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मंगलवार, 31 मार्च 2015

कोई नई कहानी नहीं अपना वही पुराना रोना धोना ‘उलूक’ आज फिर सुना रहा था

लाऊडस्पीकर से
भाषण बाहर
शोर मचा रहा था
अंदर कहीं मंच पर
एक नंगा शब्दों को
खूबसूरत कपड़े
पहना रहा था
अपनी आदत में
शामिल कर चुके
इन्ही सारे प्रपंचों को

रोज की पूजा में
एक भीड़ का
बड़ा हिस्सा
घंटी बजाने
प्रांंगण में ही बने
एक मंदिर की ओर
आ जा रहा था
कविताऐं शेर और
गजल से ढकने में
माहिर अपने पापों को
आदमी आदमी को
इंसानियत का पाठ
सिखा रहा था
एक दिन की बात
हो तो कही जाये
कोई नई बात है 
आज पता चला
फिर से एक बार
ढोल नगाड़ों के साथ
एक नंगा हमाम
में नहा रहा था
‘उलूक’ कब तक
करेगा चुगलखोरी
अपनी बेवकूफियों
की खुद ही खुद से
नाटक चालू था कहीं
जनाजा भी तेरे जैसों
का पर्दा खोल कर
निकाला जा रहा था
तालियांं बज रही थी
वाह वाह हो रही थी
कबाब में हड्डी बन कर
कोई कुछ नहीं फोड़
सकता किसी का
उदाहरण एक पुरानी
कहावत का पेश
किया जा रहा था
नंगों का नंगा नांंच
नंगो को अच्छी तरह
समझ में आ रहा था ।

चित्र साभार: pixshark.com

शनिवार, 22 नवंबर 2014

लिखता लिखता ही पढ़ना भी सीख लेगा

जिस दिन
सीख लेगा
लिखना
बता उस दिन
क्या लिखेगा
अभी बताने
में भी कोई
हर्ज नहीं है
कविता
लिखेगा
या फिर कोई
गजल
लिखेगा
तब तक
ऐसा वैसा
भी लिखेगा
वो भी चलेगा
लिखना सीखने
के लिये जो
भी लिखेगा
वही तो
एक दिन
लिखना
सिखाने
के लिये
भी लिखेगा
लिखना एक
अलग बात है
लिखने वाला
बस लिखेगा
पढ़ना एक
अलग बात है
पढ़ने वाला
बस पढ़ेगा
लिखना पढ़ना
साथ करने
की कोशिश
जो भी करेगा
ना लिख
पायेगा कुछ
ना ही पढ़ेगा
लिखना सीख
ले कुछ
लिख लिखा
कर कुछ
दिनों तक
लिखना
सीख लेगा
जब ‘उलूक’
पूरा का पूरा
आधा
कम से कम
पढ़ना भी
सीख लेगा ।

चित्र साभार: www.clipartof.com

गुरुवार, 5 जून 2014

कभी कुछ इस तरह भी कर लिया जाये

अब रोने चिल्लाने
पर कैसे गीत
या गजल
लिखी जाये
बस यूँ ही ऐसे ही
क्यों ना कुछ
रो लिया जाये
चिल्ला लिया जाये
वैसे भी कौन
पढ़ या गा रहा है
रोने चिल्लाने को
सब फालतू है
दिखाने को
बस ऐसे ही
जैसा है
रहने ही दिया जाये
कोई खरोंचने
में लगा हो
चिपकी हुई
कढ़ाई में
से मलाई
उसकी कुछ मदद
क्यों ना करने
को चला जाये
चाकू जंक लगा
साफ कर
चमका लिया जाये
अब हो रहा है
जो भी कुछ
नया तो नहीं
होने जा रहा
पुराने घाव को
धो पोछ कर
फिर से ढक
लिया जाये
बहुत कुछ
कहने से
कुछ नहीं
कहीं होने वाला
बस इतना कहने
के बाद जोर जोर से
गला फाड़ कर
हंस लिया जाये
‘उलूक’ बहुत
हो चुकी बकवास
चुपचाप क्यों ना
कहीं किसी और
को चाटने के
लिये अब यहाँ से
खिसक लिया जाये ।

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