचाने जाते हैं
कुत्ता हो जाना इतना
बुरा भी नहीं होता है
कुत्तों के लिये कुत्ता तो
एक कुत्ता ही होता है
‘उलूक’
कुत्ता होने और
दिखाने में बहुत
बड़ा फर्क होता है
किसलिये करते हो
कलाबाजी कुत्तों के
बीच में रहकर
कुत्तों के लिये
भौंकना
कुत्तों का एक
जरायम
पेशा होता है ।
चित्र साभार: www.clipartsheep.com

बुधवार, 27 मई 2015

परेशान हो जाना सवाल देख कर सवाल का जवाब नहीं होता है

हमाम के
अंदर रहता है
अपने खुद के
पहने हुऐ
कपड़ों को
देख कर
परेशान होता है
दो चार जानवरों
के बारे में बात
कर पाता है
जिसमें एक गधा
एक लोमड़ी या
एक कुत्ता होता है
सब होते हैं जहाँ
वहाँ खुद मौजूद
नहीं होता है
इंसानों के बीच
एक गधे को
और गधों के बीच
एक इंसान का रहना
एक अकेले के लिये
अच्छा नहीं होता है
ढू‌ढ लेते हैं अपनी
शक्ल से मिलती
शक्लें लोग हमेशा ही
इस सब के लिये
आईना किसी के
पास होना जरूरी
नहीं होता है
इज्जत उतारने
के लिये कुछ
कह दिया जाये
किसी से
किसी किताब में
कहीं कुछ ऐसा
लिखा भी
नहीं होता है
अपने कपड़े तेरे
खुद के ही हैं
‘उलूक’
नंगों के
बीच जाता है
जिस समय
कुछ देर के लिये
उतार क्यों
नहीं देता है ?

चित्र साभार: imageenvision.com

सोमवार, 25 मई 2015

‘दैनिक हिन्दुस्तान’ सबसे पुरानी दोस्ती की खोज कर के लाता है ऐसा जैसा ही उसपर कुछ लिखा जाता है

सुबह कुछ
लिखना चाहो
मजा नहीं
आता है
रात को वैसे
भी कुछ नहीं
होता है कहीं
सपना भी कभी कभी
कोई भूला भटका
सा आ जाता है
शाम होते होते
पूरा दिन ही
लिखने को
मिल जाता है
कुछ तो करता
ही है कोई कहीं
उसी पर खींच
तान कर कुछ
कह लिया जाता है
इस सब से इतर
अखबार कभी कुछ
मन माफिक
चीज ले आता है
संपादकीय पन्ने
पर अपना सब से
प्रिय विषय कुत्ता
सुबह सुबह नजर
जब आ जाता है
आदमी और कुत्ते
की दोस्ती पुरानी
से भी पुरानी होना
बताया जाता है
तीस से चालीस
हजार साल का
इतिहास है बताता है
आदमी ने क्या सीखा
कुत्ते से दिखता है
उस समय जब
आदमी ही आदमी
को काट खाता है
विशेषज्ञों का मानना
मानने में भलाई है
जिसमें किसी का
कुछ नहीं जाता है
आदमी के सीखने
के दिन बहुत हैं अभी
कई कई सालों तक
खुश होता है
बहुत ही ‘उलूक’
चलो आदमी नहीं
कुत्ता ही सही
जिसे कुछ सीखना
भी आता है
दिखता है घर से
लेकर शहर की
गलियों के कुत्तों
को भी देखकर
कुत्ता सच में
आदमी से बहुत कुछ
सीखा हुआ सच में
नजर आता है  ।

चित्र साभार: www.canstockphoto.com

शुक्रवार, 6 मार्च 2015

होली हो ली मियाँ चलो आओ शुरु करते हैं खोदना फिर से अपना अपना कुआँ

होली हो ली मियाँ
चलो आओ
शुरु करते हैं
खोदना फिर से
अपना अपना कुआँ
अपनी अपनी समझ
की समझ है
अपनी अपनी
आग और
अपना ही
होता है धुआँ
जमाना बहुत
तरक्की पर है
अनदेखा
मत कीजिये
देखिये परखिये
अपनी अपनी
अक्ल से नापिये
कुत्तों की पूँछ
की लम्बाईयाँ
एक ही नस्ल
की अलग
मिलेगी यहाँ
और अलग
मिलेगी वहाँ
वो अपने कुत्ते
को होशियार
बतायेगा
मुझे अपने ही
कुत्ते पर
बहुत प्यार आयेगा
कुत्ता आखिर
कुत्ता ही होता है
ना वो समझ पायेगा
ना मेरी ही समझ
में ये आ पायेगा
सियार भी अब
टोलियों में
निकलते हैं कहाँ
कर जरूर रहे हैं
पर अकेले में
खुद अपने अपने
लिये हुआँ हुआँ
होली हो ली
इस साल की मियाँ
आगे के जुगाड़
पर लग जाओ
लगाओ आग कहीं
बनाओ कुछ धुआँ
मिलेगी जरूर
कोई पहचान
‘उलूक’ तुझे भी
और तेरी सोच को
कर तो सही
कुछ उसका जैसा
जिसे कर कर के
वो बैठा है आज
बहुत ऊपर वहाँ ।

चित्र साभार: funny-pictures.picphotos.net

रविवार, 23 नवंबर 2014

कुछ नहीं किया जा सकता है उस बेवकूफ के लिये जो आधी सदी गुजार कर भी कुछ नहीं सीख पाता है

रोज की बात है
रोज चौंकता है
अखबार पर
छपी खबर
पढ़ कर के
फिर यहाँ आ आ
कर भौंकता है
बिना आवाज के
कुत्ते की तरह
ऐसा चौंकना
भी क्या और
ऐसा भौंकना
भी क्या
अरे क्या हुआ
अगर एक चोर
कहीं सम्मानित
किया जाता है
ये भी तो देखा कर
एक चोर ही
उसके गले में
माला पहनाता है
अब चोर चोर के
बीच की बात में
तू काहे अपनी
गोबर भरे
दिमाग की
बुद्धी लगाता है
क्या होता है
अगर किसी
बंदरिया को
अदरख़ बेचने
खरीदने का
ठेका दे भी
दिया जाता है
और क्या होता है
अगर किसी
जुगाड़ी का जुगाड़
किसी की भी
हो सरकार
सबसे बड़ा जुगाड़
माना जाता है
बहुत हो चुका
तेरा भौंकना
तेरा गला भी
लगता है
कुछ विशेष है
खराब भी
नहीं होता है
थोड़ा बहुत
कुछ भी
कहीं भी
होता है
खरखराना
शुरु हो
जाता है
समय के
साथ साथ
बदलना
क्यों नहीं
सीखना
चाहता है
खुद का समय
तो निकल गया
के भ्रम से भ्रमित
हो भी चुका है
तो भी अपनी
अगली पीढ़ी को
ये कलाबाजियाँ
क्यों नहीं
सिखाता है
जी नहीं पायेगी
मर जायेगी
तेरी ही आत्मा
गालियाँ खायेगी
तेरी समझ में
इतना भी
नहीं आता है
कौन कह रहा है
करने के लिये
सिखाना है
समझा कर
समझने के लिये
ही उकसाना है
समझने के लिये
ही बताना है
चोरी चकारी
बे‌ईमानी भ्रष्टाचारी
किसी जमाने में
गलत मानी
जाती होंगी
अब तो बस
ये सब नहीं
सीख पाया तो
गंवारों में
गिना जाता है
वैसे सच तो ये है
कि करने वालों
का ही कुछ
नहीं जाता है
नहीं करने वाला
कहीं ना कहीं
कभी ना कभी
स्टिंग आपरेशन
के कैमरे में
फंसा दिया जाता है
इसी लिये ही तो
कह रहा है ‘उलूक’
गाँठ बाँध ले
बच्चों को अपने ही
मूल्यों में ये सब
बताना जरूरी
हो जाता है
करना सीख
लेता है जो
वो तो वैसे भी
बच जाता है
नहीं सीख पाता है
लेकिन जानता है
कम से कम
अपने आप को
बचाने का रास्ता तो
खोज ही ले जाता है ।

चित्र साभार: poetsareangels.com

बुधवार, 4 जून 2014

पूँछ नहीं हिला रहा है नारज नजर आ रहा है

मेरे पालतू कुत्ते
ने मुझ से
कुछ कहा तो नहीं
कहेगा भी कैसे
कुत्ते कहाँ
कुछ कहते हैं
मुझे लग रहा है
बस यूं ही कि
शायद वो
बहुत नाराज है
वैसे उसने कहीं
कुछ लिखा
भी नहीं है
इस बारे में
लिखेगा भी कैसे
कुत्तों का
फेसबुक एकाउंट
या ब्लाग
नहीं होते हैं
कुत्ते भौंकते
जरूर हैं
उसके भौँकने में
वैसे कोई फर्क
तो नहीं है
पर मुझे
लग रहा है
कुछ अलग
तरीके से
भौँक रहा है
ये सब
मैं सोच रहा हूँ
कुत्ता नहीं
सोच रहा है
कुत्ते सोचते
भी हैं या नहीं
ये मुझे पक्का
कहाँ पता है
ऐसा शायद
इस कारण
हो रहा है
पड़ोसी ने
कुत्ते से शायद
कुछ कहा है
जिस पर मैंने
ध्यान नहीं
दिया है
बस मुझे ही
लग रहा है
मालिक अपने
वफादार के लिये
कुछ नहीं
कर पा रहा है
अपने दुश्मनो से
अपने को
बचाने के लिये
कुत्ते को सामने
मगर ले आ रहा है
इसीलिये कुत्ते
को शायद गुस्सा
आ जा रहा है
पर वो ये सब भी
कहाँ 
बता रहा है ।

शुक्रवार, 2 मई 2014

अपना शौक पूरा कर उसके शौक से तेरा क्या नाता है

इन दिनों
कई दिन से
एक के बाद एक
सारे जानवर याद
आ जा रहे हैं
किसी को कुछ
किसी को कुछ
बना कर भी
दिखा जा रहे हैं
शेर चीते बाघ हाथी
मौज कर रहे हैं
छोटे मोटे जानवरों
के लिये पैक्ड लंच
का इंतजाम
घर में बैठे बैठे
करवा रहे हैं
आदमी की बात
फिर कभी कर लेंगे
आदमी कौन सा
हमेशा के लिये
जंगल को चले
जा रहे हैं
कुत्ते खुद तो
भौंक ही रहे हैं
सियारों से भी
भौंकने की अपेक्षा
रखते हैं जैसा ही
कुछ दिखा रहे हैं
अब कौन कहे
भाईयों से
भौंकने से क्या
किसी ने उनको
कहीं रोका है
भौंकते रहें
अपने लिये तो
रोज भौंक लेते हैं
इसके लिये भी भौंकें
उसके लिये भी भौंकें
लेकिन बहुत ही
गलत बात है
सियारों को तो
कम से कम
इस तरह से ना टोकें
वैसे तो सियार
और कुत्तों में
कोई बहुत ज्यादा
फर्क नजर
नहीं आता है
अच्छी तरह से
पढ़ाया लिखाया
सियार भी
कुछ समय में
एक कुत्ते जैसा
ही हो जाता है
पर समय तो
मिलना ही चाहिये
कोई जल्दी तो
कोई थोड़ी देर में
सभ्य हो पाता है
पता है तुमको
बहुत अच्छा
पूँछ हिलाना
भी आता है
जब तुमको कोई
नहीं रोक रहा
किसी के लिये
पूँछ हिलाने पर
तो किसी और का
किसी और के लिये
मिमियाने और
टिटियाने से
तुम्हें क्या हो जाता है
जब कोई सियार
तुमको कभी
मत भौंको कहने
के लिये नहीं आता है
संविधान के होते हुऐ
किस हैसियत से
तुमसे सियारों के ना
भौंकने पर जबरदस्त
रोष किया जाता है
‘उलूक’ इसीलिये
तो हमेशा ही
ऐसे समय में
चोंच ऊपर कर
आसमान की ओर
देखना शुरु हो जाता है ।

बुधवार, 5 फ़रवरी 2014

हर कोई हर बात को हर जगह नहीं कहता है इसी दुनियाँ में बहुतों के साथ बहुत कुछ होता है

प्रकृति के
सुन्दर भावों
और दृश्यों पर
बहुत कुछ
लिखते है लोग

लिखा हुआ
पढ़ना भी
चाहते हैं
पर
दुनिया में
कितने प्रकार
के होते हैं
लोगो के प्रकार
बस ये ही
भूल जाते हैं

अपेक्षाओं का
क्या किया जाये
कब किसकी
किससे क्या
हो जाती हैं

दुनियाँ बड़ी
गजब की है
चींंटी भी एक
हाथी की सूंड में
घुस कर उसे
मार ले जाती है

अब
कौन कुत्ता
किस प्रकार
का कुत्ता
हो जाता है
कुत्ता पालने
के समय
किसी से
कहाँ सोचा
जाता है

बहुत से लोग
कुत्तों को
पसँद नहीं
करते हैं
फिर भी
एक कुत्ता
होना ही
चाहिये की
चाह जरूर
रखते हैं

इसलिये
सोच लेते हैं
अपनी सोच में
एक कुत्ते को
और
पालना शुरु
हो जाते हैं

सब कुछ
क्योंकि
सोच में ही
चल रहा
होता है
कोई जंजीर
या
पट्टे से उसे
बांध नहीं
पाते हैं

बस यहीं से
अपेक्षाओं
के महल
का निर्माण
करना शुरु
हो जाते हैं

पालतू
बन कर
कुत्ता
जो पल
रहा होता है

उसे कुछ
भी नहीं
बताते है 

ऐसे में
कैसे उससे
वफादारी
की उम्मीद
पालने वाले
लोग सोचते
सोचते ही
कर ले जाते हैं

सोच में
ही अपनी
अपने किसी
दुश्मन को
काटता हुआ
देखने का
सपना
एक नहीं
कई देख
ले जाते हैं

टूटता है
बुरी तरह
कभी
इसी तरह
अपेक्षाओं
का पहाड़

जब उसी
पाले हुऐ
कुत्ते को
दुश्मन
के साथ
खुद की
ओर भौंकता
हुआ पाते हैं

बस
भौंचक्के
होकर
सोचते ही
रह जाते है

आदत
फिर भी
नहीं छूटती है

एक दूसरा
कुत्ता फिर से
अपनी सोच
में ले ही आते हैं !

गुरुवार, 26 दिसंबर 2013

आज कुत्ते का ही दिन है समझ में आ रहा था

सियार को
खेत से
निकलता
हुआ देखते ही

घरेलू कुत्ता
होश खो बैठा

जैसे
थोड़ा नहीं
पूरा ही
पागल हो गया

भौंकना शुरु
हुआ और
भौंकता ही
चला गया

बहुत देर तक
इंतजार किया
कहीं कुछ
नहीं हुआ

इधर बाहर
से किसी
ने आवाज
लगाई

सुनकर
श्रीमती जी
रसोई से ही
चिल्लाई

देख भी दो
बाहर कोई
बुला रहा है

कितनी देर से
बाबू जी बाबू जी
चिल्ला रहा है

उधर बंदरों
की टोली
ने लड़ना
शुरु किया
एक के
बाद दूसरे ने
खौं खौं
चीं चीं पीं पीं
करना शुरु किया

छत से पेड़ पर
पेड़ से छत पर
एक दूसरे
के पीछे
लड़ते मरते
कूदते फाँदते
भागना शुरु किया

उसी समय
बिजली ने
बाय बाय
कर अंधेरा
करते हुऐ
एक और
झटका दे दिया

इंवर्टर
चला कर
वापस
लौटा ही था
फोन तुरंत
घनघना उठा

बगल के
घर से ही
कोई बोल
रहा था
दो कदम
चलने से भी
परहेज कर
रहा था

टेलीफोन
डायरेक्टरी
देख किसी
का नम्बर
बताने को
बोल रहा था

झुंझुलाहट
शुरु हो
चुकी थी
मन ही मन
खीजना
मुँह के अंदर
बड़बड़ाने को
उकसा चुका था

बीस मिनट
दिमाग खपाने
के बाद भी
माँगे गये
नंबर का
अता पता
नहीं था

फोन पर
माफी मांग
थोड़ा चैन से
बैठा ही था

इंवर्टर ने
लाल बत्ती
जला कर
बैटरी डिसचार्ज
होने का
ऐलार्म बजाना
शुरु कर दिया था

कुत्ता अभी भी
पूरे जोश से
गला फाड़ कर
भौंके जा रहा था

श्रीमती जी
का
सुन्दर काण्ड
पढ़ना शुरु
हो चुका था

घंटी
बीच बीच में
कोई बजा
ले रहा था

लिखना शुरु
करते ही
जैसे पूरा
हो जा रहा था

आज इतने
में ही
सब कुछ
जैसे कह दिया
जा रहा था

बाकी सोचने
के लिये
कौन सा
कल फिर
नहीं आ
रहा था

कुत्ता
अभी भी
बिल्कुल
नहीं थका था

उसी अंदाज
में भौंकता
ही चला
जा रहा था ।

गुरुवार, 24 अक्तूबर 2013

कुछ नहीं होगा अगर एक दिन उधर का इधर नहीं कह पायेगा

बीच बीच में कभी कभी
आराम कर लिया कर
कुछ थोड़ी देर के लिये
आँख मुँह नाक कान
बंद कर लिया कर
बहुत बेचैनी अगर हो
प्रकृति का थोड़ा सा
ध्यान कर लिया कर
सोच लिया कर
सूरज चाँद और तारे
आसपास के जानवर
बच्चों के हाथ से छूट कर
आसमान की ओर उड़ते
भागते रंगबिरंगे गुब्बारे
सोच जरा सब कुछ
आदमी की बनाई घड़ी के
हिसाब से ही होता
चला जाता है
सोच कर ही अच्छा
लगता है ना
कहीं भी बाल भर का
अंतर नहीं देखा जाता है
तूफान भी आता है
अपने पेट के हिसाब से
खा पी कर चला जाता है
घर का कुत्ता तक अपने
निर्धारित समय पर ही
खाना मांगने के लिये
रसोई के आगे आकर
खड़ा हो जाता है
चिड़िया कौऐ बंदर सब
जैसे नियम से उसी
तरह पेश आते हैं
जैसा एक दिन पहले
कलाबाजियां कर
के चले जाते हैं
इस सब पर ध्यान
अगर लगा ले जायेगा
एक ही दिन सही
बेकार की बातों को
लिखने से बच जायेगा
बाकी तो होना वही है
तेरे आस पास हमेशा ही
कोई अपना कूड़ा आदतन
फेंक कर फिर चला जायेगा
लिख लेना बैचेनी को
अपनी उसी तरह
किसी रद्दी कागज पर
सफेद जूते और स्त्री किये
साफ सुथरे कपड़े पहन कर
सड़क पर चलने वाला
कोई सफेदपोश
कभी वैसे भी
उस कूड़े को पढ़ने
यहां नहीं आयेगा !

शनिवार, 28 जुलाई 2012

हिन्दी कुत्ता अंग्रेजी में भौंका

बहुत सारे कुत्ते
अगर भौंकना
शुरु हो जायें
एक साथ

क्या कोई
बता सकता है
कि हिंदी में
भौंक रहा है
या अंग्रेजी में

लेकिन
कभी कभी
ऎसा भी
देखने में
आ जाता है
हिंदी भाषी
एक कुत्ता
अचानक
अंग्रेजी में
भौंकना शुरु
हो जाता है

हाँ
ऎसा भी बस
तभी देखने
में आता है
जब वो
हवाई जहाज
से इधर
उधर जाता है

अब आप कहेंगे
कुत्ता था
ये समझ
में आता है
भौंक रहा था
वो भी समझ में
आता है

हिन्दी में
भौंका था
या
अंग्रेजी में था
ये आप को कैसे
पता चल पाता है

अब जनाब
क्या
सारी की
सारी बात
हम ही
आपको
बताते
चले जायेंगे

कुछ बातें
आप अपने
आप भी
पता नहीं
लगायेंगे

पता लगाईये
और
हमें भी बताइये

कुछ पैसा
खर्च वर्च
कर जाईये

हवाई
जहाज से
यात्रा कर
के आईये

आप जरूर
किसी ना
किसी ऎसे
कुत्ते से
टकरायेंगे

जमीन पर
उसे हिन्दी
में भौंकता
हुआ पायेंगे

और
हवाई जहाज
के उड़ते ही
आसमान मे

आप
आश्चर्य चकित
हो जायेंगे

जब उसी
कुत्ते को

अंग्रेजी में
भाषण
फोड़ता
हुआ पायेंगे । 

गुरुवार, 29 मार्च 2012

अंत:विषय दृष्टिकोण

विद्यालय से
लौट कर
घर आ रहा हँ
आज का एक
वाक्या
सुना रहा हूँ

सुबह जब
विद्यालय के
गेट पर पहुँचा
हमेशा मिलने
वाला काला कुत्ता
रोज की तरह
मुझपर
नहीं भौंका

आज वो
अपना मुँह
गोल गोल
घुमा रहा था

मैंने उसकी
तरफ देख
कर पूछा

ये क्या नया
कर रहे हैं जनाब

बोला मास्साब
क्यों करते हो
मुझसे मजाक

मैं सूँड
हिला कर
मक्खियाँ
भगा रहा हूँ
हाथी बनकर
उसका काम
भी निभा रहा हूँ

असमंजस में
मुझे देख कर
वो मुस्कुराया
थोड़ा सा
किनारे की
ओर खिसक
कर आया

फिर मेरे
कान में
धीरे से
फुसफुसाया

तुम कैमिस्ट्री
क्यों नहीं
पढ़ा रह हो
रोज फालतू
की एक
कविता यहाँ
चिपका रहे हो

जमाना
बहुत आगे
आजकल
जा रहा है
फिर तुम
मेरे को
पीछे की
ओर क्यों
खिसका रहे हो

अंत:विषय
दृष्टिकोण
क्या तुमको
नहीं आता है

इसमें वो
बिल्कुल भी
नहीं किया
जाता है
तुमको अच्छी
तरह से
जो आता है
और दूसरा
उसको
अच्छी तरह
से समझ
जाता है

तुम डाक्टर
हो तो स्कूल
चले जाओ
मास्टर हो
तो तबला
हारमोनियम
कुछ बजाओ

समय
के साथ
नया काम
करते चले
जाना चाहिये
जो किसी की
समझ में
भी नहीं
आना चाहिये

पुराने
कामों का
बक्सा
बना कर
कुवें में
फेंक कर
आना चाहिये

कल से
किसी मुर्गे
को यहाँ
काम पर
लगवाइये

बाँग बिल्ली
दे देगी
उससे यहाँ
भौंकवाइये।

शुक्रवार, 30 दिसंबर 2011

राज काज

़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़
नैनीताल समाचार में छपी थी मेरी कुछ लाइने
कुछ वर्ष पूर्व। वहाँ त्रिवार्षिक कार्यकाल वालों के
लिये था। यहां त्रिवार्षिक बदल कर पंचवर्षीय
कर दे रहा हूँ। शेष लाइने वही हैं ।
़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़

कुत्तों की सभा का
पंचवर्षीय चुनाव
गीदड़ ने पहना ताज

ऎल्सेशियन से
बुलडौग लडा़या
पौमेरियन एप्सो
को छोटा बतलाया
ये था इसका राज

ये था इसका राज
गीदड़ अब रेवड़ी बांटे
कुत्ता अब कुत्ते को काटे
कोई ना रहा अपवाद

कोई ना रहा अपवाद
ढटुओं को अब रोना आया [ढटुआ = Street Dog]
रोते रोते अलख जगाया
गये शेर की मांद
शेर गुर्राया

डर डर कर कुत्तों
ने फरमाया
हर शाख पे उल्लू
बैठा है अंजामें
गुलिस्ताँ क्या होगा

सुन शेर को
गुस्सा आया
पी0 ए0 को
आदेश लिखाया
क्यों शाख पर
उल्लू बैठाया
तुरंत जाओ
कुत्ता देश

तुरंत जाओ
कुत्ता देश
शाख को काट
के लाओ
उल्लू को
आकाश उड़ाओ

हुवा पालन
आदेश
उल्लू अब
गीदड़ पर बैठे

कुत्ता राज
गीदड़ राजा
ना रहे उल्लू
ना रही अब
शाखा ।

बुधवार, 21 दिसंबर 2011

आईना

आज एक लम्बे
अर्से के बाद
पता नहीं कैसे मैं
जा बैठा घर के
आईने के सामने
मेरे दिमाग की तरह
आईने ने कोई अक्स
नहीं दिखलाया
मैं थोड़ा घबराया
नजर को फिराया
सामने कैलेण्डर में
तो सब नजर
आ रहा था
तो ये आईना
मुझसे मुझको
क्यों छिपा रहा था
सोचा किसी को बुलाउं
आईना टेस्ट करवाउं
बस कुता भौंकता
हुवा आया थोडा़ ठहरा
फिर गुर्राया जब
उसने अपने को आईने
के अंदर भी पाया
मुझे लगा आईना
भी शायद समय
के सांथ बदल रहा होगा
इसी लिये कबाड़ का
प्रतिबिम्ब दिखाने से
बच रहा होगा
विज्ञान का हो भी
सकता है ऎसा
चमत्कार
जिन्दा चीजों का ही
बनाता हो आईना
इन दिनो प्रतिबिम्ब
और मरी हुवी चीजों
को देता हो चेतावनी
कि तुम अब नहीं हो
कुछ कर सकते हो
तो कर लो अविलम्ब।

शनिवार, 12 सितंबर 2009

परिचय

कुत्ता होता मैं
धोबी का छोड़ कर
किसी का भी होता
कहते हैं
कुत्ता वफादार होता है
अगर मैं कुत्ता होता
तो क्या वफादार होता ?
ये अलग प्रश्न है
थोडी़ देर के लिये सही
कुत्ता होने मे भी
क्या परेशानी है ?
पूंछ हिलाता
जीभ लपलपाता
डांठ पड़ने पर
पूंछ अपनी दबाता
काश !
सब कुत्ते होते
सब कुत्ते होते तो
फिर आदमी
का क्या होता ?
तब शायद
मुहावरा बनता
कुत्ते का आदमी
वफादार होता है
आदमी बिन कुत्ता
और
कुत्ते बिन आदमी
जंचता नहीं
कुत्ते भी रहें
और आदमी भी
पर
कुत्ता बनने
की प्रायिकता
ज्यादा हो जाये
दोनो नहीं होंगे
तो आदमी
कुत्ते को
डांठेगा कैसे ?
और कुत्ता भी
आदमी को
काटेगा कैसे ?
फिर भी समझने
की बात है
आदमी
चाह रहा है
एक कुत्ता बनना
क्योंकि
आदमी चाहता है पर
काट नही पाता है
और
कुत्ता
आदमी की मौत
नही मरता है
इन सब
के बावजूद भी
काश
मैं एक
कुत्ता होता
नजर आता है
कुत्ता उनकी
आगोश में
सोता है
आदमी आगोश
में होता है
तो होश खोता है
आदमी का कुत्ता
खुशनसीब है
कुत्ते का आदमी
बदनसीब है
फिर भी
आओ क्यों ना
सब कुत्ते बन जायें
और आदमी से
वफादारी निभायें
बतायें
कुत्ता हिन्दू
नहीं होता है
कुत्ता मुस्लिम
नहीं होता है
कुत्ता क्षत्रिय
नहीं होता है
कुत्ता ब्राह्मिन
नहीं होता है
और तो और
कुत्ते का
रिसरवेशन
नहीं होता है
काश !
कुत्ता होता मैं
और
मुहावरा होता
कुत्ते का आदमी
वफादार होता है ।
चित्र साभार: www.clipartpanda.com

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