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रविवार, 25 अक्तूबर 2015

राम ही राम हैं चारों ओर हैं बहुत आम हैं रावण को फिर किसलिये किस बात पर जलाया

विजया दशमी
के जुलूस
में भगदड़
मचने पर
पकड़ कर
थाने लाये
गये दो लोगों
से जब
पूछताछ हुई

एक ने
अपने को
लंका का राजा
रावण बताया
दस सिर
तो नहीं थे
फिर भी
हरकतों से
सिर से पाँव
तक रावण
जैसा ही
नजर आया

और

दूसरे की
पहचान
बहुत
आसानी से
अयोध्या के
भगवान राम
की हुई
जिनको बिना
देखे भी
सारे के सारे
रामनामी
दुपट्टे ओढ़े
भक्तों ने
आँख नाक
कान बंद
कर के
जय श्री राम
का नारा
जोर शोर
से लगाया 


दोनो ने
अपना गाँव
इस लोक
में नहीं
परलोक में
कहीं होना
बताया

मजाक ही
मजाक में
उतर गये
उस लोक से
इस लोक में
इस बार
दशहरा
पृथ्वी लोक
में आकर
खुद ही देखने
का प्लान
उन्होने
खुद नहीं
उनके लिये
ऊपर उनके ही
किसी चाहने
वाले ने बनाया

ऊपर वालों ने
नीचे आने जाने
में अड़ंगा भी
नहीं लगाया

भीड़ से
पल्ला पड़ा जब
राम और
रावण का
नीचे उतर कर
भीड़ में से
किसी ने
अपने आप को
राम का भाई
किसी ने चाचा
किसी ने बहुत ही
नजदीक का
ताऊ बताया

रावण के
बारे में
पूछने पर
किसी ने
कोई जवाब
नहीं दिया
इसने उससे
और उसने
किसी और
से पूछने
की राय दे
कर अपना
मुँह इधर
और
उधर को किया
सभी ने
अपना अपना
पीछा रावण
को देखते
ही छुड़ाया

राम की
बाँछे खिली
सामने खड़ी
सारी जनता
से उनकी
खुद की
रिश्तेदारी मिली

और

रावण बेचारा
सोच में पड़े
खड़ा रह पड़ा
किसलिये
और
किस मुहूर्त में
राम के साथ
रामराज्य
की ओर
ऊपर से नीचे
एक बार
और
अपनी जलालत
देखने
निकल पड़ा ?

चित्र साभार: www.shutterstock.com

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