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शुक्रवार, 2 जून 2017

चोर चोर चिल्लाना शगुन होता है फुसफुसाना ठीक नहीं माना जाता है

महीना
बदलने से
किसने
कह दिया

लिखना
बदल
जाता है

एक
महीने में
पढ़ लिख
कर कहाँ
कुछ नया
सीखा
जाता है

खुशफहमी
हर बार ही
बदलती है
गलतफहमी में

जब भी
एक पुराना
जाता है
और
कोई नया
आता है

कोई तो
बात होती
ही होगी
फर्जियों में

फर्जियों
का पुराना
खाता बिना
आवेदन किये
अपने आप
नया हो
जाता है

कान से
होकर
कान तक
फिसलती
चलती है
फर्जीपने के
हिसाब की
किताबें

फर्जियों
की फर्जी
खबर पर
सीधे सीधे
कुछ
कह देना
बदतमीजी
माना जाता है

बाक्स
आफिस
पर
उछालनी
होती है
फिलम
अगर

बहुत
पुराना
नुस्खा है
और
आज भी
अचूक
माना
जाता है

हीरो के
हाथ में
साफ साफ
मेरा बाप
चोर है
काले रंग में
सजा के
लिखा
जाता है

‘उलूक’
चिड़ियों की
खबरों में भी
कभी ध्यान
लगाता थोड़ा
सा भी  अगर

अब तक
समझ चुका
होता शायद

तोते को
कितना भी
सिखा लो
चोर चोर
चिल्लाना

चोरों के
मोहल्ले में
तो इसी
बात को
कुर्सी में
बैठने का
शगुन माना
जाता है ।

चित्र साभार: Clipart Panda

मंगलवार, 27 अक्तूबर 2015

आ जाओ अलीबाबा फिर एक बार खेलने के लिये चोर चोर

रोज जब चोरों से
सामना होता है
अलीबाबा तुम
बहुत याद आते हो
सारे चोर खुश
नजर आते हैं
जब भी चोर चोर
खेल रहे होते हैं
और जोर जोर से
चोर चोर चिल्लाते हैं
चोर अब चालीस
ही नहीं होते हैं
मरजीना अब
नाचती भी नहीं है
अशर्फियाँ तोलने
के तराजू और
अशर्फियाँ भी
अब नहीं होते हैं
खुल जा सिमसिम
अभी भी कह रहे हैं
लोग खड़े हैं चट्टानों
के सामने से
इंतजार में खुलने के
किसी दरवाजे के
अलीबाबा बस एक
तुम हो कि दिखाई
ही नहीं देते हो
आ भी जाओ
इससे पहले हर कोई
निशान लगाने लगे
दरवाजे दरवाजे
इस देश में और
पैदा होना शुरु हों
गलतफहमियाँ
लुटने शुरु हों
घर घर में ही
घर घर के लोग
डर अंदर के फैलने
लगें बाहर की तरफ
मिट्टी घास और पेड़
पानी बादल और
काले सफेद धुऐं में भी
रहम करो ले आओ
कुछ ऐसा जो ले पाये
जगह खुल जा
सिमसिम की
और पिघलना शुरु
हो जायें चट्टाने
बहने लगे वो सब
जो मिटा दे सारे
निशान और पहचान
सारी कायनात
एक हो जाये और
समा जाये सब कुछ
कुछ कुछ ही में
आ भी जाओ
अलीबाबा
इस से पहले की
देर हो जाये और
‘उलूक’ को नींद
आ जाये एक नये
सूरज उगने के समय ।

चित्र साभार: www.bpiindia.com

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