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बुधवार, 15 फ़रवरी 2012

सारे कुकुरमुत्ते मशरूम नहीं हो पाते हैं

जंगल में
उगते हैं
कुकुरमुत्ते
कोई भाव
नहीं देता है
उगते चले
जाते हैं

बिना खाद
पानी के
शहर में
सब्जी की
दुकान पर
मशरूम
के नाम पर
बिक जाते हैं
कुकुरमुत्ते
अच्छे भाव
के साथ
चाव से
खाते हैं
लोग बिना
किसी डर के
गिरगिट की
तरह रंग
बदल लेना
या फिर
कुकुरमुत्ता
हो जाना
होते नहीं
हैं एक जैसे
बहुत से
गिरगिट
रंग बदलते
चले जाते हैं
इंद्रधनुष
बनने की
चाह में
पर उन्हे
पता ही
नहीं चल
पाता है
कि वो कब
कुकुरमुत्ते
हो गये
कुकुरमुत्तों
की भीड़ में
उगते हुवे
मशरूम भी
नहीं हो पाये।

रविवार, 20 नवंबर 2011

रंग

आदमी भी
तो बदलता
है कई रंग
पर नहीं सुना
कभी उसे
किसी के द्वारा
बुलाते हुवे
'ऎ इन्द्र धनुष'
आज जब
वो पारंगत
हो चुका है
कई रंग
बदलने में
फिर भी
कहलाया जा
रहा है
केवल एक
'गिरगिट'।

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