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शनिवार, 2 मई 2015

सोच बदलेगी वहाँ से यहाँ आकर होती ही हैं ऐसी भी बहुत सारी गलतफहमियाँ

अब क्या
करे कोई
जिसकी कुछ
इस तरह की
ही होती हो
रोज की ही
आराधना
पूजा अर्चना
दिया बाती
फूल बताशे
छोड़ कर
करता हो
जो बस
मन ही मन में
कुछ कुछ
बुद्बुदा कर
कोशिश बनाने
की एक अनकही
कहानी और
करता हो उसी
अनहोनी
अकल्पनीय
कल्पना की
साधना
बिना किसी
हनुमान की
हनुमान चालीसा
के साथ होती हो
कुछ चैन कुछ
बैचेनी की कामना
छपने छपाने की
बात पर कर देता
हो मोहल्ले का
अखबार तक मना
कागज किताबें
डायरियां बिक
गई हों कबाड़ में
कबाड़ी को भी
रहता हो कुछ
ना कुछ कबाड़
मिलने की
आशा हर महीने
देखते ही लिखने
लिखाने वालों को
देता हो दुआ
जब भी होता
हो सामना
'उलूक' दिन में
उड़े आँख बंद कर
और रात में
कुछ खोलकर
नया कुछ ऐसा
या वैसा नहीं है
कहीं भी होना
एक ही बात है
मोहल्ले में हो
शहर में हो शोर
या फिर कुछ
चुपचाप लिख
लेना हो कुछ
कुछ यहाँ
कुछ वहाँ
किस लिये
होना है
अनमना ।


चित्र साभार: www.disneyclips.com

     

सोमवार, 28 अप्रैल 2014

बक दिया बहुत चुनाव अब करवा दिया जाये नहीं तो कोई कह देगा भाड़ में जाओ बाय बाय

तीन दशक के
दस प्रशाशक
बहुत किये होगें
विश्वविद्यालय से
बाहर नहीं कहीं
कभी भेज पाये
देश के
  चुनाव का
इतना बड़ा काम
मगर इस बार वाले
ही कुछ दिला पाये
बुरा सौदा नहीं है
एक आड़ू बेड़ू को
अगर चुटकी में
जोनल मजिस्ट्रेट
बना दिया जाये
आभारी हैं वो
कुछ काम के लोग
और कुछ गधे
जो चुनाव करवाने
के काम में कुछ
काम धाम करने
के लिये इसी बार
गये हैं काट छाँट
कर गये लगवाये
कुछ पहले ही
भेजे दिये गये
उसके प्रचार के लिये
कुछ बाद में
इसके प्रचार के लिये
जा रहे हैं बोल कर
पूरी छूट ले आये
तटस्थ होना बहुत
अच्छा होता है
पहली बार गधे भी
अपनी समझ में
कुछ घुसा पाये
चुनाव कार्यक्रम
सफल बनाने
के लिये सुबह
पहुँचने का निमंत्रण
जिला प्रशाशन से
पाकर 
हर्षित हुऐ
कालर खड़े कर
कमीज के चले
गये दौड़ लगाये
मत देना या
दे देना मत
इसको या उसको
की बहसों में भाग
लेने की बेकार
बातों में भाग
लगाते लगाते
वैसे भी कई
महीने हो आये
नये काम की
नई जगह पर
जाकर चुनाव
करवाने की किताब
चुनाव अधिकारी
के द्वारा गये
पढ़ाये और लिखाये
कुछ बात
समझ में आई
कापी में लिख लाये
उसमें से चलो
कुछ कुछ
यहाँ पर भी कह
ही दिया जाये
यज्ञ कर्मठ परीक्षा
दावा ध्यान पढ़े लिखे
परीक्षा नम्बर गलतफहमी
गलती त्रुटी सस्पेंशन
जैसे शब्द वाक्यों में
प्रयोग कर के
जो गये बताये
दिमाग वाले
बिना दिमाग वाले
सारे के सारे
सफेद और काले
ये अच्छी तरह
समझ पाये
पानी नहीं भी मिला
कोई बात नहीं
कुछ और पी लेना
चुनाव हो तो जाये
इतना भी नहीं
कर सकता है कोई
तो बेकार है अगर
लाईन लगवा के
पर्ची पर खिलवाये
गये कच्चे भात दाल
के लिये आभार
ही कह दिया जाये
कोई जीते कोई हारे
इधर को आये या
उधर को जाये
किसे मतलब है
चुनाव को होना है
चुनाव करवा दिया जाये
मत किस को
देना है तूने
उलूक
तेरी ऐसी की तैसी
तू भाड़ में जाये । 

मंगलवार, 25 मार्च 2014

अब उसे भी क्या समझना जिसे एक बेवकूफ तक समझता है

किसी के कुछ
कहे को समझने
लिये कहीं जाना
और जा कर
समझने की
कोशिश करना
समझ में आ
गया कुछ की
गलतफहमी हो
जाने को समझ कर
समझे हुऐ पर
कुछ कहने की
हिम्मत करना
सब के बस की
बात नहीं होती है
अपनी बात कहने
में ही बहुत जोर
लगाना पड़ता है
कम से कम
किसी एक समझने
वाले को कहे हुए को
समझने के लिये
उसके बाद कहीं से
बुलाना भी पड़ता है
कहने की आदत
हो जाने के बाद
कोई कहाँ कहीं
किसी के लिये
रुकता है
उसे तो बस
कह देना होता है
कोई फर्क किसी को
कहीं भी नहीं पड़ता है
कहता रहे कोई
ये तो इसकी
हमेशा की आदत है
कुछ भी नहीं
कर सकता है
इसलिये कुछ
ना कुछ कहीं भी
जा कर बक देता है
इस तरह के
लोगों से हर कोई
कन्नी काटता है
उसके नजदीक भी
नहीं फटकता है
ये बात तब और
महत्वपूर्ण हो
जाती है जब
किसी 
तरह के
किसी चीज के
मूल्याँकन करने वाले
दल के आने का
पता चलता है
जिसे किसी चीज के
बारे में एक भी सच
नहीं बताना होता है
जितना हो सके
उतना झूठ का
अँबार लगाना होता है
बहुत कुछ जो कहीं
भी नहीं होता है
वही और वही
बस बताना और
समझाना होता है
“उलूक” दूर रखना
होता है तेरे जैसे
समझने समझाने
वालों को हमेशा
जब भी कोई
पंडाल कोई मजमा
तेरे अपने ही
घर पर लगता है
समझ में आ गया
किसी को कुछ अगर
समझा कर
कोई ए कोई ए++ 
कोई बी कोई बी++
सोचने समझने के
बाद ऐसे ही
नहीं रखता है ।


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