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सोमवार, 8 फ़रवरी 2016

श्रद्धांजलि अविनाश जी वाचस्पति

एक चिट्ठाकार
का चले जाना
कोई नयी बात
नहीं होती है
सभी जाते हैं
जाना ही होता है
चिट्ठेकार का
कोई बिल्ला
ना आते समय
चिपकाया जाता है
ना जाते समय
कुछ चिट्ठेकार
जैसा बताने वाला
चिपकाया हुआ
उतारा ही जाता है
तुम भी चल दिये
चिट्ठे कितना रोये
पता नहीं
चिट्ठों में दिखता भी
नहीं है चिट्ठों की
खुशी गम हंसना या रोना
कुछ चिट्ठे कम हो जाते हैं
कुछ चिट्ठे गुम हो जाते हैं
कुछ गुमसुम हो जाते हैं
विश्वास होता है किसी को
कि ऐसा ही कुछ होता है
इसी विश्वास के कारण
निश्वास भी होता है
आना जाना खोना पाना
तो लगा रहता है
तेरे आने के दिन
क्या हुआ पता नहीं
चिट्ठों का इतिहास जैसा
अभी किसी चिट्ठेकार
ने कहीं लिख दिया हो
ऐसा भी दिखा नहीं
जाने के दिन टिप्पणी
नहीं भी मिलेगी तो भी
श्रद्धांजलि जगह जगह
इफरात से एक नहीं
कई बार चिट्ठे में ही नहीं
कई जगह दीवार
दर दीवार मिलेगी
बहुत सारे
चिट्ठेकारों में से एक
अब बहुत बड़ा कह लूँ
कम से कम जाने के बाद
तो बड़ा और बड़े के आगे
बहुत लगा लेना
जायज हो ही जाता है
दुनियाँ की यादाश्त
वैसे भी बड़ी बड़ी बातों
को थोड़ी देर तक जमा
करने की होती है
चिट्ठे चिट्ठाकारी
चिट्ठाकार जैसा
बहुत सारा बहुत कुछ
गूगल में ही गडमगड
होकर गजबजा जाता है
‘उलूक’ तू भी आदत
से बाज नहीं आ पाता है
तुझे और तेरी उलूकबाजी
को उड़ने का हौसला
देने वाले के जाने के
दिन भी तुझसे कुछ
उलटा सीधा कहे
बिना नहीं रहा जाता है
‘अविनाश जी वाचस्पति’
अब नहीं रहे इस दुनियाँ में
थोड़ी देर के लिये मौन रहकर
श्रद्धा से सर झुका कर
श्रद्धांजलि देने के लिये
दोनो हाथ आकाश की
ओर क्यों नहीं उठाता है ।

चित्र साभार: nukkadh.blogspot.com

गुरुवार, 19 फ़रवरी 2015

ब्लागर होने का प्रमाणपत्र कहाँ मिल पायेगा कौन बतायेगा

चिट्ठाकार कौन है
कौन बतायेगा
खुद को समझने
लगे कोई यूँ ही
तो क्या
किया जायेगा
किसी को तो
बताना ही पढ़ेगा
या हर कोई यहाँ
बेलगाम हो जायेगा
बपौती मेरी नहीं है
मुझे मालूम है
पर सुनने में बुरा
सबसे पहले उसे
ही लगेगा
जो होगा नहीं और
इसी बात को लेकर
बात ही बात में
बड़बड़ायेगा
टिप्पणी एक
बहुत खतरनाक
चीज है
किसे पता है कौन देगा
और कहाँ दे जायेगा
जमघट होता है
दिखता है क्यों होता है
समझ में किसके
आ पायेगा
ब्लागर की ब्लागरी
का भूत कौन
उतार पायेगा
तूने कह तो दिया
सब सतह में है
तैरता हुआ जैसे
तेरे कहने पर
कौन मुहर लगायेगा
चिट्ठाकारी की इंदीरा
कौन होगी कौन मोदी
अपने को बतायेगा
‘उलूक’ तू यहाँ क्यों है
 तेरी समझ में
ना आने वाला है
ना आ पायेगा
तुझे तो बस फैलाना है
कहीं ना कहीं कुछ कूड़ा
डस्टबिन सरकारी
किसी सरकार का
तुझे कभी भी
उपलब्ध नहीं हो पायेगा
लिखता रह कुछ भी
कभी भी कहीं भी
बिना किसी प्रमाणपत्र
के तू कभी एक
ब्लागर नहीं हो पायेगा ।

 चित्र साभार: whatsupaggiehort.blogspot.com

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