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शनिवार, 7 जून 2014

लट्टू को घूमना होता है यहाँ होता है या वहाँ होता है

एक जमघट
के लट्टू का
निकल कर
कुछ दिन
किसी और जगह
दूसरे जमघट में
जा कर घूम लेना
देख लेना एक नई
भीड़ के तौर तरीके
अच्छा होता है
कुछ देर के
लिये ही सही
लट्टू को जैसे कुछ
फुरसत मिल जाती है
सोचने से नहीं
घूमने से
वैसे भी लट्टू कुछ
नहीं सोचता है
यहाँ होता है या
वहाँ होता है
लट्टू बने होते हैं
बस और बस
घूमने के लिये
रुके हुऐ लट्टू
अच्छे नहीं लगते
लट्टू को घूमते देखना
लट्टुओं को बहुत
पसंद आता है
लट्टू घूमता रहे
सामने सामने
पता रहता है
किधर से घूमता हुआ
किधर चला जाता है
परेशानी तब शुरु होती है
जब एक भीड़ के लिये
नाचने वाला लट्टू
कुछ देर के लिये
आँखों से ओझल
हो जाता है
बैचेनी शुरु होती है
बढ़ती है और
रहा नहीं जाता है
लट्टुओं को बहुत
राहत मिलती है
लट्टू जब लौट
कर आता है
अपने पुराने
लट्टुओं के बीच और
घूमना शुरु हो जाता है
जैसे हमेशा घूमता है
लट्टु लट्टुओं के लिये
रोज के अपने
जाने पहचाने
लट्टुओं के बीच ।

सोमवार, 23 दिसंबर 2013

आम में खास खास में आम समझ में नहीं आ पा रहा है

आज का नुस्खा
दिमाग में आम
को घुमा रहा है
आम की सोचना
शुरु करते ही
खास सामने से
आता हुआ नजर
आ जा रहा है
कल जब से
शहर वालों को
खबर मिली कि
आम आज जमघट
बस आमों में आम
का लगा रहा है
आम के कुछ खासों
को बोलने समझाने
दिखाने का एक मंच
दिया जा रहा है
खासों के खासों का
जमघट भी जगह
जगह दिख जा रहा है
जोर से बोलता हुआ
खासों का एक खास
आम को देखते ही
फुसफुसाना शुरु
हो जा रहा है
आम के खासों में
खासों का आम भी
नजर आ रहा है
टोपी सफेद कुर्ता सफेद
पायजामा सफेद झंडा
तिरंगा हाथ में एक
नजर आ रहा है
वंदे भी है मातरम भी है
अंतर बस टोपी में
लिखे हुऐ से ही
हो जा रहा है
“उलूक” तो बस
इतना पता करना
चाह रहा है
खास कभी भी
नहीं हो पाया जो
उसे क्या आम में
अब गिना जा रहा है ।

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