http://blogsiteslist.com
कैक्टस लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
कैक्टस लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

मंगलवार, 28 जुलाई 2015

मौत आती है जिंदों को बौना दिखाने के लिये कभी कभी

निराशा
घेरती है
जिंदगी को
बहुत ही
बेरहमी से
सूख जाती हैं
आँखे भी
भूले जाते हैं
आँसू
याद में बस
पानी रह जाता है
देखते देखते
अपने आस पास
कुछ दूर कुछ
नजदीक
हर जगह फैली हुई
उदासी
कचोटती रहती है
अंदर से कहीं
डर गिद्धों को
देख देख कर
नुची हुई कुछ
लाशें
जानवरों की
जीवन चक्र हमेशा
खूबसूरती में
नहीं घूमता है
बहुत तेजी से
बढ़ते कैक्टस
भयभीत करते हैं
और फिर
किसी दिन
अचानक जिंदगी
नहीं मौत
जगाना शुरु
करती है
खुद के अंदर की
मरती हुई
आत्मा को
एक संबल
सा देती हुई
जब साफ साफ
दिखता है
श्रद्धाँजलि अर्पित
करते हुऐ कैक्टस
बहुत बौने
नजर आते हैं
सूखी हुई
बरसों से आँखें
नम होना
शुरु हो जाती हैं
झरने बहने
लगते हैं
एक हमेशा
के लिये
नींद में चला
गया शख्स
जिंदगी हो
जाता है
सारे बौनो
के सामने
मौत बहुत
ही ज्यादा
विशाल  नजर
आती है ।

चित्र साभार: www.clipartbest.com

शनिवार, 3 मई 2014

सब पी रहे हों जिसको उसी के लिये तुझको जहर के ख्वाव आते हैं

रेगिस्तान की रेत
के बीच का
कैक्टस
फूँलो के बीज
बेच रहा है
कैक्टस
बहुत कम लोग
पसंद करते हैं
कम से कम
वास्तु शास्त्री
की बातों को
मानने वाले
तो कतई नहीं
कुछ रखते हैं
गमलों में
क्योंकि फैशन
है रखने का
पर किंवदंतियों के
भूत से भी
पीछा नहीं
छुड़ा पाते हैं
गमले घर के
पिछवाड़े रख
कर आते हैं
कैक्टस के कांटे
निकलने का
मौसम अभी
नहीं है
आजकल उनमें
फूल आते हैं
फूल के बीज
बिक रहे हैं
बेतहाशा भीड़ है
और भीड़ की
बस दो ही
आँखें होती हैं
उनको कैक्टस से
कोई मतलब
नहीं होता है
उनके सपने में
फूल ही फूल
तो आते हैं
काँटो से
लहूलुहान
ऐसे लोग
भूखी बिल्ली
की तरह होते हैं
जो बस दूध की
फोटो देख कर ही
तृप्त हो जाते हैं
इसी भूख को
बेचना सिखाने
वाले कैक्टस
उस मौसम में
जब उनके काँटे
गिर चुके होते हैं
और कुछ फूल
जो उनके बस
फोड़े होते हैं
और सामने
वाले को
फूल जैसे ही
नजर आते हैं
सारे फूलों को
फूलों के बीज
बेचना सिखाते हैं
फूल कैक्टस को
महसूस नहीं करते हैं
उसके फूलों पर
फिदा हो जाते हैं
और बेचना
शुरु कर देते हैं
कैक्टस के बीज
‘उलूक’
बहुत दूर तक देखना
अच्छा नहीं है
कांटे तेरे दिमाग
में भी हैं जिनपर
फूल कभी भी
नहीं आते हैं
कैक्टस इसी बात को
बहुत सफाई के साथ
भुना ले जाते हैं
और यूँ ही
खेल ही खेल में
सारे के सारे
बीज बिक जाते हैं
देखना भर रह गया है
कितने बीजों से
रक्तबीज फिर से
उग कर आते हैं ।

शुक्रवार, 8 नवंबर 2013

फसल तो होती है किसान ध्यान दे जरूरी नहीं होता है

ना कहीं खेत होता है
ना ही कहीं रेत होती है
ना किसी तरह की खाद की
और ना ही पानी की कभी
कहीं जरूरत होती है
फिर भी कुछ ना कुछ
उगता रहता है
हर किसी के पास
हर क्षण हर पल
अलग अलग तरह से
कहीं सब्जी तो कहीं फल
किसी को काटनी
आती है फसल
किसी को आती है
पसंद बस घास उगानी
काम फसल भी आती है
और उतना ही घास भी
शब्दों को बोना हर किसी के
बस का नहीं होता है
इसके बावजूद कुछ ना कुछ
उगता चला जाता है
काटना आता है जिसे
काट ले जाता है
नहीं काट पाये कोई
तब भी कुछ नहीं होता है
अब कैसे कहा जाये
हर तरह का पागलपन
हर किसे के बस
का नहीं होता है
कुकुरमुत्ते भी तो
उगाये नहीं जाते हैं
उग आते हैं अपने आप
कब कहाँ उग जायें
किसी को भी
पता नहीं होता है
पर कुछ कुकुरमुत्ते
मशरूम हो जाते हैं
सोच समझ कर अगर
कहीं कोई बो लेता है
रेगिस्तान हो सकता है
कैक्टस दिख सकता है
कोई लम्हा कहा जा सके
कहीं एक बंजर होता है
बस शायद ऐसा ही
कहीं नहीं होता है ।

LinkWithin

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...