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गुरुवार, 5 जून 2014

कभी कुछ इस तरह भी कर लिया जाये

अब रोने चिल्लाने
पर कैसे गीत
या गजल
लिखी जाये
बस यूँ ही ऐसे ही
क्यों ना कुछ
रो लिया जाये
चिल्ला लिया जाये
वैसे भी कौन
पढ़ या गा रहा है
रोने चिल्लाने को
सब फालतू है
दिखाने को
बस ऐसे ही
जैसा है
रहने ही दिया जाये
कोई खरोंचने
में लगा हो
चिपकी हुई
कढ़ाई में
से मलाई
उसकी कुछ मदद
क्यों ना करने
को चला जाये
चाकू जंक लगा
साफ कर
चमका लिया जाये
अब हो रहा है
जो भी कुछ
नया तो नहीं
होने जा रहा
पुराने घाव को
धो पोछ कर
फिर से ढक
लिया जाये
बहुत कुछ
कहने से
कुछ नहीं
कहीं होने वाला
बस इतना कहने
के बाद जोर जोर से
गला फाड़ कर
हंस लिया जाये
‘उलूक’ बहुत
हो चुकी बकवास
चुपचाप क्यों ना
कहीं किसी और
को चाटने के
लिये अब यहाँ से
खिसक लिया जाये ।

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