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शुक्रवार, 15 फ़रवरी 2013

लिखा क्या है से क्या होता है किसने लिखा है जब तक पता नहीं होता है

एक आदमी
लिखता है
कुछ पागल
का जैसा
जो वो खुद
भी समझ
नहीं पाता है
आदमी आदमी
की बात होती है
इसका लिखा
बहुत से आदमियों
को बिना पढे़
भी समझ में
आ जाता है
हर आदमी
उसके लिखे
पर कुछ ना
कुछ जरूर
कह जाता है
एक पागल
लिख जाता है
आदमी जैसा कुछ
पता नहीं कैसे
कभी कहीं पर
ना कोई आता है
ना कोई जाता है
कुछ लिखना तो
रही दूर की बात
गलती से भी
कोई देखना भी
नहीं चाहता है
पागल को कोई
फर्क नहीं पड़ता
कोई आये कोई जाये
ना पढे़ ना कुछ
लिख कर जाये
लेकिन आदमी
अपने लिखे पर
गिनता है
पागलों की
संख्या भी
और दिखाता है
आदमी ही
बस आये
एक दिन
गलती से
पागल का नाम
बडे़ आदमियों
की सूची में
छपा हुआ
आ जाता है
उस दिन
पागल अपने
बाल नोचता
हुआ दिख
जाता है
उसे दिखता है
उसके लिखे
हुऎ पर
हर आदमी
कुछ ना कुछ
जरूर लिख
के जाता है | 

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