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सोमवार, 6 मार्च 2017

सुना है फिर से आ गयी है होली

चल बटोरें रंग
बिखरे हुऐ
इधर उधर
यहाँ वहाँ
छोड़ कर
आ रहा है
आदमी आज
ना जाने सब
कहाँ कहाँ

सुना है फिर से
आ गयी है होली
बदलना शुरु
हो गया है मौसम

चल
करें कोशिश
बदलने की
व्यवहार को अपने
ओढ़ कर हंसी
चेहरे पर दिखाकर
झूठी ही सही
थोड़ी सी खुशी
मिलने की
मिलाने की

सुना है फिर से
आ गयी है होली

चल
दिखायें रास्ते
शब्दों को
भटके हुऐ
बदलें मतलब
वक्तव्य के
दिये हुए
अपनों के
परायों के
करें काबू
जबानें
लोगों की
सभी जो
आते
हैं नजर
इधर और
उधर सटके हुऐ

सुना है फिर से
आ गयी है होली

चल चढ़ाये भंग
उड़ायें रंग
जगायें ख्वाब
सिमटे हुऐ
सोते हुऐ
यहाँ से
वहाँ तक
के सभी के
जितने भी दिखें
समय के
साथ लटके हुऐ

सुना है फिर से
आ गयी है होली

चल
करें दंगा
करें पंगा
लेकिन निकल
बाहर हम्माम से
कुछ ही दिन सही
सभी नंगों के
साथ हो नंगा

सुना है फिर से
आ गयी है होली

चल
उतारें रंग
चेहरे के
मुखौटों के
दिखायें रंग
अपने ही
खुद के होठों के
कहें उसकी नहीं
बस अपनी ही
कहें अपनों से कहें
किसलिये
लुढ़कना
हर समय
है जरूरी
साथ लोटों के

सुना है फिर से
आ गयी है होली
सुना है फिर से
आ गयी है होली ।


चित्र साभार: Happy Holi 2017

मंगलवार, 8 नवंबर 2011

दंगे

नटखट चूहे
की खटखट
से चौंक कर
लटपट करते
उठी तुरंत
फेंक रजाई
चटपट गिरा
जमीन पर
दौड़ पडी़
रसोई की ओर
हुवी भी नहीं
थी भोर
अल्साये
अंधेरे में
मलते हुवे आंख
भूल गयी
समय की ओर
देखना भी
रोज की तरह
चूल्हे पर
चाय की
केतली चढ़ा
जोर से बड़बड़ाई
माचिस की डिब्बी
को ढूंढते
खिड़की के
दरवाजे से टकराई
हमेशा की तरह
बाहर आयी
फिर अचानक
बैठ गयी
दरवाजे पर
याद आ गया
उसे फिर कि
बेटा तो
दंगे की भेंट
चढ़ गया
किसी और के
बेटे को
बचाते बचाते
और सुबह की
चाय का पानी
खौलता रहा
केतली में ।

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