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शुक्रवार, 18 सितंबर 2015

भाई कोई खबर नहीं है खबर गई हुई है

सारे के सारे
खबरची
अपनी अपनी
खबरों के साथ
सुना गया है
टहलने चले गये हैं
पक्की खबर नहीं है
क्योंकि किसी को
कोई भी खबर बना
कर नहीं दे गये हैं
खबर दे जाते तब भी
कुछ होने जाने
वाला नहीं था
परेशानी बस
इतनी सी है
कि समझ में
नहीं आ पा रहा है
इस बार ऐसा
कैसे हो गया
खबर दे ही
नहीं गये हैं
खबर अपने
साथ ही ले गये हैं
अब ले गये हैं तो
कैसे पता चले
खबर की खबर
क्या बनाई गई है
कैसे बनाई गई है
किस ने लिखाई है
किस से लिखवाई गई है
किसका नाम
कहाँ पर लिखा है
किस खबरची को
नुकसान हुआ है
और किस खबरची को
फायदा पहुँचा है
बड़ी बैचेनी हो गई है
जैसे एक दुधारू भैंस
दुहने से पहले खो गई है
‘उलूक’ सोच में हैं तब से
खाली दिमाग को
अपने हिला रहा है
समझ में कभी भी
नहीं आ पाया जिसके
सोच रहा है
कुछ आ रहा है
कुछ आ रहा है
बहुत अच्छा हुआ
खबर चली गई है
और खबरची के
साथ ही गई है
खबर आ
भी जाती है
तब भी कहाँ
समझ में
आ पाती है
खबर कैसी
भी हो माहौल तो
वही बनाती है ।

चित्र साभार: www.pinterest.com

सोमवार, 7 सितंबर 2015

खबर है खबर रहे प्रश्न ना बने ऐसा कि कोई हल करने के लिये भी कहे

क्या है ये एक डेढ़
पन्ने के अखबार
के लिये रोज एक
तुड़ी मुड़ी सिलवटें
पड़ी हुई खबर
उसे भी खींच तान
कर लम्बा कर जैसे
नंगे के खुद अपनी
खुली टाँगों के
ना ढक पाने की
जद्दोजहद में
खींचते खींचते
उधड़ती हुई बनियाँन
के लटके हुऐ चीथड़े
आगे पीछे ऊपर नीचे
और इन सब के बीच में
खबरची भी जैसे
लटका हुआ कहीं
क्या किया जा सकता है
रोज का रोज रोज की
एक चिट्ठी बिना पते की
एक सफेद सादे पन्ने
के साथ उत्तर की
अभिलाषा में बिना टिकट
लैटर बाक्स में डाल कर
आने का अपना मजा है
पोस्टमैन कौन सा
गिनती करता है
किसी दिन एक कम
किसी दिन दो ज्यादा
खबर ताजा हो या बासी
खबर दिमाग लगाने
के लिये नहीं पढ़ने सुनने
सुनाने भर के लिये होती है
कागज में छपी हो तो
उसका भी लिफाफा
बना दिया जाता है कभी
चिट्ठी में घूमती तो रहती है
कई कई दिनों तक
वैसे भी बिना पते के
लिफाफे को किसने
खोलना है किसने पढ़ना है
पढ़ भी लिया तो कौन सा
किसी खबर का जवाब
देना जरूरी होता है
कहाँ किसी किताब में
लिखा हुआ होता है
लगा रह ‘उलूक’
तुझे भी कौन सा
अखबार बेचना है
खबर देख और
ला कर रख दे
रोज एक कम से कम
एक नहीं तो कभी
आधी ही सही
कहो कैसी कही ?

चित्र साभार: www.clipartsheep.com

गुरुवार, 8 जनवरी 2015

खबरची और खबर कर ना कुछ गठजोड़

जरूरत है एक
खबरची की
जो बना सके
एक खबर
मेरे लिये
और बंटवा दे
हर उस पन्ने
पर लिख कर
जो देश के
ज्यादातर
समझदार
लोगों तक
पहुँचता हो
खबर ऐसी
होनी चाहिये
जिसके बारे में
किसी को कुछ
पता नहीं हो
और जिसके होने
की संभावना
कम से कम हो
शर्त है मैं खबर
का राकेट छोड़ूंगा
हवा में और वो
उड़ कर गायब
हो जायेगा
खबर खबरची
फैलायेगा
फायदा
जितना भी
होगा राकेट
के धुऐं का
पचास पचास
फीसदी पी
लिया जायेगा
कोई नहीं पूछता
है खबर के बारे में
ज्यादा से ज्यादा
क्या होगा
बहस का एक
मुद्दा हो जायेगा
वैसे भी ऐसी चीज
जिसके बारे में
किसी को कुछ
मालूम नहीं होता है
वो ऐसी खबर के
बारे में पूछ कर
अज्ञानी होने का
बिल्ला अपने
माथे पर क्यों
लगायेगा
इसमें कौन सी
गलत बात है
अगर एक
बुद्धिजीवी
दूध देने वाले
कुत्तों का कारखाना
बनाने की बात
कहीं कह जायेगा
कुछ भी होना
संभव होता है
वकत्वय अखबार
से होते हुऐ
पाठक तक तो
कम से कम
चला जायेगा
कारखाना बनेगा
या नहीं बनेगा
किसको सोचना है
कबाड़ी अखबार
की रद्दी ले जायेगा
हो सकता है
आ जाये सामने से
फिर खबरची की
खबर भविष्य में
कहीं सब्जी की
दुकान में सामने से
जब सब्जी वाला
खबर के अखबार से
बने लिफाफे में
आलू या टमाटर
डाल कर हाथ
में थमायेगा
जरूरत है एक
खबरची की
जो मेरे झंडे को
लेकर एवरेस्ट पर
जा कर चढ़ जायेगा
ज्यादा कुछ
नहीं करेगा
बस झंडे को
एक एक घंटे के
अंतर पर
हिलायेगा ।

चित्र साभार: funny-pictures.picphotos.net

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