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बुधवार, 15 अप्रैल 2015

एक दिमाग कम खर्च कर के दिमाग को दिमागों की बचत कराता है

बुद्धिजीवी की एक
खासियत ये होती है
वो अपने दिमाग को
कम काम में लाता है
जानता है बचाना खर्च
होने से दिमाग को
एक समूह में उनके
एक समय में एक ही
अपने दिमाग को चलाता है
पता होता है चल रहा है
दिमाग किसका किस समय
उस समय बाकी सब का
दिमाग बंद हो जाता है
पढ़ना लिखना जितना
ज्यादा किया होता है जिसने
उसका दिमाग उतना
अपने को बचाना
सीख जाता है
सबसे ज्यादा दिमाग
बचाने का तरीका
सबसे बड़े स्कूल के
मास्टर को ही आता है
एक छोड़ता है राकेट
एक किसी ऐसी बात का
जिसके छूटते ही उसके
नहीं होने का आभास
सबको हो ही जाता है
कोई कुछ नहीं कहता है
हर कोई बंद कर दिमाग
राकेट के मंगल पर कहीं
उतरने के ख्यालों
में खो जाता है
पढ़ने पढ़ाने वाले
सबसे बड़े स्कूल के
मास्टरों के इस खेल को
देखकर छोटे मोटे स्कूलों
के मास्टरों का वैसे ही
दम फूल जाता है
मास्टरों के बंद दिमाग
होते देखकर पढ़ने लिखने
वाला मौज में आ जाता है
जब पिता ही चुप हो जाये
किसी समाज में
बेटे बेटियों के बोलने के लिये
क्या कुछ कहाँ रह जाता है
वैज्ञानिक सोच का ही
एक कमाल है यह भी
एक दिमाग बुद्धिजीवी का
कितने दिमागों का
फ्यूज इस तरह उड़ाता है
दिमाग ही दिमागी खर्च
बचा बचा कर इस तरह
बिना दिमाग का एक
नया समाज बनाता है ।

चित्र साभार: www.clipartpanda.com

शनिवार, 11 जनवरी 2014

राय देने में कहाँ कहता है कोई खर्चा बहुत ज्यादा ही होता है

कुछ ऐसा क्यों 
नहीं लिखता कभी 
जिसे एक गीत की 
तरह गाया जा सके 
तेरे ही किसी
अंदाज को
 
एक हीरो की तरह 
उस पर फिल्माया 
भी कभी जा सके 
रहने भी दीजिये 
इतना भाव भी
खाली मत बढ़ाइये 
लिखने के लिये 
लिखने वाले बहुत 
पाये जाते हैं यहा 
हजूर
हमें बख्श दीजिये
 
खजूर के पेड़ पर 
इस तरह तो ना 
मजबूर कर चढ़ाइये 
अब जब पहुँच ही 
गये हैं आप हमारी 
हिसाब लिखने 
की दुकान तक 
हमें लिखने से 
कोई मतलब नहीं 
रहता है कभी भी 
इस बात को थोड़ा 
समझते हुऐ
अब जाइये
 
श्रीमती जी भी परेशान 
किया करती थी बहुत

दिनों तक हमारे लिखने 
लिखाने को लेकर
उनसे भी बोलना 
पड़ा एक दिन इसी 
तरह से दुखी होकर 
समझा करो कभी 
हमारी भी मजबूरी 
भाग्यवान
थोड़ा सा
 
हमारी तरह होकर 
तुम तो सारा कूड़ा 
रसोई का कूड़ेदान में 
डालकर फारिग 
हो जाती हो 
कुछ ना कुछ 
कर धर कर 
हमसे कुछ तो 
होता नहीं कहीं भी 
फिलम भी अब 
बनती है हर कोई 
किसी ना किसी 
विलेन को ही लेकर 
वही निकलता है 
गली से अंत में 
देखने सुनने वालों 
का भगवान होकर 
गीत भी उसका 
लिखता वही है 
संगीत भी उसी का 
सुनाई देता है 
सब नाचते गाते हैं 
उसी को कंधों पर
अपने रख कर 
हीरो कहीं पिटता है 
कहीं बरतन उठाता 
हुआ दिखाई देता है 
गीत हीरो पर 
फिल्माया
गया हुआ
 
क्या आपको
अब भी
 
कहीं दिखाई
देता है
 
या समझ
लूँ मैं
 
इस बात
को इस तरह
 
की मुझ में
ही आपको
 
आज का कोई 
विलेन एक 
दिखाई देता है | 


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