उलूक टाइम्स: दुबारा
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शनिवार, 1 फ़रवरी 2014

अच्छा होता है जब समझने वाली बात नहीं लिखी जाती है

बहुत सी बातें
कई बार किसी
खास मौके पर ही
समझ में आती हैं

कोई हादसा नहीं
हो पाया हो तो
समझने की जरूरत
भी नहीं रह जाती है

एक चिकित्सक के
दिये पर्चे पर जब
नजर जाती है
गोले बने हुऐ से

गोलियाँ
खाने की
संंख्या और
बारम्बारता

एक गधे के लिये
भी समझ लेने वाली
आसान सी एक
बात हो जाती है

बाकी दवाईयों को
समझने की जरूरत
ही कहाँ हो पाती है

दुकान से दवाईयों
के ऊपर भी गोले
बना के समझा 
ही दी जाती हैं

बहुत बार लगता है
समझ में कुछ
तो आना चाहिये

चिकित्सक महोदय
से पूछने पर बता
भी दी जाती हैं

क्यों होता होगा ऐसा

दिमाग में
जोर डालने की
बात हो जाती है

जब एक ही तरह
के शब्दों से बनी
माला दूसरे के
द्वारा उल्टा कर के
बना दी जाती है

किसने बनाई
किसके लिये बनाई
दोनो कैसे एक
जैसी हो जाती हैं

सही करता है
एक चिकित्सक
इस बात से
बात समझ
में आती है

एक के द्वारा
लिख दी गई दवाई
दूसरे को पता भी
नहीं चल पाती है

बहुत अच्छा
करते हैं
कुछ लोग
कुछ ऐसा
ही लिखकर

जिसे देख कर
उसे दुबारा
छाप लेने की सोच

कहींं और भी
पैदा नहीं
हो पाती है ।