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रविवार, 8 दिसंबर 2013

जरूरी जो होता है कहीं जरूर लिखा होता है

क्या ये जरूरी है
कि कोई महसूस करे
एक शाम की उदासी
और पूछ ही ले
बात ही बात में
शाम से कि वो
इतनी उदास क्यों है
क्या ये भी जरूरी है
कि वो अपने हिस्से की
रोशनी की बात कभी
अपने हिस्से के
अंधेरे से कर ही ले
यूं ही कहीं किसी
एक खास अंदाज से
शायद ये भी जरूरी नहीं
कर लेना दिन की धूप को
पकड़ कर अपनी मुट्ठी में
और बांट देना टुकड़े टुकड़े
फिर रात की
बिखरी चाँदनी को बुहारने
की कोशिश में देखना
अपनी खाली हथेली
में रखे हुऐ चंद
अधेरे के निशान
और खुद ही देखना
करीने से सजाने की
जद्दोजहद में कहीं
फटे कोने से निकला हुआ
खुद की जिंदगी का
एक छोटा सा कोना
कहाँ लिखा है
अपनी प्रायिकताओं से
खुद अपने आप जूझना
और अपने हिसाब से
तय करना
अपनी जरूरते
होती रहे शाम उदास
आज की भी और
कल की भी
बहुत कुछ होता है
करने और सोचेने
के लिये बताया हुआ
खाली इन बेकार की
बातों को ही क्यों है
रोज का रोज
कहीं ना कहीं
इसी तरह से नोचना !

गुरुवार, 28 जून 2012

दीवाने/बेगाने

चाँद
सोचना

चाँदनी
खोदना

तारों की
सवारी

फूलों पर
लोटना


तितलियों
को देख

खुश
हो जाना

मोरनियाँ
पास आयें

मोर
हो जाना

पंख फैलाना
नाच दिखाना

आँखे कहीं
दिख जायें

बिना देखे
कूद जाना

तैरना
आता हो

तब भी
डूब जाना


किसी और
को पिलाना

बहक खुद
ही जाना

जमाना
तो है ऎसे 

ही दीवानो
का दीवाना


लकड़ी की
सोचना

मकड़ियों
को देखना

सीधा कोई
मिल जाये

टेढ़ा हो जाना

मिट्टी तेल
की ढिबरी

से चाँद
तारे बनाना

जब तक
पडे़ नहीं

बैचेनी
दिखाना

पड़ी में
दो लात

ऊपर
से खाना

गधे की
सोचना

शुतुरमुर्ग
हो जाना


किसी के
भी फटे में

जाकर के
टांग अढ़ाना

किसकी
समझ में

आता है
ऎसों
का गाना

टूटे फूटे इन
बेगानों को

किसने है
मुँह लगाना।

सोमवार, 21 सितंबर 2009

जलन

चारों तरफ बज रही शहनाई है
मेरे घरोंदे में चाँदनी उतर आई है ।

पड़ोसी के चेहरे पे उदासी छाई है
लगता है 
उनको चाँद ने घूस खाई है ।

मेरे कुत्ते की जब से बड़ रही लम्बाई है
पड़ोसन बिल्ली के लिये टोनिक लाई है ।

कितनी मुश्किल से बात छिपाई है
लेकिन वो तो पूरी सी बी आई है ।

पंडित जी की बढ़ गयी कमाई है
बीबी ने दरवाजे पे मिर्ची लटकाई है ।

शनिवार, 19 सितंबर 2009

पैंतरे

चाँदनी में मिलने की बात
अब करने लगे हैं वो ।
जान गये हैं शायद
दिये से घबराने लगा हूँ मैं ।।


साँथ उड़कर समंदर पार
करने का वादा भी है ।
मेरे पर कटने की खबर
भी मिल गयी है उनको ।।


अपने गेसू मे उलझा के
आँखों में डुबोने को हाँ कह गये ।
जालिम ने महसूस कर लिया
मेरा खुद से उलझना शायद ।।


वो हँसते खिलखिलाते हैं
शहनाईयों सा अब ।
मेरे कानों मे अब तो
मेरी आवाज ही नही जाती ।।


सालों इसी बात का
इंतजार किया उसने ।
अब जाकर कहीं बरबादी
का नज़ारा लूंगी जीभर ।।

बुधवार, 16 सितंबर 2009

सब्र

गिरते मकान को चूहे भी छोड़ देते सभी ।
अब इस दिल में कोइ नहीं रहता यारो ।।

चार दिन की चाँदनी बन के आयी थी वो कभी ।
उन भीगी यादों को अब कहां सम्भालूं यारो ।।

खून से सींच कर बनाया था इस दिल को आशियां ।
अंधेरा मिटाने को फिर दिल जला दिया यारो ।।

अपने हालात पे अब यूं भी रोना नहीं आता ।
जब था रोशन ये मकां बहुत नाम था इसका यारो ।।

सजने सवरने खुशफहम रहने के दिन उनके हैं अभी ।
वो जन्नत में रहें दोजख से ये दिखता रहे यारो ।।

अपनी आहों से सवारूंगा फिर से ये मकां ।
तुम भी कुछ मदद कुछ दुआ करो यारो ।।

सोमवार, 14 सितंबर 2009

संवेदना

कमप्यूटर को
संवेदनशील
बनाना है ।
चाँदनी, खुश्बू
चूडियों की खनक,
पायल की झंकार
का प्रोग्राम
बनाना है।
दोस्ती, प्यार,
ममता की
फ्लोपी से
ही काम
चल जाए
नयी पीढ़ी को
बस इतना
ही तो
समझाना है ।

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