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बुधवार, 25 मई 2016

नोच ले जितना भी है जो कुछ भी है तुझे नोचना तुझे पता है अपना ही है तुझे सब कुछ हमेशा नोचना

कहाँ तक
और
कब तक
नंगों के
बीच में
बच कर रहेगा
आज नहीं
कल नहीं
तो कभी
किसी दिन
मौका
मिलते ही
कोई ना
कोई धोती
उतारने
के लिये
खींच लेगा
कुछ अजीब
सा कोई
रहे बीच
में उनके
इतने दिनों
तक आखिर
कब तक
इतनी
शराफत से
बदतमीजी
कौन ऐसी
यूँ सहेगा
शतरंज
खेलने में
यहाँ हर
कोई है
माहिर
सोचने
वाले प्यादे
को कब
तक कौन
यूँ ही
झेलता
ही रहेगा
कुत्ता खुद
आये पट्टा
डाल कर
गले में
अपने
एक जंजीर
से जुड़ा
कर देने
मालिक के
हाथ में
ऐसा कुत्ता
ऐसा मालिक
आज गली
गली में
इफरात
से मिलेगा
फर्जीपने
की दवाई
बारकोड
ले कर
आ रहे
हैं फर्जी
जमाने के
उस्ताद लोग
फर्जी आदमी
की सोच में
बारकोड
लगा कर
दिखाने को
कौन क्या और
किससे कहेगा
‘उलूक’ आज
फिर नोच ले
जितना भी
नोचना है
अपनी
सोच को
उसे भी
पता है
तू जो भी
नोचेगा
अपना ही
अपने आप
खुद ही नोचेगा ।


चित्र साभार: worldartsme.com

सोमवार, 4 फ़रवरी 2013

नया सीख कर आ ना कहना कुछ नहीं बचा

बहुत से मदारी
ताजिंदगी एक
ही बंदर से
काम चलाते हैं
इसी लिये
जमाने की
दौड़ में बस
यूँ ही पिछड़ते
चले जाते हैं
मेरा मदारी
भी सुना है
अब समझदारी
कहीं से सीख
के आ रहा है
कहते सुना
मैने उसे अब
मेरे नाच में
मजा नहीं
आ रहा है
वो एक नये
बंदर को ट्रेनिंग
देने चुपचाप
कहीं कहीं
कभी कभी
आ जा रहा है
जंजीर और
रस्सियों को
करने वाला
वो दरकिनार है
जमाना कब से
वाई फाई का
हुआ जा रहा है
उसकी अक्ल में
अब ये बहुत
अच्छी तरह से
घुस पा रहा है
रस्सी से तो
एक समय में
एक ही बंदर
को नचाया
जा रहा है
बंदर भी दिख
जा रहा है
रस्सी को भी
वो छुपा नहीं
पा रहा है
पर ई-दुनियाँ में
देखिये कितना
मजा आ रहा है
सब कुछ
पर्दे के पीछे ही
चला जा रहा है
बंदर और मदारी
दोनो का
एक साथ दीदार
हुआ जा रहा है
लेकिन किसने
मदारी बदल दिया
और किसके पास
नया बंदर
आ रहा है
इसका अंदाज
कोई भी नहीं
लगा पा रहा है
इन सब के बीच
गौर करियेगा जरा
मेरा सीखा
सिखाया हुआ नाच
कितनी बेदर्दी से
डुबोया जा रहा है
दिमाग वालों को कम
देखने वालों को
ज्यादा बारीकी से
ये सब समझ में
आ जा रहा है ।

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