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गुरुवार, 24 सितंबर 2015

लिंगदोह कौन है ? पता करवाओ

लिंगदोह कौन है
है अभी कि नहीं है
होगा कितने होते हैं
ये भी कोई होता होगा
शासन को पता नहीं
दुश्शासन को पता नहीं
अनुशासन कुशासन
शासन प्रशासन रहने दो
आसन करो
योग करो
भोग मत करो
अच्छा सोचो
अच्छा देखो
कुछ गलत हो
रहा हो तो
जब तक होये
तब तक
मत देखो
जब हो जाये
तब सब आ
आ कर देखो
हल्ला गुल्ला
सुनो तो
सो जाओ
शांति होने
के बाद
मुँह धो के
पोछ के
मूँछों को
घुमाओ
अब हर जगह
थाने हों और
थानेदार हो
ऐसी सोच
मत बनाओ
कुर्सियाँ बैठने
के लिये होती हैं
बैठ जाओ
गुस्सा दिखाओ
एक दो
अच्छे भले
सीधे साधे
को डंडा
मार के
चूट जाओ
लिंगदोह
कौन है
कोई पूछ
रहा है क्या
किसी से ?
बेकार की बातें
बेकार जगह पर
बेकार में
मत फैलाओ
खबर देने
की जरूरत
अभी से नहीं है
खबरची को
साफ सफाई
रंग चूना
करने के
बाद ही
बुलाओ
उसी को
बुला कर
उसी से
किसी से
पुछवाओ
लिंगदोह
के बारे में
पता कर
उसे नोटिस
भिजवाओ
आओ मिल
बाँट कर चाय
समोसे खाओ
बिल थानेदार
के नाम
कटवाओ
शासन के
जासूसों के
आँख में
घोड़ों के
आँख की
पट्टियाँ
दोनो ओर
से लगवाओ
सामने से हरी
घास दिखवाओ
सब कुछ चैन
से है बताओ
बैचेनी की
खबरों को
घास के
नीचे दबवाओ
‘उलूक’ की
मानो और
कोशिश करो
लिंगदोह के लिये
दो गज जमीन का
इंतजाम करवाओ
पर पहले पता
तो करवाओ
लिंगदोह कौन है ?

चित्र साभार: www.christianmessenger.in

मंगलवार, 5 मई 2015

क्यों होता है कौन जानता है लेकिन होता है

भावुक होना
गुण नहीं है प्यारे
एक अवगुण है
समझा कर
अरे कहीं लिखा
हुआ नहीं है तो क्या
किसने कह दिया
हर बात को लिख देना
भी जरूरी होता है
ये भी जरूरी नहीं है
लिखा गया ही
सच ही होता है
भाई जमीन के
नींचे ही कुआँ होता है
अब कुआँ तो
सब ही खोदते हैं
कैसे खोदा गया
क्यों खोदा गया
ये सब पूछना
जरूरी नहीं होता है
सब को दिखता है
अपने अपने
हिसाब का पानी
सब को पता होता है
उसका पानी
कितना पानी
और कहाँ होता है
भावुकता कहाँ
काम आती है
हर किसी को
पता होता है
हर कोई जानता है
भाव भावुकता का
अब लिखे हुऐ की
बात की बात सुन
कहीं कुछ लिख देने से
कुछ नहीं होता है
सरकारी आदेशों को
पढ़ने समझने का
अलग अलग
अंदाज होता है
सरकारी आदेश
लिखा ही इस तरह
से जाता है जैसे
किसी पानी भरने के
बर्तन में नीचे से
एक बहुत बड़ा
छेद होता है
इस देश में
इन छेदो को
बनाने और काम में
लाने वालों की
कमी नहीं होती है
हर छेद माफिया के
खून का रंग भी
सफेद होता है
सारे सफेद रंगी खून
वालों की ना जात होती है
ना ही कोई मजहब होता है
ना ही कोई देश होता है
ऐसे सारे लोगों को
भावुक हो जाने वाली
किसी भी चीज से
परहेज होता है
‘उलूक’ कभी तो समझ
लिया कर अपने आस पास
के माहौल को देखकर
तुझे देखते ही सबके
चेहरे पर छपा क्यों
हमेशा एक
औरंगजेब होता है ।

चित्र साभार: printablecolouringpages.co.uk

रविवार, 26 अक्तूबर 2014

कहीं कोई किसी को नहीं रोकता है चाँद भी क्या पता कुछ ऐसा ही सोचता है

भाई अब चाँद
तेरे कहने से
अपना रास्ता
तो बदलेगा नहीं
वहीं से निकलेगा
जहाँ से निकलता है
वहीं जा कर डूबेगा
जहाँ रोज जा
कर डूबता है
और वैसे भी
तू इस तरह से
सोचता भी क्यों है
जैसा कहीं भी
नहीं होता है
रोज देखता है
आसमान के
तारों को
उसी तरह
टिमटिमातें हैं
फिर भी तुझे
चैन नहीं
दूसरी रात
फिर आ जाता है
छत पर ये सोच कर
कि तारे आज
आसमान के
किनारे पर कहीं होंगे
कहीं किनारे किनारे
और पूरा आसमान
खाली हो गया होगा
साफ साफ दिख
रहा होगा जैसे
तैयार किया गया हो
एक मैदान कबड्डी
के खेल के लिये
फिर भी सोचना
अपने हिसाब से
बुरा नहीं होता है
ऐसा कुछ
होने की सोच लेना
जिसका होना
बहुत मुश्किल भी
अगर होता है
सोचा कर
क्या पता किसी दिन
हो जाये ऐसा ही कुछ
चाँद आसमान का
उतर आये जमीन पर
तारों के साथ
और मिलाये कहीं
भीड़ के बीच से
तुझे ढूँढ कर
तुझसे हाथ
और मजाक मजाक
में कह ले जाये
चल आज से तू
चाँद बन जा
जा आसमान में
तारों के साथ
कहीं दूर जा
कर निकल जा
आज से उजाला
जमीन का जमीन
के लिये काम आयेगा
आसमान का मूड
भी कुछ बदला
हुआ देख कर
हलका हो जायेगा ।

चित्र साभार: www.dreamstime.com

मंगलवार, 24 दिसंबर 2013

पानी से अच्छा होता अगर दारू पर कुछ लिखवाता

हर कोई तो पानी
पर लिख रहा है
अभी अभी का
लिखा हुआ पानी पर
अभी का अभी उसी
समय जब मिट रहा है
तुझे ही पड़ी है
ना जाने क्यों
कहता जा रहा है
पानी सिमट रहा है
जमीन के नीचे
बहुत नीचे को
चला जा रहा है
पानी की बूंदे
तक शरमा रही हैं
अभी दिख रही हैं
अभी विलुप्त
हो जा रही हैं
उनको पता है
किसी को ना
मतलब है ना
ही शरम आनी है
सुबह सुबह की
ओस की फोटो
तू भी कहीं लगा
होगा खींचने में
मुझे नहीं लगता
किसी और को
पानी की कहीं भी
याद कोई आनी है
इधर आदमी लगा है
ईजाद करने में
कुछ ऐसी पाईप लाइने
जो घर घर में जा कर
पैसा ही पैसा बहाने
को बस रह जानी हैं
तू भी देख ना कहीं
पैसे की ही धार को
हर जगह आजकल
वही बात काम में
बस किसी के आनी है
पानी को भी कहाँ
पड़ी है पानी की
अब कोई जरूरत
आँखे भी आँखो में
पानी लाने से
आँखो को ही परहेज
करने को जब कहके
यहाँ अब जानी हैं
नल में आता तो है
कभी कभी पानी
घर पर नहीं आता है
तो कौन सा गजब
ही हो जाना है
बस लाईनमैन की
जेब को गरम
ही तो करवाना है
तुरंत पानी ने
दौड़ कर आ जाना है
मत लिया कर इतनी
गम्भीरता से किसी
भी चीज को
आज की दुनियाँ में
हर बात नई सी
जब हो जा रही है
हवा पानी आग
जमीन पेड़ पौंधे
जैसी बातें सोचने
वाले लोगों के कारण
ही आज की पीढ़ी
अपनी अलग पहचान
नहीं बना पा रही है
पानी मिल रहा है पी
कुछ मिलाना है मिला
खुश रह
बेकार की बातें
मत सोच
कुछ कमा धमा
होगा कभी
युद्ध भी
अगर पानी को
लेकर कहीं
वही मरेगा
सबसे पहले
जो पैसे का नल
नहीं लगा पायेगा
पैसा होगा तो वैसे भी
प्यास नहीं लगेगी
पानी नहीं भी
होगा कहीं
तब भी कुछ अजब
गजब नहीं हो जायेगा
ज्यादा से ज्यादा
शरम से जमीन के
थोड़ा और नीचे
की ओर चला जायेगा
और फिर एक बेशरम
चीर हरण करेगा
किसी को भी
कुछ नहीं होगा बस
पानी ही खुद में
पानी पानी हो जायेगा ।

सोमवार, 2 दिसंबर 2013

जमीन की सोच है फिर क्यों बार बार हवाबाजों में फंस जाता है

अब बातें
तो बातें है
कुछ भी
कर लो
कहीं भी
कर लो

मुसीबत
तो तब
हो जाती है
जब
बातें दो
अलग अलग
तरह की
सोच रखने
वालों के
बीच हो
जाती हैंं

बातें
सब से
ज्यादा
परेशान
करती हैंं
एक जमीन
से जुड़ने
की कोशिश
करने वाले
आदमी को
जो कभी
गलती से
हवा में
बात करने
वालों मे
जा कर
फंस
जाता है

ना उड़
पाता है
ना ही
जमीन पर
ही आ
पाता है

जो हवा
में होता है
उसे क्या
होता है
खुद हवा
फैलाता है
बातों को
भी हवा में
उड़ाता है

हवा में
बात करने
वाले को
पता होता है
कुछ ऐसा
कह देना है
जो कभी भी
और
कहीं भी
नहीं होना है

जो जमीनी
हकीकत है
उससे किसी
को क्या
लेना होता है

पर
बस एक बात
समझ में
नहीं आती है

हवा में बात
करने वालों
की टोली
हमेशा एक
जमीन से
जुड़े कलाकार
को अपने
कार्यक्रमों का
हीरो बनाती है

बहुत सारी
हवा होती है
इधर भी
होती है
उधर भी
होती है

हर चीज
हवा में
उड़ रही
होती है

जब
सब कुछ
उड़ा दिया
जाता है
हर एक
हवाबाज
अपने अपने
धूरे में जाकर
बैठ जाता है

जमीन से
जुड़ा हुआ
बेचारा एक
जोकर
बन कर
अपना सिर
खुजाता हुआ
वापस जमीन
पर लौट
आता है

एक सत्य को
दूसरे सत्य से
मिलाने में
अपना जोड़
घटाना भी
भूल जाता है

पर क्या
किया जाय
आज
हवा बनाने
वालों को ही
ताजो तख्त
दिया जाता है

जमीन
की बात
करने वाला
सोचते सोचते
एक दिन
खुद ही
जमींदोज
हो जाता है ।

गुरुवार, 25 अप्रैल 2013

बस चले मेरा तो अपने घर को भी केन्द्रीय बनवा दूँ !

जैसे ही मैने सुना
वो एक बीमार के लिये
नये कपडे़ कुछ
बनाने जा रहा है
बीमारी उसकी
दिख ना जाये
किसी को गलती
से भी कहीं
उसके लिये एक महल
बना कर उसे उसमें
सुलाने जा रहा है
खाने पीने का इंतजाम
बहुत अच्छा हो जायेगा
केंद्र से मिलने वाली
ग्रांट ढेर सारी
दिलवा रहा है
मुझे याद आ गयी
उसकी पुरानी साख की
जब उसकी छत्र छाया
में बहुत से कोयले
हीरे हो जाया करते थे
तब उसके पास कुछ
नहीं हुआ करता था
वो बहुतों को बहुत
कुछ दिया करता था
इन्ही लोगों ने
उस समय उसकी
बीमारियों को बढ़ाया
वो गेहूँ खाता था
उसे डबलरोटी और
केक का लालच दिलवाया
पैबंद पर पैबंद लगा कर
नया हो गया है
हम सब को समझाया
अब वो फिर वही
कारनामा दुहराने
जा रहा है
पैबंद लगे पर
पैबंद एक नया
फिर लगवा रहा है
हम आदी हो चुके
पुराने कभाड़ को
यूँ ही सजाने के
नया बने कुछ
नयी जमीन पर कहीं
नहीं सोचेंगे हम कभी
किसके पास है
फुरसत अपने
को छोड़ के सोचने की
और कौन दे रहा है
कुछ पैसे हमें
ऎसी बातों को
पचाने के ।

शनिवार, 25 अगस्त 2012

पैर जमीन से उठा बड़ा आदमी हो जा

जब तक जमीन से
नहीं उठ पायेगा
बड़ा आदमी तुझे
कोई नहीं बनायेगा
सुन अगर बड़ा आदमी
सच्ची में तू बनना
बहुत ही ज्यादा चाहता है
तो मेरी एक सस्ती
आसान सी सलाह को
क्यों नहीं अपनाता है
अभी कहना मान जा
और कल को ही
बडे़ आदमी की सूची
देखने किसी बडे़ आदमी
के पास चला जा
वैसे अपना खुद भी
तो सोचा कर कुछ जरा
कब तक छोटे आदमी
की तरह करेगा मरा मरा
कोशिश कर पाँव थोड़ा
सा सही जमीन से उठा
हवा में तो कुछ लटका
अब चाहे इसके लिये
अपना घर बेच जेवर बेच
या फिर जमीन बेच के आ
साईकिल ही सही
अपने नीचे तो लगा
बस जमीन से पैर
कुछ ऊपर उठा
हैसियत इससे ज्यादा की
समझता है अपनी अगर
तो स्कूटर लगा
मोटरसाईकिल लगा
ज्यादा ही बड़ा होना
हो अगर तो चल
कार ही ला कर के लगा
पर देख बड़ा आदमी
अब तो हो ही जा
सबसे बड़ा आदमी
होने की ख्वाहिश
रखता है तू थोड़ी सी
भी अगर तो ऎसा कर
हवाई जहाज का
टिकट एक मंगवा
उस में बैठ और
पैर छोड़ पूरा का पूरा
हवा में चला जा
सबसे बडे़ आदमी
की सूची में जाकर
के जुड़जा और
हवा भी खा  ।

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