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शुक्रवार, 9 दिसंबर 2016

बेवकूफ हैं तो प्रश्न हैं उसी तरह जैसे गरीब है तो गरीबी है

जब भी
कहीं
कोई प्रश्न
उठता है
कोई
ना कोई
कुछ ना
कुछ
कहता है

प्रश्न तभी
उठता है
जब उत्तर
नहीं मिलता है

एक ही
विषय
होता है
सब के
प्रश्न
अलग
अलग
होते हैंं

होशियार
के प्रश्न
होशियार
प्रश्न होते हैंं
और
बेवकूफ
के प्रश्न
बेवकूफ
प्रश्न होते हैं

होशियार
वैसे
प्रश्न नहीं
करते हैं
बस प्रश्नों
 के उत्तर
देते हैं

बेवकूफ
प्रश्न करते हैं
फिर
उत्तर भी
पूछते हैं
मिले हुऐ
उत्तर को
जरा सा
भी नहीं
समझते है

समझ
गये हैं
जैसे कुछ
का
अभिनय
करते हैं
बहस नहीं
करते हैं

मिले हुए
उत्तर के
चारों ओर
बस सर पर
हाथ रखे
परिक्रमा
करते हैं

समय भी
प्रश्न करता
है समय से
समय ही
उत्तर देता
है समय को

समय
होशियार
और
बेवकूफ
नहीं
होता है
समय
प्रश्नों को
रेत पर
बिखेर
देता है

बहुत सारे
रेत पर
बिखरे हुऐ
प्रश्न
इतिहास
बना देते हैं

रेत पानी में
बह जाती है
रेत हवा में
उड़ जाती है
रेत में बने
महल ढह
जाते हैं
रेत में बिखरे
रेतीले प्रश्न
प्रश्नों से ही
उलझ जाते हैं

कुछ लोग
प्रश्न करना
पसन्द करते हैं
कुछ लोग
उत्तर
के डिब्बे
बन्द करा
करते हैं

बेवकूफ
‘उलूक’
की आदत है
जुगाली करना
बैठ कर
कहीं ठूंठ पर
उजड़े चमन की
जहाँ हर तरफ
उत्तर देने वाले
होशियार
होशियारों
की टीम
बना कर
होशियारों
के लिये
खेतों में
हरे हरे
उत्तर
उगाते हैं

दिमाग
लगाने की
ज्यादा
जरूरत
नहीं है
देखते
रहिये
तमाशे 
होशियार
बाजीगरों के
घर में
बैठे बैठे

बेवकूफों के
खाली दिमाग
में उठे प्रश्न
होशियारों के
उत्तरों का
कभी भी
मुकाबला
नहीं करते हैं ।

चित्र साभार: Fools Rush In

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