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शनिवार, 28 फ़रवरी 2015

जो जैसा था वैसा ही निकला था गलती सोचने वाले की थी उसकी सोच का पैर अपने आप ही फिसला था

भीड़ वही थी
चेहरे वही थे
कुछ खास
नहीं बदला था
एक दिन इसी
भीड़ के बीच
से निकल कर
उसने उसको
सरे आम एक
चोर बोला था
सबने उसे कहते
हुऐ देखा
और सुना था
उसके लिये उसे
इस तरह से
ऐसा कहना
सुन कर बहुत
बुरा लगा था
कुछ किया
विया तो नहीं था
बस उस कहने
वाले से किनारा
कर लिया था
पता ही नहीं था
हर घटना की तरह
इस घटना से भी
जिंदगी का एक नया
सबक नासमझी का
एक बार फिर
से सीखना था
सूरज को हमेशा
उसी तरह सुबह
पूरब से ही
निकलना था
चाँद को भी हमेशा
पश्चिम में जा
कर ही डूबना था
भीड़ के बनाये
उसके अपने नियमों
का हमेशा की तरह
कुछ नहीं होना था
काम निकलवाने
के क्रमसंचय
और संयोजन को
समझ लेना इतना
आसान भी नहीं था
मसला मगर बहुत
छोटा सा एक रोज
के होने वाले मसलों
के बीच का ही
एक मसला था
आज उन दोनों का
जोड़ा सामने से ही
हाथ में हाथ
डाल कर
जब निकला था
कुछ हुआ था या
नहीं हुआ था
पता ही नहीं
चल सका था
भीड़ वही थी
चेहरे वही थे
कहीं कुछ हुआ भी है
का कोई भी निशान
किसी चेहरे पर
बदलता हुआ
कहीं भी नहीं दिखा था
‘उलूक’ ने
खिसियाते हुऐ
हमेशा की तरह
एक बार फिर
अपनी होशियारी
का सबक
उगलते उगलते
अपने ही थूक के साथ
कड़वी सच्चाई
की तरह
ही निगला था ।

चित्र साभार: davidharbinson.com

मंगलवार, 22 अक्तूबर 2013

कौन जानता है किस समय गिनती करना बबाल हो जाये

गिनती करना
जरूरी नहीं हैं
सबको ही आ जाये
कबूतर और कौऐ
गिनने को अगर
किसी से कह
ही दिया जाये
कौन सा बड़ा
गुनाह हो गया
अगर एक कौआ
कबूतर हो जाये
या एक कबूतर की
गिनती कौओं
मे हो जाये
कितने ही कबूतर
कितने ही कौऔं को
रोज ही जो देखता
रहता हो आकाश में
इधर से उधर उड़ते हुऐ
उससे कितने आये
कितने गये पूछना ही
एक गुनाह हो जाये
सबको सब कुछ
आना भी तो
जरूरी नहीं
गणित पढ़ने
पढ़ाने वाला भी
हो सकता है कभी
गिनती करना
भूल जाये
अब कोई
किसी और ज्ञान
का ज्ञानी हो
उससे गिनती
करने को कहा
ही क्यों जाये
बस सिर्फ एक बात
समझ में इस सब
में नहीं आ पाये
वेतन की तारीख
और
वेतन के नोटों की
संख्या में गलती
अंधा भी हो चाहे
भूल कर भी
ना कर पाये
ज्ञानी छोड़िये
अनपढ़ तक
का सारा
हिसाब किताब
साफ साफ
नासमझ के
समझ में
भी आ जाये !

मंगलवार, 14 अगस्त 2012

अब के तो छा जाना गलती मत दोहराना

अपने आस पास
गन्ने के खेत
जैसे उगे हुऎ
पता नहीं कितने
पर देखे जरूर
थे पिछली बार
बहुत सारे अन्ना
नतमस्तक
हो गया था
साथ में दुखी भी
हो गया था
कहीं भी किसी भी
खेत में नहीं
उग पाया था
बहुत झल्लाया था
इस बार
चांस हाथ से
नहीं जाने दूंगा
चाहे धरती
पलट जाये
मौका भुना
ही लूंगा
फिर से क्योंकी
लग रहा है कुछ
होने वाला है
सुगबुगाहट सी
दिख रही है साफ
पिछली बार के
कलाकारों में
सुना है जल्दी ही
इस बार वो रामदेव
हो जाने वाला है
अन्ना हो गये रामदेव
का समाचार भी
इन रामदेवों के
अपने अखबार का
संवाददाता इस बार भी
इनकी रोज आने वाली
खबर की जगह पर
ही देने वाला है
सोच कर दीजियेगा
अपनी खबर इन दिनो
आप भी जरा
आपकी खबर भी
इनकी खबर में
रोज की तरह मिलाकर
वो आप से मजे
भी लेने वाला है
बस एक सबक
सिखा गया अन्ना
इन अन्नाओं को
काम अपने रोज के
छोड़ के कोई भी
अन्ना यहां का
नहीं इस बार मैदान
में आने वाला है
पीछे से लंगड़ी
देने वाला है
गिराने वाला है
सामने से आकर
उठाने वाला है
रामदेव का मलहम
मुफ्त में दे के
जाने वाला है।

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