http://blogsiteslist.com
खण्डहर लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
खण्डहर लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

सोमवार, 25 नवंबर 2013

मत बताना नहीं मानेंगे अगर कहेगा ये सब तू ही कह रहा था

पिछले दो दिन
से यहाँ दिखाई
नही दे रहा था
पता नहीं कहाँ
जा कर किस को
गोली दे रहा था
खण्डहर में उजाला
नहीं हो रहा था
दिये में बाती
दिख रही थी
तेल पता नहीं
कौन आ कर
पी रहा था
आसमान नापने
का ठेका कहीं
हो रहा था
खबर सच है
या झूठ मूठ  
पता करने
के लिये

उछल उछल
कर 
कुँऐ की
मुंडेर 
छू रहा था
बाहर के उजाले
का क्या कहने
हर काला भी
चमकता हुआ
सफेद हो रहा था
किसी के आँखों में
सो रहे थे सपने
कोई सपने सस्ते 
में बेच कर भी
अमीर हो रहा था
सोच क्यों नहीं
लेता पहले से 
कुछ ‘उलूक
अपने कोटर से
बाहर निकलने
से पहले कभी
अपने और अपनो
के अंधेरों में
तैरने के आदी
मंजूर नहीं करेंगे
सुबह होती दिख
रही थी कहीं
बहुत नजदीक से
और वाकई में तू
देख रहा था और
तुझे सब कुछ
साफ और
बहुत साफ
दिन के
उजाले सा
दिखाई भी
दे रहा था ।

LinkWithin

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...