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रविवार, 12 अप्रैल 2015

जय हो जय हो कह कह कर कोई जय जय कार कर रहा था

पहले दिन की खबर
बकाया चित्र के साथ थी
पकड़ा गया था एक
सरकारी चिकित्सक
लेते हुऐ शुल्क मरीज से
मात्र साढ़े तीन सौ रुपिये
सतर्क सतर्कता विभाग के
सतर्क दल के द्वारा
सतर्कता अधिकारी था
मूँछों में ताव दे रहा था
पैसे कम थे पर खबर
एक बड़ी दे रहा था
दूसरे दिन वही
चिकित्सक था
लोगों की भी‌ड़ से
घिरा हुआ था
अखबार में चित्र
बदल चुका था
चिकित्सक था मगर
मालायें पहना हुआ था
न्यायधिकारी से
डाँठ खा कर
सतर्कता अधिकारी
खिसियानी हँसी कहीं
कोने में रो रहा था
ऐसा भी अखबार
ही कह रहा था
दो दिन की एक
ही खबर थी
लिखे लिखाये में
कुछ इधर का
उधर हो रहा था
कुछ उधर का
इधर हो रहा था
‘उलूक’ इस सब पर
अपनी कानी आँख से
रात के अंधेरे में
नजर रख रहा था
उसे गर्व हो रहा था
कौम में उसकी
जो भी जो कुछ
कर रहा था
बहुत सतर्क हो
कर कर रहा था
सतर्कता से
करने के कारण
साढ़े तीन सौ का
साढ़े तीन सौ गुना
इधर का उधर
कर रहा था
चित्र, अखबार,
उसके लोगों का
खबर के साथ
खबरची हमेशा
भर रहा था
सतर्क सतर्कता
विभाग के
सतर्क दल का
सतर्क अधिकारी
पढ़ाना लिखाना
सिखाने वालों के
पढ़ने पढ़ाने को
दुआ सलाम
कर रहा था
पढ़ने पढ़ाने के
कई फायदे में से
असली फायदे का
पता चल रहा था
कोई पाँव छू रहा था
कोई प्रणाम कर रहा था
ऊपर वाले का गुणगाँन
विदेश में जा जा कर
देश का प्रधान कर रहा था ।

चित्र साभार: www.clipartheaven.com

शनिवार, 1 फ़रवरी 2014

अच्छा होता है जब समझने वाली बात नहीं लिखी जाती है

बहुत सी बातें
कई बार किसी
खास मौके पर ही
समझ में आती हैं
कोई हादसा नहीं
हो पाया हो तो
समझने की जरूरत
भी नहीं रह जाती है
एक चिकित्सक के
दिये पर्चे पर जब
नजर जाती है
गोले बने हुऐ से
गोलियाँ खाने की
संंख्या और बारम्बारता
एक गधे के लिये
भी समझ लेने वाली
आसान सी एक
बात हो जाती है
बाकी दवाईयों को
समझने की जरूरत
ही कहाँ हो पाती है
दुकान से दवाईयों
के ऊपर भी गोले
बना के समझा 
ही दी जाती हैं
बहुत बार लगता है
समझ में कुछ
तो आना चाहिये
चिकित्सक महोदय
से पूछने पर बता
भी दी जाती हैं
क्यों होता होगा
ऐसा दिमाग में
जोर डालने की
बात हो जाती है
जब एक ही तरह
के शब्दों से बनी
माला दूसरे के
द्वारा उल्टा कर के
बना दी जाती है
किसने बनाई
किसके लिये बनाई
दोनो कैसे एक
जैसी हो जाती हैं
सही करता है
एक चिकित्सक
इस बात से बात
समझ में आती है
एक के द्वारा लिख
दी गई दवाई
दूसरे को पता भी
नहीं चल पाती है
बहुत अच्छा करते हैं
कुछ लोग कुछ
ऐसा ही लिखकर
जिसे देख कर उसे
दुबारा छाप लेने की
सोच कही और भी
पैदा नहीं हो पाती है ।

रविवार, 3 नवंबर 2013

एक बच्चे ने कहा ताऊ मोबाइल पर नहीं कुछ लिखा

अपने पास है नहीं
भाई ऐसी चीज पर
लिखने को
कह जाता है
अभी तक पता नहीं
हाथ ही में क्यों है
दिमाग के अंदर ही
क्यों नहीं फिट कर
दिया जाता है
मर जायेगा
अगर नहीं पायेगा
हर कोई ऐसा जैसा
ही दिखाता है
छात्र छात्राओं की
कापी पैन और
किताब हो जाता है
पंडित मंत्र
पढ़ते पढ़ते
स्वाहा करना ही
भूल जाता है
पढ़ाना शुरु बाद
में होता है शिक्षक
कक्षा के बाहर
पहले चला जाता है
लौट कर आने
तक समय ही
समाप्त हो जाता है
मरीज की सांस
गले में अटकाता है
चिकित्सक आपरेशन के
बीच में बोलना जब
शुरु हो जाता है
बड़ी बड़ी मीटिंग होती है
कौन कितना बड़ा आदमी है
घंटी की आवाज से ही
पता चल जाता है
टैक्सी ड्राइवर मोड़ों पर
दिल जोर से धड़काता है
आफिस के मातहत को
साहब का नंबर साफ
बिना चश्में के दिख जाता है ‌‌
जवाब नहीं देना चाहता है
जेब में होता है पर
घर छोड़ के आया है
कह कर चला जाता है
कामवाली बाई से
बिना बात किये
नहीं रहा जाता है
बर्तनो में बचा साबुन
खाने को जैसे
मुंह के अंदर ही
धोना चाहता है
सड़क पर चलता
आदमी एक सिनेमाघर
अपना खुद हो जाता है
सब की बन रही होती है
अपनी ही फिल्म
दूसरे की कोई नहीं
देखना चाहता है
बहुत काम की चीज है
सब की एक
राय बनाता है
होना अलग बात है
नहीं होना
ज्यादा फायदेमंद
बस एक गधे को
ही नजर आता है
धोबी के पास होने
पर भी वो बहुत
खिसियाता है
गधा खुश हो कर
बहुत मुस्कुराता है
धोबी ढूँढ रहा था
बहुत ही बेकरारी से
जब कोई आकर
उसे बताता है
इससे भी लम्बी
कहानी हो सकती है
अगर कोई
मोबाइल पर
कुछ और भी
लिखना चाहता है ।

सोमवार, 5 अगस्त 2013

आज एक शख्सियत

डा0 पाँडे देवेन्द्र कुमार
पेशे से चिकित्सक कम
एक समाज सेवक
अधिक हो जाते है
दवाई कम खरीदवाते हैं
शुल्क महंगाई के हिसाब
से बहुत कम बताते हैं
लगता है अगर उनको
गरीब है मरीज उनका
मुफ्त में ही ईलाज
कर ले जाते हैं
बहुत ही कम
होती है दवाईयां
और लोग ठीक
भी हो जाते हैं
पछत्तर की उम्र में
खुश रहते है और
मुस्कुराते है
सोच को पोसिटिव
रखने के कुछ उपाय
भी जरूर बताते हैं
इतना कुछ है
बताने को पर
पन्ने कम हो जाते हैं
काम के घंटों में
मरीजों में बस
मशगूल हो जाते हैं
बहुत से होते हैं
प्रश्न उनके पास
जो मरीज से उसके
रोग और उसके
बारे में पूछे जाते है
संतुष्ट होने के बाद
ही पर्चे पर कलम
अपनी चलाते हैं
बस जरूरत भर
की दवाई ही
थोडी़ बहुत
लिख ले जाते हैं
कितने लोग
होते हैं उनके जैसे
जो अपने पेशे से
इतनी ईमानदारी के
साथ पेश आते हैं
“हिप्पौक्रेटिक ओथ”
का जीता जागता
उदाहरण हो जाते हैं
काम के घंटो के
बाद भी उर्जा
से भरे पाये जाते हैं
बहुत से विषय
होते हैं उनके पास
किसी एक को
बहस में ले आते हैं
आज कह बैठे
ब्रेन तैयार जरूर
कर रहे हैं आप
क्योंकि आप
लोग पढा़ते हैं
ब्रेन के साथ साथ
क्या दिल की
पढ़ाई भी कुछ
करवाते हैं
दिल की पढ़ाई
क्या होती है
पूछने पर समझाते हैं
दिमाग सभी का
एक सा हम पाते हैं
उन्नति के पथ पर
उससे हम चले जाते हैं
समाज के बीच में
देख कर व्यवहार
दिल की पढा़ई
की है या नहीं का
अंदाज हम लगाते हैं
जवाब इस बात का
पढ़ाने वाले लोग
कहाँ दे पाते हैं
शिक्षा व्यवस्था आज
की दिमाग से नीचे
कहाँ आ पाती है
दिल की पढा़ई
कहीं नहीं हो रही है
बच्चों के सामाजिक
व्यवहार से ये
कलई खुल जाती है
यही बात तो
डाक्टर साहब
बातों बातों में
हम पढ़ाने वालों
को समझाना चाहते हैं |

( http://champanaulaalmorauk.blogspot.in/ )

सोमवार, 21 मई 2012

चोरवा विवाह और मास्टर

आमीरखान का
धारावाहिक
सत्यमेव जयते
हम नहीं भी देखते
दूर दर्शन का डब्बा
घर पर कपड़े से ढक
कर जरूर हैं रखते
साथियों के बीच हो
रही चर्चा से पर क्या
कह कर बचते
कल के साप्ताहिक
अंक का एक पहलू
रहा चोरवा विवाह
जिसको सुन सुन कर लोग
भर रहे थे आह पर आह
अजब गजब का किस्सा
बताया जा रहा था कि
देश के कुछ इलाकों में
होनहार बुद्धिमान वरों को
बंदूक की नोक पर उठवा
लिया जाता है
उसके बाद किसी एक कन्या
से उसका जबरदस्ती विवाह
भी करा दिया जाता है
प्रशाशक अभियंता चिकित्सक
प्राथमिकता से उठवाये जाते है
उसके बाद धमकी के देकर
वधू के साथ उसके घर
छोड़ दिये जाते हैं
वैसे तो होता क्या है
विवाह तो विवाह होता है
ऎसे होता है या वैसे होता है
किसी को भी इस किस्से में
मजा नहीं आ रहा था
तभी किसी ने एक नयी
बात वहां पर बताई
जिसको सुन कर सारे
चर्चाकारों के चेहरे पर
अच्छी सी मुस्कान आई
अब तो कभी कभी
मास्टरों को भी उठवा
लिया जाता है
उनका भी चोरवा विवाह
करवा दिया जाता है
इस बात से पता चला
मास्टर भी अब तरक्की
के रास्ते पर आ रहा है
कुछ लोकप्रियता इस तरह
से वो भी पा जा रहा है
सम्मानित लोगों के साथ
उसको भी कभी कभी
उठा लिया जा रहा है
चलो शादी के बाजार में
बड़े लोगों के बीच
कुछ कीमत कोई तो
उसकी भी लगा रहा है।

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